क्यों तार-तार हो रही है लाडनूं की चिकित्सा व्यवस्था? वाल्मीकि बस्ती की जनता क्लिनिक में लगे हैं लापरवाह मेडिकल स्टाफ, ताला बंद कर भाग जाते हैं समय से पहले, निराश होकर लौटने पर मजबूर हैं मरीज, पार्षद सुमन खींची ने मौका देखा और हालत से उच्च अधिकारियों को करवाया अवगत, मौजूदा स्टाफ को बदलने के लिए की शिकायत, प्रदर्शन की चेतावनी

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क्यों तार-तार हो रही है लाडनूं की चिकित्सा व्यवस्था?

वाल्मीकि बस्ती की जनता क्लिनिक में लगे हैं लापरवाह मेडिकल स्टाफ, ताला बंद कर भाग जाते हैं समय से पहले, निराश होकर लौटने पर मजबूर हैं मरीज,

पार्षद सुमन खींची ने मौका देखा और हालत से उच्च अधिकारियों को करवाया अवगत, मौजूदा स्टाफ को बदलने के लिए की शिकायत, प्रदर्शन की चेतावनी

लाडनूं (kalamkala.in)। चिकित्सा सुविधाओं को जन-जन के लिए सुलभ बनाने की सरकार की योजना की विभाग के कार्मिक गण ही धज्जियां उड़ाने में लगे हुए हैं। यहां वाल्मीकि बस्ती स्थित जनता क्लिनिक (सिटी डिस्पेंसरी) में इसी तरहकी लापरवाही जानबूझकर की जाने का मामला सामने आया है। पार्षद सुमन खींची ने बताया कि उनके क्षेत्र में स्थित यह जनता क्लिनिक, जो सुबह 9 से अपराह्न 3 बजे तक खुली रहनी चाहिए, परन्तु अपने निर्धारित समय में ही यह जनता क्लिनिक बंद मिली। पार्षद ने खुद जाकर देखा, तो वहां क्लिनिक में कोई भी डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था। इस प्रकार ड्यूटी के समय नदारद रहने की गैरजिम्मेदाराना हालत के कारण क्षेत्रवासियों को इलाज की सुविधा मुहैया होने के बजाय उन्हें भटकना पड़ता है। पार्षद सुमन खींची ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं है, जब डिस्पेंसरी समय से पहले बंद पाई गई हो। लगता है यह यहां की कार्मिकों का स्वभाव ही लापरवाही पूर्ण बन चुका है।

अधिकारी संज्ञान लें और क्लिनिक पर लगे कार्मिकों पर लगाम कसे

इस गंभीर लापरवाही की शिकायत पार्षद सुमन खींची ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से की है और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। खींची ने बताया कि आमजन को स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ करवाने के उद्देश्य से खोली गई इस डिस्पेंसरी का इस तरह से दुरुपयोग होता रहा, तो जनता का भरोसा ही टूट जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे उच्च अधिकारियों से मिलेंगे और फिर धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाएंगी।

क्लिनिक को ताले लगा कर भागने वालों पर कार्रवाई हो

समाजसेवी क्षेत्रवासी ताराचंद सांगेला ने बताया कि सुबह से बुजुर्ग मरीज डिस्पेंसरी के बाहर खड़े थे, लेकिन उन्हें बिना इलाज के लौटना पड़ा।अन्य स्थानीय लोगों ने भी बताया कि नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी अक्सर समय से पहले ही ताले लगाकर घर चले जाते हैं। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में क्या कार्रवाई करते हुए दोषी कार्मिकों को यहां से हटा कर दूसरा स्टाफ लगाना चाहिए।

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Author: kalamkala

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