‘कांप रही थरथर धरती माँ, उसकी पीड़ा पहचानों’
लाडनूं में आयोजित काव्य गोष्ठी में श्रोता हुए मंत्रमुग्ध

लाडनूं। यहां नीलकण्ठ महादेव मंदिर के पास स्थित बोकड़िया निवास में समाजसेवी उम्मेदसिंह बोकड़िया के सौजन्य से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जैन विश्वभारती संस्थान के नवनियुक्त अध्यक्ष अमरचंद लूंकड़ ने काव्यगोष्ठी की अध्यक्षता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोलकात्ता प्रवासी समाजसेवी प्रदीप कुण्डलिया, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुशीला बाफना थे। प्रारम्भ में युवक परिषद के मंत्री राज कुमार चौरड़िया ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
सोए समाज को जगा कर दिशा देता है कवि
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रदीप कुण्डलिया ने कहा कि सोए हुए समाज को जगाने व समाज को नई दशा व दिशा देने का काम साहित्यकार व कवि ही करते हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. सुशीला बाफना ने कहा कि कवि व साहित्यकार अपनी कलम से इंसान के मन के विचारों व सोच को उकेरने का काम करते है।
खुशामद कर हमें बुलंदी पर टिकना नहीं आया
काव्य गोष्ठी में लाडनूं के विख्यात कवि राजेश विद्रोही ने वर्तमान शिक्षा नीति में सुधारने की हिदायत देते हुए अपनी कविता ‘समतामूलक शिक्षा का परचम फहराना बाकी है’ पेश करके खूब वाहवाही लूटी। युवा शायर प्रकाश जांगीड़ की ग़ज़लों को भी श्रोताओं ने खूब सराहा। जांगिड़ ने ‘खुशामद कर हमें बुलंदी पर टिकना नहीं आया’ और ‘दुनिया भर को हैरानी में ला पटका’ पर श्रोताओं ने जमकर दाद दी। गजलकार यासीन खान ‘अख्तर’ ने ‘बन के वो सपना जागे, वो मेरी आंखों में हरदम, खाना-ए- दिल के दरिंचों में वो झांके हरदम’ पेश की। पार्षद रेणु कोचर ने अपनी कविता ‘कांप रही थरथर धरती माँ, उसकी पीड़ा पहचानों’ सुनाई। गीतकार लक्ष्मीपत बैंगानी ने ”मत देवो मां-बाप को धोखा, मत लजाओ दूध, फिक्र नहीं मुझे ब्याज की मत खाओ मेरा मूल’ तथा पंडित परमानन्द शर्मा ने ‘अणुव्रत दुनियां को बहुत भाया रे’ सुनाई। पूरे काव्य प्रस्तुति के समय श्रोतागण मंत्रमुग्ध से बंधे रहे। जैन विश्व भारती के मंत्री सलिल लोढ़ा ने अपनी कविता ‘तेरी तारीफ में मैं क्या लिखूं अल्फाज’ सुनाई।
कार्यकम में प्रदीप कुंडलिया, अभय भादानी, सोनम पाटनी, दामोदर शास्त्री, रामकुमार तिवाड़ी, रामसिंह रेगर आदि ने अपनी रचनाएं पेश की। अंत में आयोजक उम्मेदसिंह बोकड़िया ने आभार ज्ञापन किया।
इस मौके पर रणजीत बोकड़िया, युवक परिषद के उपाध्यक्ष जौहरी मल दूगड़, मन्नालाल बैद, अब्दुल हमीद मोयल, राज पाटनी, अरविंद नाहर, सुशील पीपलवा, अरविंद प्रजापत, सुशीला बोकड़िया, नीरू कोचर, डॉ. माणक कोठारी, किरण बरमेचा, कमला कठोतिया, श्यामसुंदर शर्मा आदि प्रमुख लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संयोजन आलोक खटेड ने किया।







