जो अपने हाथों से अधिक सीखता है, प्राकृतिक चिकित्सा में वही श्रेष्ठ विशेषज्ञ बनता है- डाॅ. शर्मा, जैविभा विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. दूगड़ के साथ अ.भा. प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की प्राकृति चिकित्सा पर चर्चा, छात्रों को दिया मार्गदर्शन

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जो अपने हाथों से अधिक सीखता है, प्राकृतिक चिकित्सा में वही श्रेष्ठ विशेषज्ञ बनता है- डाॅ. शर्मा,

जैविभा विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. दूगड़ के साथ अ.भा. प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने की प्राकृति चिकित्सा पर चर्चा, छात्रों को दिया मार्गदर्शन

लाडनूं (kalamkala.in)। अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राजस्थान सरकार के योग प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड के पूर्व सलाहकार डॉ. शिवकुमार शर्मा ने जैन विश्व भारती डीम्ड यूनिवर्सिटी में संचालित बी.एन.वाई.एस. मेडिकल डिग्री कॉलेज के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य प्राकृतिक चिकित्सा का है। आज विश्व पुनः ‘रिटर्न टू नेचर’ की अवधारणा की ओर बढ़ रहा है, जिसे महात्मा गांधी ने वर्षों पूर्व अपनाया था। आधुनिक विकसित देश भी प्राकृतिक चिकित्सा की प्रभावशीलता को समझते हुए इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे विदेशों में भी इस चिकित्सा पद्धति की मांग तेजी से बढ़ रही है। डॉ. शर्मा ने विद्यार्थियों को सुझाव देते हुए कहा कि नेचुरोपैथी में कौशल, अनुशासन और प्रैक्टिकल ज्ञान अत्यंत आवश्यक हैए जिसने अपने हाथों से अधिक सीखा, वही इस चिकित्सा में श्रेष्ठ विशेषज्ञ बनता है। हुनरमंद और समर्पित व्यक्ति ही चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़कर सफल होते हैं। इस अवसर पर डॉ. शिवकुमार शर्मा ने कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने जिन ऊंचाइयों को प्राप्त किया है, वह प्रेरणादायी है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में यह संस्थान प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाएगा।

प्राकृतिक चिकित्सा के विकास की दिशा और चुनौतियों पर चर्चा 

इससे पूर्व उन्होंने कुलपति कार्यालय में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने कुलपति प्रो. दूगड़ के साथ आधुनिक समय में प्राकृतिक चिकित्सा की बढ़ती उपयोगिता, इसके विकास की दिशा, तथा समसामयिक चुनौतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। कुलपति ने उन्हें बताया कि विश्वविद्यालय में आचार्यश्री महाप्रज्ञ योग एंड नेचुरोपैथी मेडिकल कॉलेज की स्थापना इसी वर्ष की गई। उन्होंने उन्हें यहां के नेचुरोपैथी मेडिकल काॅलेज के शैक्षणिक ढांचे, शिक्षकों, प्रशिक्षण प्रणाली और भावी योजनाओं के बारे में अवगत करवाया तथा सभी सम्बंधित पहलुओं पर सार्थक चर्चा की। दोनों विद्वानों ने जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय ओर उससे जुड़े हुए नेचुरोपैथी अस्पताल की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए अनेक सुझाव भी प्रस्तुत किए

नेचुरोपैथी होस्पीटल का किया अवलोकन

इससे पहले अ. भा. प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. शर्मा ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित मेडिकल महाविद्यालय एवं चिकित्सालय का विस्तृत अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान कॉलेज के नेचुरोपैथी विभागीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. विजय शर्मा ने उन्हें सभी विभागों, आउटडोर व इंडोर सेवाओं, उपचार तकनीकों तथा उपलब्ध संसाधनों की जानकारी दी। उत्तर भारत के आधुनिकतम नेचुरोपैथी चिकित्सालयों में शामिल इस केंद्र की सुव्यवस्थित व्यवस्था, सुंदर कक्ष, आधुनिक उपकरणों तथा शांत, प्रदूषण-रहित वातावरण की उन्होंने विशेष प्रशंसा की। हरियाली से घिरे परिसर में पक्षियों की चहचहाहट और आध्यात्मिक शांति का वातावरण रोगियों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ में सहायक माना गया।
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Author: kalamkala

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