समरस सहभोज की अनूठी मिसाल- मिलकर खाना खाया, भेद सभी भुलाया, लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में समरसता कार्यक्रम एवं सहभोज का लिया आनन्द

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समरस सहभोज की अनूठी मिसाल- मिलकर खाना खाया, भेद सभी भुलाया,

लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में समरसता कार्यक्रम एवं सहभोज का लिया आनन्द

लाडनूं (kalamkala.in)। भारत रत्न बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर की जयंती सभी मनाते हैं और इस अवसर पर अधिकतर यही देखने को मिलता है कि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बाबा साहब के जीवन और कार्यों को याद किया जाता है। उन पर कुछ भाषण दे दिए जाते हैं और प्रतिमा या चित्र पर पुष्पहार अर्पित किए जाते हैं, उन्हें श्रद्धांजलि-पुष्पंजलि दी जाती है। कहीं-कहीं रैली निकाल कर नारे लगा दिए जाते हैं। परन्तु डा. अम्बेडकर की भावनाओं को अपनाने और जीने के लिए कोई आगे आते हुए नहीं दिखाई देता। इस सब लीक पीटने वाले कामों से कुछ अलग हट कर यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय में दिखाई देता है। यहां सारे भेदभाव भुलाकर अम्बेडकर की भावनाओं को जीने का प्रयास किया जाकर छात्राओं को उसके लिए जीवन्त ढंग से प्रेरित किया जाता है।

सहभोज द्वारा मिटाए सारे भेद

हाल ही में डा. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर जैविभा विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में ‘सामाजिक समरसता कार्यक्रम’ आयोजित किया गया और उसमें आयोजित ‘सह-भोज कार्यक्रम’ में सभी छात्राओं व स्टाफ सदस्यों ने साथ बैठकर खाना खाया। इस सहभोज कार्यक्रम में सबने अपने-अपने घर से भोजन बनाकर साथ लाकर यहां सबके साथ मिलकर बिना किसी भेदभाव के सबके भोजन को सबने मिलकर एक साथ खाया और सारे भेदों को भुलाया। सामाजिक समरसता की यह सबसे बड़ी पहल है, सहभोज। शिक्षिकाओं एवं छात्राओं ने मिलकर इस प्रकार मिलकर घर-घर बने खाने को प्रेमभाव से स्नेहभाव से खाकर समाज के समक्ष अनूठी मिसाल पेश की है। यह कोई पहली बार नहीं किया गया, बल्कि हर साल अम्बेडकर जयंती को इसी प्रकार मनाया जाकर परस्पर सौहार्द्र व भाईचारे की भावना का संदेश घर-घर पहुंचाया जाता है।

डा. अम्बेडकर के प्रति सम्मान

विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. मनीष भटनागर ने डा. अंबेडकर के विचारों पर प्रकाश और बताया कि इस दिन को ‘समानता दिवस’ और ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि जीवन भर समानता के लिए संघर्ष करने वाले अंबेडकर को समानता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। डा. अंबेडकर विश्वभर में मानवाधिकार आंदोलनकर्ता, संविधान निर्माता और प्रकांड विद्वता के लिए जाने जाते हैं। यह दिवस उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर सभी स्टाफ सदस्य एवं छात्राध्यापिकाएं उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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