आर्य समाज के नियम सार्वकालिक और मनुष्य मात्र के लिए कल्याणकारी हैं- गजेन्द्र परिहार, लाडनूं के आर्य समाज में चल रहे सतत् यज्ञ-सत्संग में हुए प्रवचन

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आर्य समाज के नियम सार्वकालिक और मनुष्य मात्र के लिए कल्याणकारी हैं- गजेन्द्र परिहार,

लाडनूं के आर्य समाज में चल रहे सतत् यज्ञ-सत्संग में हुए प्रवचन

लाडनूं (kalamkala.in)। आर्य उप प्रतिनिधि सभा के प्रधान गजेन्द्र परिहार ने कहा है कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के लिए सर्वमान्य 10 वैश्विक नियमों का निर्धारण किया था। ये नियम सार्वकालिक हैं और किसी भी देश, काल और स्थिति से बंधे हुए नहीं हैं। ये दस नियम मनुष्य मात्र के लिए कल्याणकारी हैं। सभी आर्यजनों को इनका नियमित अध्ययन करना चाहिए और मनन-चिंतन करना चाहिए। व्यक्ति इन नियमों को धीरे-धीरे अपने जीवन में उतार ले, तो उसका ही नहीं, उसके परिवार और सम्पर्क के सभी लोगों का कल्याण संभव है। वे यहां आर्य समाज लाडनूं में आयोजित सतत् यज्ञ-सत्संग में उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने यज्ञ और संध्योपासना को सबसे श्रेष्ठ उपासना पद्धति बताया और उसके लाभ भी बताए तथा आर्य समाज लाडनूं द्वारा चलाए जा रहे सतत् यज्ञ की सराहना की।

मतभेद भुला कर सब एकजुट हों 

इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान जगदीश यायावर ने आर्य समाज की सांगठनिक मजबूती की जरूरत बताई और कहा कि जो लोग किसी भी कारणवश असंतुष्ट हैं, उन सबको आपस में मिल बैठ कर अपना असंतोष दूर करना चाहिए। उन्होंने आह्लान किया कि महर्षि दयानंद की मुहिम व मिशन को आगे बढाने में सबको सहयोग करना चाहिए तथा एक होकर आगे बढते हुए ‘कृण्वंतो विश्वमार्यम्’ को सार्थक बनाना चाहिए। कार्यक्रम में यज्ञ-पुरोहित महीपाल शास्त्री ने यज्ञ की प्रक्रिया सम्पन्न करवाई। यज्ञ में यजमान के रूप में डा. राजेन्द्र सिंह आर्य व तारा आर्य बैठे। इस अवसर पर सीताराम तांडी, सुरेन्द्र प्रताप आर्य, सुमित्रा आर्य, मेघाराम आर्य, भंवरदास, मुनि ओमदास, सुबोधचंद आर्य, अनोपचंद सांखला, दयानंद आर्य, निर्मल आर्य आदि उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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