जिले के समुचित विस्तार, सर्वांगीण विकास और जन सुविधाओं का ध्यान रखकर किया गया भूमि आवंटन,
विभिन्न विकास कार्यों के संबंध में जिला कलेक्टर की प्रेस वार्ता
डीडवाना (kalamkala.in)। जिला कलेक्टर डॉ. महेन्द्र खड़गावत ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक प्रेसवार्ता आयोजित करके जिले के विभिन्न विकास कार्यों के संबंध में त्रकारों को अवगत करवाया। जिला कलेक्टर डॉ. खडगावत ने बताया कि सरकारी कार्यालयों के लिए भूमि आवंटन किया जा चुका है और शीघ्र ही उनके भवनों का निर्माण कार्य भी शुरू होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में पुलिस लाइन के लिए और पुलिस लाइन की शूटिंग रेंज के लिए और कई थानों को भी जमीनें आवंटित किए जाने का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इस बार जमीन आवंटन के साथ-साथ ही उनके रजिस्ट्रेशन का कार्य भी तुरंत करवा रहे हैं, ताकि किसी को ज्यादा इधर-उधर नहीं जाना पड़े और समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने बताया कि कम से कम 8 से 10 डिपार्टमेंट ऐसे हैं, जिनके पास बजट है और आने वाले महीने-दो महीने में उनके कार्यालय बनने का काम प्रारंभ हो जाएगा।
ग़लत तरीके से कोई आवंटन नहीं
जिला कलेक्टर ने बताया कि भूमि आवंटन इस प्रकार से किया गया है कि जिले का चहुंमुखी विकास संभव हो। डीडवाना की चारों दिशाओं में जमीनों का आवंटन किया गया है और इस चीज़ का पूरा ध्यान रखा है कि कोई गलत तरीके से इस आवंटन का लाभ ना ले। किसी को वास्तविक लाभ या नेचुरल बेनिफिट मिल रहा है तो मिले।
900 से अधिक स्कूलों को मिले पट्टे
हम लोग 900 से ज्यादा स्कूलों को पट्टे जारी कर चुके हैं और लगभग 1300 कुछ स्कूलें ही अपने जिले में हैं। कुछ स्कूलों के लिए खेल मैदान के लिए भी जमीन हम दे चुके हैं और दे भी रहे हैं। कुछ नई स्कूलें बननी हैं, उनके लिए भी हम भूमि दे रहे हैं। हमारा उद्देश्य यही है कि स्कूलों के आज से 50-50 साल से 60-60 साल पुरानी स्कूलें हैं, उनके पास पट्टे नहीं हैं और पट्टे नहीं होने के कारण वह राज्य सरकार और केंद्र सरकार की कई योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। कई जगह पर ऐसा आया है कि लैंड उनके नाम से है ही नहीं या कहीं पर कब्जा हो गया है, तो इन सब चीजों को दरकिनार करके इसका स्वामित्व उन स्कूलों को दिया गया है, ताकि अधिकारपूर्ण तरीके से वह किसी भी सरकारी योजना का लाभ ले सके।
समस्त कस्टोडियन भूमि सिवाय चक के रूप में है और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है
वर्तमान धरना प्रदर्शनों के संबंध में यह जानकारी महत्वपूर्ण है कि राज्य सरकार के आदेश से वर्ष 2009 में जिले की समस्त कस्टोडियन भूमि को सिवाय चक घोषित किया जा चुका है। इसके आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। इसके बाद, वर्ष 2011 में राज्य सरकार के ही आदेश से, इस सारी कस्टोडियन भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया। अब यह भूमि पूरी तरह से राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है और रिकॉर्ड में यह नोट भी स्पष्ट रूप से लगा दिया गया है कि इन भूमियों के संबंध में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार राजस्व विभाग को ही होगा। आज की तारीख तक किसी भी व्यक्ति ने दस्तावेज़ों के साथ यह दावा पेश नहीं किया है कि यह कस्टोडियन भूमि उनकी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह कस्टोडियन भूमि किसी एक समाज या समुदाय की नहीं है, बल्कि विभिन्न समाजों के लोगों से संबंधित है।







