लाडनूं में भूमाफिया गिरोह के लोग सक्रिय-  लाडनूं में नाइयों की बगीची के पास 20 साल पहले बेची जा चुकी जमीन की हुई फिर रजिस्ट्री, नामान्तरण नहीं होने का उठाया अभियुक्तों ने फायदा, कब्जासुद जमीन की दिखा दी खरीद

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लाडनूं में भूमाफिया गिरोह के लोग सक्रिय- 

लाडनूं में नाइयों की बगीची के पास 20 साल पहले बेची जा चुकी जमीन की हुई फिर रजिस्ट्री,

नामान्तरण नहीं होने का उठाया अभियुक्तों ने फायदा, कब्जासुद जमीन की दिखा दी खरीद

लाडनूं। शहर में जमीनों को खुर्दबुर्द करने और वास्तविक भू मालिकों को उनके हक से वंचित करने के तिकड़मों को अंजाम देने वाले धूर्त और शातिर लोग भूमाफिया के रूप में गिरोहबद्ध होकर लम्बे समय से सक्रिय हैं। इन लोगों की मिलीभगत इतनी गहरी होती है कि प्रशासन या पुलिस कोई भी इनका कुछ नहीं बिगाड़ पाते और इनकी मनमर्जी जमीनों के मामले में चलती रहती है। जिनकी जमीन होती है, वो तो रोते ही रह जाते हैं।
भूमाफियाओं ने किया हस्तक्षेप

हाल ही इसी तरह की एक रिपोर्ट स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज होने की बात सामने आई है। परिवादी रामावतार प्रजापति निवासी चाड़वास, सांवरमल पंजापत निवासी लाडनूं, शांतिदेवी पत्नी मोटाराम प्रजापत निवासी सुजानगढ और रामकुमार प्रजापति निवासी चाड़वास की ओर से दर्ज इस रिपोर्ट के अनुसार अभियुक्तगण काशीराम प्रजापत लाडनूुं, विक्रमसिंह राठौड़ ठरड़ा सुजानगढ, केशरसिंह राजपूत राजियासर मीठा सुजानगढ, मन्नालाल प्रजापत सुजानगढ, संतोष शर्मा सुजानगढ, हरिप्रसाद भार्गव सुजानगढ और तीन अन्य भूमाफिया प्रकार के लोग, जो गाड़ियां लेकर लाडनूं में घूम रहे हैं, पर आरोप लगाए गए हैं।
बीस साल पहले ही बेची जा चुकी थी जमीन
इस रिपोर्ट मे वर्णित परिवादीगण की चल व अचल सम्पति लाडनूं में स्थित है। इनकी एक जमीन लाडनूं में नाइयों की बगीची के पास खसरा नं. 275 की है, जो अभियुक्त काशीराम के नाम की खातेदारी की थी और उसे यह भूमि पारिवारिक बंट में मिली थी। काशीराम ने इस 0.4209 हेक्टेयर भूमि की प्लाटिंग की और नक्शा बनवा कर रास्ते छोड़ते हुए कुल 21 प्लाट बनाए। इन भूखंडों को काशीराम ने परिवादीगण को रजिस्टर्ड बेचान व अनुबंध पत्र के जरिए प्रतिफल प्राप्त करके बेचान कर दिए थे और उन्हें कब्जा करवा दिया गया था। इसके बाद 20 सालों से उनका ही कब्जा इस जमीन पर चला आ रहा था।
कपटपूर्वक करवाया बेचान व म्यूटेशन
अभियुक्त इस समस्त बेची जा चुकी जमीन की म्यूटेशन नहीं होने से खातेदारी में बदलाव नहीं किए जाने की कमी को भांपते हुए परस्पर सांठगांठ करके आपराधिक षड्यंत्र रच कर गुपचुप रूप से इस भूसम्पदा का अपने नाम से बेचान गत 7 जुलाई को करवा लिया और इस रजिस्टर्ड बेचान के माध्यम से जल्दबाजी में नामान्तरण भी करवा डाला। यह बेचाननामा कपटपूर्ण व विधिविरूद्ध तरीके से छल करते हुए किया गया, जबकि विक्रय के समय अभियुक्तगण का कोई कब्जा इस जमीन पर नहीं था। इन सभी अभियुक्तगण को यह भलीभांति मालूम था कि यह पूरी जमीन पूर्व में ही बेची जा चुकी है। रिपोर्ट में अभियुक्तगण को आदतन आपराधिक किस्म का बताया गया है और बताया गया है कि काशीराम के अलावा शेष अभियुक्त भूमाफिया किस्म के लोग हैं और उनके विरूद्ध सुजानगढ व लाडनू पुलिस थानों में आपराधिक मुकदमें भी दर्ज हो चुके हैं। इन्होंने पूर्व में विक्रीत भूमि को जानते हुए भी दुर्भावना पूर्वक आपराधिक षडृयंत्र रचते हुए म्यूटेशन भी स्वीकत करवा लिया।
जारी है पुलिस की जांच
लाडनूं पुलिस ने इस प्रकरण को धारा 420, 406, 447, 427 आईपीसी के तहत दर्ज किया है और जांच कार्य हेड कांस्टेबल गजेन्द्र सिंह को सुपुर्द किया है। इस रिपोर्ट के साथ परिवादीगण ने अपने जमीन के बेचाननामों की प्रतियां भी प्रस्तुत की है, जिनमें काशीराम ने उन्हें बेचा था। इन सभी बेचाननामों पर काशीराम के स्वयं के हस्ताक्षर भी अंकित हैं और गवाहों के हस्ताक्षर भी साक्षियों के रूप में करवाए गए हैं। इस सम्बंध में अभियुक्त काशीराम का कहना है कि उसने शेष अभियुक्तों को स्पष्ट बता दिया था, कि यह पूरी जमीन वह काफी पहले बेच चुका था। इसके बावजूद उन्होंने तीन लाख रूपए देकर रजिस्ट्री करवा ली। तीन लाख रूपए उनके द्वारा और देने की बात थी, लेकिन आज तक वे नहीं दिए।[the_ad id=”1853″]
kalamkala
Author: kalamkala

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