यज्ञ के लिए गाय का शुद्ध घी जरूरी, बाजारू मिलावटी घी से लाभ नहीं नुकसान होता है- मुनिश्री ओमदास वानप्रस्थी,
आर्य समाज मंदिर लाडनूं में विशेष यज्ञ का आयोजन

लाडनूं (kalamkala.in)। यहां आर्य समाज मंदिर में आयोजित विशेष यज्ञ में मुनिश्री ओमदास वानप्रस्थी ने ब्रह्मा के रूप में यज्ञ में वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुतियां दिलवाई। यज्ञ में यजमान के रूप में पार्षद सुमित्रा आर्य ने पवित्र व औषधीय हवन-सामग्री से आहुतियां दीं। इस अवसर पर मुनिश्री ओमदास ने यज्ञ की महिमा बताते हुए समस्त प्रकार की शुद्धि की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि गाय के शुद्ध घी से यज्ञ करने पर जो लाभ मिलता है, वह बाजारू देसी घी से नहीं मिल सकता। आजकल देशी घी के नाम पर अनेक तरह की मिलावट होती है, जो मनुष्य के लिए और पूरे पर्यावरण के लिए नुकसानदायक होती है, जबकि हवन करने का हमारा उद्देश्य स्वास्थ्य संवर्धन, आत्मिक शक्ति प्राप्ति और पर्यावरण संरक्षण होता है। उन्होंने हवन में आहुतियों के लिए प्रयुक्त सामग्री के भी ऋतु अनुकूल और शुद्ध द्रव्यों से युक्त होने की जरूरत बताई तथा कहा कि ऐसी चयनित द्रव्य हवन-सामग्री में शामिल होने से वे मन, शरीर और वातावरण के लिए अधिक प्रभावी बन जाते हैं। उन्होंने बताया कि हवन में होमे जाने वाले घी और दी जाने वाली सभी आहुतियां सूक्ष्म रूप से पूरे वातावरण में फैल जाती है और हमारे मन-मस्तिष्क के साथ जीव मात्र और पूरे पर्यावरण को प्रभावित करती है। यजमान के रूप में यज्ञ में शामिल पार्षद सुमित्रा आर्य ने यज्ञ को सर्वश्रेष्ठ और सर्वोपयोगी उपासना पद्धति बताया और कहा कि यह मानव मात्र के लिए हितकारी होती है। इस अवसर पर भंवरदास ने भजनों और आरती की प्रस्तुति दी। सामुहिक शांति पाठ के साथ कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। यज्ञ से पूर्व सबने मिलकर कर सामुहिक श्रमदान किया और आंधी-बरसात से गंदे हुए सम्पूर्ण परिसर को स्वच्छ किया।






