एक साल से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं हीरावती के लोग, प्रशासन-प्रतिनिधि जानबूझकर बने हुए अनजान,
छह माह से लालफीताशाही का शिकार है स्वीकृत उच्च जलाशय, आंदोलन को तैयार ग्रामीण



लाडनूं। तहसील के ग्राम हीरावती में पिछले एक साल से ग्रामवासी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। इस बारे में वे जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता आदि के समक्ष गुहार लगाने के अलावा उपखंड अधिकारी को भी ज्ञापन देकर समस्या के समाधान की मांग कर चुके, लेकिन अब तक कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हुई है। ग्रामवासियों का कहना है कि इस गांव के लिए गत 6 माह से उच्च जलाशय स्वीकृत है, लेकिन विभागीय ढील के चलते आज तक यहां इस कार्य को शुरू तक नहीं करवाया जा सका है। ग्रामीण इस उच्च जलाशय का निर्माण कार्य शुरू करवा कर पेयजल समस्या के हल की मांग कर रहे हैं। उन्होंने इस मांग और समस्या के बारे में प्रशासन के साथ साथ जनप्रतिनधियों को भी अवगत करा दिया, परन्तु कहीं कोई असर नहीं हो पाया है। इस समस्या को कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है, बल्कि इसे सामान्य मानकर दरकिनार किया जा रहा है। निकटवर्ती ग्राम ओड़ींट के जलाशय से पूरे हीरावती गांव को पानी की आपूर्ति की वर्तमान व्यवस्था चरमरा चुकी है। ओड़ींट से हीरावती तक पाइपलाइन है, परन्तु वह सूखी ही पड़ी रहती है। गांव में बने पानी के हौद और पशुओं की खेलियां सब सूखी पड़ी है। ओड़ींट से हीरावती के लिए पानी छोड़ा ही नहीं जा रहा है। अगर हीरावती के लिए फिर ओड़ींट में ही जलाशय बनाया गया तो इस हालात में कोई बदलाव नहीं आने वाला है, गांव तक पानी नहीं पहुंच पाएगा। गांव वाले संदेह जता रहे हैं कि हीरावती गांव के मध्य में दो गांवों के लिए मंजूर इस उच्च जलाशय को कहीं, किसी कम आबादी वाले अन्य गांव में निर्मित न करवा दिया जाए। इस संदेह के चलते ग्रामीणों में पानी की समस्या को लेकर रोष है। ग्रामीण चाहते हैं कि उनका जलाशय राजनीति का शिकार नहीं हो पाए और गांव कज मध्य में स्वीकृत जगह पर ही जलाशय का निर्माण करवाया जावे, अन्यथा ग्रामवासी बड़े आंदोलन पर उतर सकते हैं।







