लाडनूं के गंभीर हादसा क्षेत्र करंट बालाजी चौराहा को सुरक्षित बनाने और मौतों पर नियंत्रण के लिए उठी जनता की आवाज, जन संघर्ष समिति के लोगों ने दिया कलेक्टर व सांसद को ज्ञापन, की समस्या के हल की मांग

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लाडनूं के गंभीर हादसा क्षेत्र करंट बालाजी चौराहा को सुरक्षित बनाने और मौतों पर नियंत्रण के लिए उठी जनता की आवाज,

जन संघर्ष समिति के लोगों ने दिया कलेक्टर व सांसद को ज्ञापन, की समस्या के हल की मांग

लाडनूं। लाडनूं की ज्वलंत समस्या करंट बालाजी चौराहे पर आएदिन होने वाली दुर्घटनाओं व मौतों की रोकथाम के लिए सार्थक व स्थाई कदम उठाए जाने के लिए यहां गठित जन संघर्ष समिति के तत्वावधान में अतिरिक्त जिला कलेक्टर मोहनलाल एवं सांसद हनुमान बेनिवाल को ज्ञापन सौंपे गए। ज्ञापन में बताया गया कि लाडनूं से गुजर रहे एन.एन. 58 और मेगा हाईवे किशनगढ-हनुमानगढ पर स्थित करंट बालाजी चैराहा पर आएदिन दुर्घटनाएं होती रहती है। यहां अब तक करीब 35 लोग सड़क हादसों में मौत का शिकार हो चुके हैं। इन दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आमजन और विभिन्न संगठनों की ओर से अनेक बार ज्ञापन भी दिए जा चुके, धरना-प्रदर्शन भी किए गए, सम्बंधित अधिकारियों ने मौका भी देखा और समस्या को गंभीर भी पाया, लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम आज तक नहीं उठाया गया।

पैदल व दुपहिया वाहनों की रहती है भारी आवाजाही

ज्ञापन में बताया गया है कि यह सड़क मार्ग लाडनूं शहर की आबादी के बीच से निकलता है। इस सड़क के दोनों तरफ घनी बस्तियां बसी हुई हैं। इस सड़क के पास करंट बालाजी मंदिर, करणी माता मंदिर आदि अनेक धार्मिक आस्था के प्रमुख स्थल है, जिनमें प्रतिदिन कड़ी संख्या में महिला-पुरूष, बच्चे आदि श्रद्धालुजन का आना-जाना बना रहता है। इस सड़क पर मुंसिफ कोर्ट व एडीजे कोर्ट स्थित है, जिसमें रोज बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन रहता है। सड़क पर दो पेटोल पम्प स्थित हैं, जिनमें सभी दुपहिया वाहन चालक व अन्य सभी वाहन चालक पेटोल भरवाने के लिए प्रतिदिन आते हैं। सड़क पर होटलें व अन्य सभी तरह का मार्केट भी स्थित है। इस सड़क के पास बापूजी नर्सिंग कोलेज, सैनिक वेलफेयर स्कूल एवं काॅलेज, राजकीय संस्कृत विद्यालय, मुख्य ब्लाॅक शिक्षा अधिकारी कार्यालय आदि स्थित है। मंगलपुरा, दुजार आदि गांवों को जाने का यह प्रमुख मार्ग है। इन सभी उपरोक्त कारणों से यह सड़क मार्ग पैदल व दुपहिया वाहनों के लिए अत्यधिक व्यस्ततम मार्ग है।

मार्ग पर रहता है भारी वाहनों का भारी दबाव

ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि यह मार्ग, जिस पर करंट बालाजी चौराहा स्थित है, भारी वाहनों की आवाजाही का भी व्यस्ततम मार्ग है, क्योंकि यहां एनएच 58, मेगा हाईवे किशनगढ-हनुमानगढ और एनएच 458 इन तीन हाईवे के वाहनों का एक साथ दबाव बनता है। इस कारण पैदल व दुपहिया वाहन चालकों के लिए गुजरना खतरनाक व जानलेवा सिद्ध हो रहा है। इस चैराहे के एक तरफ मुंसिफ कोर्ट के पास बने ओवरब्रिज से उतरने वाले वाहन अपनी गति को एक साथ रोक नहंी पाते, जिससे आएदिन दुर्घटनाएं होती रहती है। इसी तरह इस सड़क पर दूसरी तरफ लक्ष्मीतारा थियेटर के पास भी रेलवे ओवरब्रिज बना हुआ है। उससे उतरने वाले वाहन भी अपनी गति से निकलते हैं। बहुम कम दूरी पर दो-दो ओवरब्रिज बनाए जाने से दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है।

समस्या के समाधान के लिए पेश किए सुझाव

ज्ञापन में इस अतिगंभीर समस्या की तरफ संवेदनशीलता से ध्यान देकर समस्या का स्थाई हल किए जाने में सहयोग प्रदान करवाने की अपील करने के साथ ही इस समस्या के समाधान के लिए सुझाव भी प्रस्तुत किए गए हैं। इनमें बताया गया है कि सड़क पर दोनों पुलियाओं से बीच में डिवाइडर लगवाए जावंें। करंट बालाजी चैराहे पर सर्किल बनवाया जाए। करंट बालाजी चैराहे व अन्य आवश्यकता वाले स्थानों पर स्वसंचालित टेफिक बती लगवाने की व्यवस्था की जाए। इस चैराहे पर स्थाई रूप से यातायात पुलिसकर्मी की ड्यूटी लगाई जावे। चौराहे के स्थान पर अंडर पास बनवाया जावे। इन दोनों पुलियाओं (सिनेमाहाॅल के ब्रिज से कोर्ट वाले ब्रिज) को आपस में एक किया जाकर सभी वाहनों की निकासी ब्रिज के उपर से निकाली जाने की हो।

इन्होंने सौंपा ज्ञापन

ज्ञापन देने वालों में जन संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामनिवास शर्मा, मंत्री देवाराम पटेल, उपाध्यक्ष उमेश पीपावत, ओमप्रकाश बागड़ा, सह मंत्री सुमित्रा आर्य पार्षद, कोषाध्यक्ष अनिल पिलानिया, जगदीश यायावर पत्रकार आदि शामिल थे। ज्ञापन की प्रतियां भारत सरकार के टांसपोर्ट मंत्री ंनितिन गडकरी, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व राज्य के मुख्य सचिव को भी भेजी गई है। गौरतलब है कि हाल ही में पार्षद सुमित्रा आर्य के निवास पर इस गंभीर समस्या को लेकर एक गैर-राजनीतिक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में इस ज्वलंत समस्या के समाधान के लिए रणनीति तैयार की गई थी, जिसके तहत नागौर जाकर कलेक्टर वा सांसद का दरवाजा खड़खड़ाया गया है। अभी आगे और अनेक कदम उठाए जाने हैं।

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Author: kalamkala

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