हजारों साल पूर्व जनभाषा रही प्राकृत का आधुनिक पद्धति से अध्ययन जरूरी- डाॅ. प्रियदर्षना जैन

SHARE:

Breking
[responsivevoice_button voice="Hindi Female"]

हजारों साल पूर्व जनभाषा रही प्राकृत का आधुनिक पद्धति से अध्ययन जरूरी- डाॅ. प्रियदर्षना जैन
लाडनूं।kalamkala.in भारतीय संस्कृति को जानना और समझना है, तो प्राकृत को जानना और समझना होगा। प्राकृत भाषा की आज उपेक्षा हो रही है, इसके लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं। यदि भारत को पुनः विश्वगुरू बनाना है तो प्राकृत भाषा और साहित्य का संरक्षण एवं संवर्द्धन करना होगा। यह विचार जैन विश्वभारती संस्थान के प्राकृत एवं संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित मासिक व्याख्यानमाला के अन्तर्गत आयोजित ’प्राकृत भाषा: अतीत एवं वर्तमान’ विषयक विशेष व्याख्यान में मद्रास विश्वविद्यालय के जैनविद्या विभाग की विभागाध्यक्षा डाॅ. प्रियदर्शना जैन ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि प्राकृत भाषा जनभाषा के रूप में हजारों वर्ष पहले से विद्यमान रही है और आधुनिक भाषा की जननी के रूप में भी प्राकृत भाषा ही रही है। उन्होंने प्राकृत भाषा को मातृभाषा में पढाने पर तथा आधुनिक पद्धति को भी प्राकृत के अध्ययन में शामिल करने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रो. दामोदर शास्त्री ने कहा कि प्राकृत भाषा को जानने और समझने के लिए हमें समर्पित भाव से इसका अध्ययन करना पडेगा। साथ ही प्राकृत के साथ-साथ संस्कृत को भी जानना और समझना चाहिए। अनेक उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने दोनों भाषाओं के महत्त्व को प्रतिपादित किया। कार्यक्रम का प्रारम्भ छात्रा अदिति के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण डाॅ. समणी संगीत प्रज्ञा ने दिया तथा कार्यक्रम का संयोजन डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज ने किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 40 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी इस व्याख्यान के अन्तर्गत किया गया।

kalamkala
Author: kalamkala

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सबसे ज्यादा पड़ गई

जसवंतगढ पुलिस की सफल कार्रवाई, मात्र 72 , घंटों में अनूपगढ़ से दबोचा अपहरण व दुष्कर्म के आरोपी को, पुलिस ने जसवंतगढ व सुजानगढ़ में सीसीटीवी कैमरे खंगाले और संदिग्ध बाइक को चिह्नित कर पहुंच गए मुलजिम तक

लाडनूं में विशाल तेजा गायन, नृत्य, सम्मान एवं प्रसादी समारोह का आयोजन 23 जून को, पोकरराम स्मृति किसान छात्रावास के पदाधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर दी जानकारी और कहा, कार्यक्रम होगा ऐतिहासिक

लाडनूं के पोकरराम स्मृति किसान छात्रावास में विशाल तेजा गायन, नृत्यादि एवं प्रसादी समारोह का आयोजन 23 जून को, सघन जन सम्पर्क और निमंत्रण पत्र देने के लिए जुटी विभिन्न टीमें, कार्यक्रम को बनाया जाएगा ऐतिहासिक

अब आई शिकंजा कसने की बारी- लाडनूं में वध किए गए पशुओं के अवशेष, मुर्गियों के पंख, मांस आदि अपशिष्ट पदार्थ खुले में फेंकने वालों की होंगी गिरफ्तारी, नगर पालिका ने लाडनूं पुलिस में दर्ज करवाई एफआईआर, चौकसी तेज की

शहर चुनें

Follow Us Now