डेढ़ दशक से अधिक बीत चुके पर लाडनूं के ट्रोमा सेंटर का कोई अता-पता नहीं, कृषिमंत्री बुरड़क के शिलान्यास के बाद सरकार ने क्या किया? लाडनूं में हर माह 100 लोग होते हैं सड़क हादसों में घायल, तीन हाईवे होने पर भी उच्च इलाज की कोई सुविधा नहीं, रींगण के ओमप्रकाश जांगिड़ की मौत बार-बार रैफर करने और घायल को लिए घूमने से हुई

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डेढ़ दशक से अधिक बीत चुके पर लाडनूं के ट्रोमा सेंटर का कोई अता-पता नहीं, कृषिमंत्री बुरड़क के शिलान्यास के बाद सरकार ने क्या किया?

लाडनूं में हर माह 100 लोग होते हैं सड़क हादसों में घायल, तीन हाईवे होने पर भी उच्च इलाज की कोई सुविधा नहीं,

रींगण के ओमप्रकाश जांगिड़ की मौत बार-बार रैफर करने और घायल को लिए घूमने से हुई

लाडनूं (kalamkala.in)। लम्बे समय से लाडनूं क्षेत्र में ट्रोमा सेंटर खोले जाने की मांग और कवायद चल रही है। लेकिन, कई सरकारें आईं और गईं, यह ट्रोमा सेंटर आज तक नहीं खुल पाया। लाडनूं और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जितने भी सड़क हादसे होते हैं, लगभग उनके सभी घायलों को रैफर किया जाता है और अधिकांश घायल रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं अथवा इलाज में देरी होने से हाई सेंटर में भर्ती होकर भी वे दम तोड़ देते हैं। इन सब समस्याओं का हल केवल और केवल ट्रोमा सेंटर है, जिसके लिए जमीन भी आवंटित की जा चुकी, परन्तु सुस्त सरकारें लापरवाही में समय बीता रही हैं। इस प्रकार सैंकड़ों मौतों की ज़िम्मेदार राज्य सरकार है।

कृषिमंत्री बुरड़क ने किया था ट्रोमा सेंटर का शिलान्यास

कांग्रेस शासन के समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लाडनूं में ट्रोमा सेंटर को बजट घोषणाओं में शामिल किया था। तत्कालीन कृषिमंत्री हरजीराम बुरड़क ने लाडनूं के राजकीय चिकित्सालय में ट्रोमा सेंटर का शिलान्यास भी कर दिया था। लेकिन, इसके बाद चुनाव आ गए और सरकार बदल गई। फिर लम्बे समय से ट्रोमा सेंटर को लेकर केवल कवायद ही चली। भौतिक रूप से ट्रोमा सेंटर धरातल पर नहीं आ पाया। लाडनूं क्षेत्र से तीन हाईवे निकलते हैं और आएदिन कोई न कोई सड़क दुघर्टना होती है। हर महिने करीब 100 लोग घायल होते हैं, उनके इलाज के लिए हाई सेंटर रैफर या लाडनूं के प्राइवेट होस्पीटल ही क्यों, राजकीय स्तर पर वर्तमान उप जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाएं सुधारने या ट्रोमा सेंटर की स्थापना पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है? करीब डेढ़ दशक बीत चुका, लेकिन जन प्रतिनिधि या राज्य सरकारें सब आंखें मूंदे बैठे हैं, किसी को रोजमर्रा के मृतकों की कोई फ़िक्र नहीं है।

समय पर उचित व उच्च स्तरीय इलाज नहीं मिलने से दुर्घटना में घायल ने दम तोड़ा

लाडनूं के रींगण गांव में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें समय पर इलाज नहीं मिल पाने से हादसे में घायल हुए युवक को मौत का सामना करना पड़ा। इसमें एक तेज गति पिकअप ने टक्कर मार कर एक मोटर साइकिल सवार को मार डाला। जसवंतगढ़ पुलिस ने इसका मामला दर्ज किया है। इस बारे में जगदीश प्रसाद जांगीड़ (39) पुत्र प्रेमाराम जांगीड़ निवासी रींगण ने पुलिस को रिपोर्ट देकर बताया कि एक मई को शाम पौने आठ बजे उसके ताऊ का लड़का अशोक कुमार जांगिड़ पुत्र मांगीलाल जांगिड़ निवासी रींगण अपनी मोटरसाईकिल आरजे 37 एसएक्स 7940 लेकर घर से मीठड़ी की तरफ जा रहा था। घर से 200 मीटर की दूरी पर सामने से पिकअप रीकवरी क्रेन आरजे 37 ईए 4003 के चालक ने अपनी पिकअप को तेज गति से चलाकर अशोक कुमार की मोटरसाईकिल को टक्कर मारी, जिससे अशोक कुमार को गम्भीर चोटें लगी।

आगे से आगे किया रैफर और अंत में घायल ने दम तोड़ा

वे अपने भाई अशोक कुमार को घायल अवस्था में मीठड़ी के हॉस्पीटल लेकर गये, जहां से डीडवाना रैफर किया गया। डीडवाना लेकर जाने पर वहां से फिर रेफर कर दिया गया। तब निकटतम हाई सेंटर सीकर लेकर गये। वहां प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रैफर कर दिया गया। जयपुर लेकर जाने पर वहां अस्पताल में देखभाल का अभाव मिला। इस पर मजबूर होकर वे प्राईवेट हॉस्पीटल एशियन होस्पिटल जयपुर ले गए। जहां पर इलाज के दौरान उसके भाई अशोक कुमार ने दम तोड़ दिया। फिर वे उसके शव को लेकर रात को वापिस श्री कल्याण हॉस्पीटल सीकर आये, जहां उसके भाई अशोक कुमार की डेड बॉडी मोर्चरी में रखी गई। इस रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 281 एवं 106 भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया है।

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Author: kalamkala

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