शुद्ध ज्ञान, शुद्ध दर्शन, शुद्ध चरित्र एवं त्याग-तपस्या से सींचा था आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ की नींव को- तपस्वी मुनिश्री जयकुमार,
लाडनूं में आचार्य भिक्षु के त्रिशताब्दी जन्मोत्सव पर 300 सामायिक का अभिनव आयोजन

लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ के संस्थापक आचार्य भिक्षु के त्रिशताब्दी जन्मोत्सव के ऐतिहासिक अवसर पर तेरापंथ की राजधानी लाडनूं में अषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी के दिन शासनश्री मुनि विजय कुमार एवं मुनिश्री जयकुमार के सान्निध्य में पहली पट्टी स्थित ऋषभ द्वार भवन में 300वें जन्मोत्सव को लक्ष्य कर अभिनव सामयिक का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तपस्वी मुनिश्री जयकुमार ने सभी को जप और ध्यान करवाया। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि आचार्य भिक्षु ने 300 वर्ष पूर्व कल्पवृक्ष के रूप में मरुधर की धरती पर जन्म लिया था। शुद्ध ज्ञान, शुद्ध दर्शन, शुद्ध चरित्र एवं त्याग-तपस्या से आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ की नींव को सींचा था। शासनश्री मुनि विजय कुमार ने कहा कि ऐसे महापुरुष शायद ही इस धरती पर होगा, जिसने अपनी विशेषताओं का आलोक धरती पर बिखेरा। आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ रूपी जो प्रकाश स्तंभ स्थापित किया है, वह युगों-युगों तक चलता रहेगा। उन्होंने ऋषभद्वार के भव्य नजारे को देख उसे बहुत अच्छा अनुभव बताया।
300 सामायिक का लक्ष्य किया पूर्ण
इस आयोजन में आचार्य महाश्रमण योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद एवं उनकी टीम, जैन विश्व भारती के पूर्व अध्यक्ष धर्मचंद लूंकड, राजकुमार चोरड़िया, तेरापंथ सभा के अध्यक्ष प्रकाश बैद एवं सभी सभा-संस्था के पदाधिकारी, कार्यसमिति सदस्य, अन्य सदस्य एवं श्रावक-श्राविका समाज द्वारा त्रिशताब्दी जन्मोत्सव पर पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा व आस्था के साथ उपस्थित होकर 300 सामायिक के विशेष लक्ष्य को सफल बनाने में योगदान प्रदान किया।विशेष रूप से तेरापंथी सभा के मंत्री राकेश कोचर एवं कोषाध्यक्ष महेंद्र बाफना ने अपना श्रम नियोजित कर 300 सामायिक के लक्ष्य को पूर्ण किया। कार्यक्रम में मुनि वृंद ने नवकार मंत्र द्वारा महोत्सव का शुभारम्भ किया। प्रारम्भ में महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण एवं मुनिश्री तन्मय कुमार ने गीतिका प्रस्तुत की गई।






