रूण के ऐतिहासिक तालाब में मृत मिली मछलियां ढाई साल पहले भी इसी प्रकार मरी हुई मिली थी मछलियां

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रूण के ऐतिहासिक तालाब में मृत मिली मछलियां

ढाई साल पहले भी इसी प्रकार मरी हुई मिली थी मछलियां

जीव प्रेमियों ने जताया दु:ख

मूण्डवा (रिपोर्टर लाडमोहम्मद खोखर)। पंचायत समिति मूंडवा के गांव रूण स्थित ऐतिहासिक रतनासागर तालाब में बुधवार सुबह कई मछलियां मृत पाई गई। उधर मछलियों के मरने की खबर सुनकर काफी ग्रामीण तालाब पहुंचे, मौजूद ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि जिस तरह लंपी बीमारी गायों में फैली हुई हैं, इसी तरह शायद इन मछलियों में भी कोई रोग हो सकता है इसीलिए संबंधित विभाग यहां पहुंच कर पूरी जांच पड़ताल करें ताकि इन मछलियों को बचाया जा सके। इस संदर्भ में कृषि पर्यवेक्षक अनिलकुमार वर्मा और सहदेव हरिजन ने बताया कि रोजाना की तरह हम इस तालाब के पास टहल रहे थे, ऐसे में कई मछलियां किनारे पर मृत मिली, हमने तुरंत ग्राम पंचायत और मीडिया को इस आशय की सूचना दी, तत्पश्चात मीडिया ने नागौर और अजमेर के विभागों से इस संबंध में बातचीत करके मछलियों को बचाने की बात की। इस दौरान फखरुद्दीन खोखर और सरपंच पुत्र भुटाराम गोलिया ने बताया आज से लगभग ढाई साल पहले भी इसी प्रकार इस तालाब में मछलियां मृत पाई गई थी, तब विशेषज्ञों ने इन मछलियों में ऑक्सीजन और भूख की कमी होना बताया था और ग्राम पंचायत ने उस वक्त कुछ दवा का छिड़काव भी किया था। ग्रामीणों ने इन मछलियों की जान बचाने की गुहार प्रशासन से की है।

इनका कहना है

भूख से मरी है मछलियां

हमने मीडिया द्वारा भेजे गए फोटो और वीडियो से पता लगाया है कि इन मछलियों की मंगूर प्रजाति है और यह विशेषकर भूख सहन नहीं कर पाती हैं। इनका मुख्य भोजन मांसाहारी होता है और शाकाहारी भोजन भी ले लेती है, मगर भोजन बराबर नहीं मिलने से मर जाती है। वैसे इस मछलियों को 6 महीने में एक बार बेचना जरूरी होता है, अन्यथा बड़ी होने पर जानवरों या मनुष्यों पर मांस के लिए हमला कर देती है। बाकी इनमें कोई रोग नजर नहीं आ रहा है।

विशेषज्ञों की राय ली जाएगी

हमने भी जाकर मौका देखा है, जल्दी ही विशेषज्ञों की राय लेकर मछलियों को बचाने के प्रयास किए जाएंगे।
रामेश्वर गोलिया, सरपंच प्रतिनिधि, रूण।

kalamkala
Author: kalamkala

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