कौन है इस शहर का धणी-धोरी? नगर पालिका नाकाम बनी, कोस रही हैं खाली कुर्सियां, कामकाज सब ठप्प हैं, ईओ का पद फुटबॉल बना, कभी 3 दिनों में और कभी 7 दिनों में कर दिया जाता है ‘किक-आउट’, आखिर यह सब क्यों हो रहा है?

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कौन है इस शहर का धणी-धोरी?

नगर पालिका नाकाम बनी, कोस रही हैं खाली कुर्सियां, कामकाज सब ठप्प हैं,

ईओ का पद फुटबॉल बना, कभी 3 दिनों में और कभी 7 दिनों में कर दिया जाता है ‘किक-आउट’, आखिर यह सब क्यों हो रहा है?

लाडनूं (kalamkala.in)। नगर पालिका लाडनूं में पिछले लम्बे समय से चल रही अस्थिरता मिटने का नाम नहीं ले रही है। यहां राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते अधिकारियों के पदों पर आने वाले को वापस बोरिया-बिस्तर तैयार रखने होते हैं। यहां ईओ के पद पर सुरेन्द्र मीणा के बाद बहुत सारे आए और चंद दिनों बाद ही वे ‘गयाराम’ हो गए। अधिकारियों को कांग्रेस शासन से लेकर अब भाजपा शासन तक ‘फुटबॉल’ बना रखा है। चाहे जब किक मार कर दूर फेंक दो। यहां का रिकॉर्ड है कि सिर्फ 3 और 7 दिनों में अधिकारियों को ‘किक-आउट’ कर दिया गया।

यह स्थिति शर्मनाक है

लाडनूं नगर पालिका में संजय बारासा को ईओ बनाया गया। राज्य सरकार के ये आर्डर उनके कार्यग्रहण करने तक ही सीमित रहे। तीन दिनों में ही आर्डर बदल गए। यहां छापर नगर पालिका से कार्यवाहक के रूप में लगे भवानी शंकर व्यास को भी कुछ महिने बाद ही बदलते हुए डीडवाना नगर परिषद के आयुक्त भगवान सिंह को ईओ का कार्यभार भी संभला दिया गया। पहले तो उन्होंने ज्वाइन नहीं किया और जब आकर कामकाज संभाला तो मात्र सात ही दिनों में वापस बदल दिया गया और हटाए गए ईओ छापर से वापस ले आए गए। अब यहां ईओ के रूप में फिर से भवानी शंकर व्यास ने कार्यग्रहण कर लिया है। आखिर यह सब क्या हो रहा है? और क्यों हो रहा है। क्या लाडनूं में किसी भी अधिकारी को स्थाई रूप से रह कर काम नहीं करने दिया जाएगा? यहां के विकास और शहर के सुधार की बातें बहुत की जाती है, लेकिन जब यहां ईओ, जेईएन आदि ही नहीं होंगे तो क्या खाक विकास हो पाएगा?

जेईएन के बिना अटके पड़े सारे कामकाज 

गोरतलब है कि यहां जनवरी माह में जेईएन दीपक मीणा का स्थानांतरण कर दिया गया था। तब से यहां जेईएन नहीं होने से सारी प्रक्रियाएं ठप्प पड़ी हैं। पिछले दिनों डीडवाना नगर पालिका में पदस्थापित जेईएन को अतिरिक्त चार्ज लाडनूं नगर पालिका का भी सौंपा गया, उन्होंने यहां आकर चार्ज भी ले लिया, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटे। क्या पता किसी ने कहा दिया होगा कि फिर से बदले जाओगे? जेईएन के बिना मौके देखने, रिपोर्ट बनाने, विकास कार्यों के लिए एस्टीमेट बनाने, ठेकेदारों से काम करवाने, उनकी एमबी में एंट्री करने, भुगतान बनाने आदि बहुत सारे काम ठप्प हो जाते हैं। यह सब स्थिति एक सही आकलन है लाडनूं नगर पालिका का। समझ में नहीं आता आखिर यह सब कब तक चलेगा और ऐसा चलता रहा तो लाडनूं शहर की बदतर हालत को कैसी नहीं रोक सकता।

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Author: kalamkala

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