क्या गुल खिला रहे हैं आर्य समाज लाडनूं के पदाधिकारी,
हर जगह फर्जीवाड़ा, कूटरचना, धोखाधड़ी, कार्यकारिणी सदस्यों व चुनाव अधिकारी तक को नहीं बख्शा, संस्था तक बदल डाली





लाडनूं (kalamkala.in)। लाडनूं की आर्य समाज लम्बे समय से विवादों में चल रही है और ऐसा लगता है कि पूरी तरह से फर्जीवाड़े के जाल में इस संस्था को फंसा दिया गया है। हाल ही में सरकार के साथ धोखा करने का मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी व कूटरचित हस्ताक्षर बनाने और दूसरे कागजों से हस्ताक्षरों की प्रति उठा कर उनका प्रयोग कूटरचना पूर्वक वास्तविक के रूप में करके उपयोग करके सरकार को धोखे में रखा गया। इसके साथ ही दूसरी संस्था के चुनावों को अन्य संस्था के चुनाव बताए जाकर लाखों रुपयों की हेराफेरी करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं
चुनाव अधिकारी का आरोप, बहुत फर्जीवाड़ा हुआ इस संस्था में
आर्य उप प्रतिनिधि सभा नागौर के मंत्री मोहन राम आर्य दिलोया ने हाल ही में काफी गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें आर्य समाज में गहरी हेराफेरी करने और उनके हस्ताक्षर तक फर्जी बना कर अनुचित दस्तावेजों को सरकारी प्रोसेस में चलाने का आरोप शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आर्य समाज लाडनूं के चुनाव उन्होंने गत वर्ष 21 जुलाई को करवाए थे। 3 जुलाई 2024 को उन्हें एक पत्र देकर प्रधान ओम मुनि आर्य और मंत्री प्रेमप्रकाश आर्य ने सूचित किया कि उन्हें प्रबंधकारिणी समिति की 30 जून 2024 की बैठक में चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है और उन्हें 21 जुलाई 2024 को आर्य समाज लाडनूं के चुनाव सम्पन्न करवाने हैं। इसके बाद उन्होंने निर्धारित तिथि, समय और स्थान पर आर्य समाज के चुनाव करवाए थे। इसके बाद किए गए फर्जीवाड़े में उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाए जाकर नागौर के सोसायटी रजिस्ट्रार के यहां नकली कूटरचित कागजात तैयार किए जाकर ‘आर्य समाज संस्थान, लाडनूं’ के नाम से फर्जी तरीके से साजिश रच कर कार्यकारिणी को अप्रूव्ड करवाया। इसके बाद वे आर्य समाज के रुपयों का खुलेआम दुरुपयोग कर रहे हैं।
चुनाव अधिकारी के बनाए फर्जी हस्ताक्षर, अन्य लोगों के हस्ताक्षरों के कट-पेस्ट किए
निर्वाचन अधिकारी एवं आर्य उप प्रतिनिधि सभा नागौर के मंत्री मोहनराम दिलोया आर्य ने बताया कि उन्होंने आर्य समाज लाडनूं के चुनाव करवाए थे, न कि आर्य समाज संस्थान के। इस प्रकार चुने गए पदाधिकारियों द्वारा आर्य समाज को दूसरी संस्था में बदल देने की कवायद सरासर फर्जी, कूटरचित और षड्यंत्र बना कर की गई है। इससे उनकी स्वयं की और आर्य समाज लाडनूं की मानहानि हुई है। इस प्रकार फर्जीवाड़ा और सोसायटी रजिस्ट्रार नागौर के साथ धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का होना आवश्यक है।
प्रतियां बोलती हैं फर्जीवाड़े की पूरी कहानी
दिलोया ने ऐसे पत्रों की फोटो प्रतियां भी प्रस्तुत की है, जिनमें उनके असली व वास्तविक हस्ताक्षर हैं और अन्य पत्र, जो नागौर प्रस्तुत किया गया, उसमें फर्जी हस्ताक्षर हैं। इसी प्रकार 12 हस्ताक्षर, जो आर्य समाज के रजिस्टर से कट-पेस्ट-कॉपी करके हूबहू दूसरे कागजात पर फर्जी तरीके से इस्तेमाल करके उन कूटरचित कागजातों का उपयोग रजिस्ट्रार कार्यालय में किया गया। इस प्रकार इन पदाधिकारियों का सारा का सारा कार्य फर्जीवाड़ा व धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। ऐसे लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा जाना नितांत आवश्यक है।







