एक जुझारू शख्सियत-
राजनीति, व्यापार, समाजसेवा, खेल और परोपकार में अग्रणी युवा- आवेश राव सुजानगढ़

सुजानगढ़ (kalamkala.in)। युवावस्था हो और संघर्ष नहीं हो, तो कहते हैं कि वो बेकार होती है। यह उम्र कुछ कर गुजरने की होती है। विकास की भावना, नई ऊंचाइयों को छूने की उमंग और हर बाधा को पार करने का जज्बा इस युवावस्था में ही होता है। आज एक ऐसे ही युवा शख्स से आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिनमें व्यापार, राजनीति, खेल, समाजसेवा और परोपकार की भावनाएं कूट-कूट कर भरी है। यह शख्सियत है, निकटवर्ती सुजानगढ़ शहर के जाने-माने व्यक्तित्व आवेश राव।
राजनीति, समाजसेवा, खेल और व्यापार सबकी साधना एक साथ
आवेश राव कपड़े के व्यापारी हैं और साथ ही राजनीति में भी दखल रखते हैं। ये कांग्रेस के खेल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष का पदभार भी संभाल चुके, जो राजनीति के साथ इनकी खेल के प्रति रुचि को जाहिर करता है। अनेक क्रिकेट टूर्नामेंट भी इन्होंने करवाए हैं। राज्य सरकार में केबिनेट मंत्री रहे मास्टर भंवरलाल से इनके मधुर सम्बन्ध थे और अब उनके पुत्र विधायक मनोज मेघवाल से भी प्रगाढ़ सम्बन्ध हैं। इतना ही नहीं लाडनूं विधायक मुकेश भाकर से भी इनका अच्छा रिश्ता बना हुआ है। इनकी पत्नी शबनम लगातार दूसरी बार नगर परिषद् सुजानगढ़ से पार्षद चुनी हुई हैं। आवेश राव के व्यापक जनसम्पर्क, सुमधुर व्यवहार और समाजसेवा व वार्ड के विकास की प्रबल भावनाओं के कारण ही शबनम की दोनों बार बहुत ही अच्छे मतों के अंतर से भारी जीत संभव हुई।
सामाजिक गतिविधियों में समर्पित भाव से अथक सेवा
कम उम्र में ही विविध व बहुआयामी गतिविधियों का संचालन करना आवेश राव की विशेषता रही है। अपने समाज की लगभग हर गतिविधि में पूरे जोशो-खरोश के साथ शामिल होकर अपने समाज के समक्ष अपनी प्रतिभा को आवेश राव ने साबित किया है। अपने समाज की संस्था मुस्लिम छींपा वेलफेयर सोसायटी से वे सदैव जुड़े रहे हैं और बतौर सह सचिव के लगातार साढ़े पांच साल तक कार्य करके अपनी क्षमता का बेहतर प्रदर्शन भी किया। सामाजिक स्तर पर आयोजित दो सामुहिक विवाह समारोहों में इन्होंने अपनी खासी भूमिका का निर्वहन किया। रक्तदान शिविर लगाकर सेवाएं देने में भी ये अग्रणी रहे हैं। यही नहीं गणेश चतुर्थी पर्व पर निकलने वाली शोभायात्रा के स्वागत के लिए भी आवेश राव आगीवाण रह कर साम्प्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश करते आए हैं। शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा और फूल-मालाएं अर्पित करने के लिए ये तत्पर रहते हैं। कोरोना काल के दौरान इन्होंने लोगों को डोर टू डोर जाकर राशन वितरण करने, दवा वितरण करने आदि समाज सेवा के काम को बिना किसी भेदभाव के पूर्ण सेवाभाव से करके अपनी ऊर्जा का सदुपयोग किया और समाज की नि:स्वार्थ सेवा की।
पग-पग पर आते हैं संघर्ष और बाधाएं, पर सांच को आंच नहीं
यह तो तय है कि राजनीति, समाज सेवा आदि में सफलतापूर्वक आगे आने वाले हर व्यक्ति की टांग खिंचाई करने, बाधाएं पैदा करने और किसी भी प्रकार अपयश प्रदान करने के लिए कुटिल लोग लालायित रहते हैं। तरह-तरह के षड्यंत्रों के जाल भी बिछाते हैं और ऐसा करके ऐसे लोग खुशी महसूस करते हैं। हाल ही में सुजानगढ़ के आरके गार्डन में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर ऐसा ही माहौल बनाने की कुचेष्टाएं कुछ लोगों ने की, लेकिन ‘सांच को आंच नहीं’ होती। इस मामले में खोदा पहाड़ और निकली चुहिया वाली बात हुई। मामले का कहीं अस्तित्व ही नहीं रहा। सबकुछ साफ हो गया। हुआ यूं था कि आवेश राव उस दिन जिम से लौटे तो बारिश हो रही थी। वहां से आवेश राव आरके गार्डन ‘पनीर टिक्का’ खाने चले गए। गार्डन में वहां कुछ हमपेशा व्यापारी और पहचान वाले मिल गए। उनसे बातचीत के दौरान ही वहां पुलिस कार्रवाई हो गई। लेकिन ‘जाको राखे साइयां बाल न बांका होय’ कहावत सत्य ही है। सबकुछ होकर भी सारी कार्रवाई में से वे साफ-सुथरे निकल पाने में सफल रहे। जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है और बिना बाधाओं के तो किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती, इसलिए ऐसी बाधाएं भी अच्छी हैं।







