सरकार के ‘सम्पर्क पोर्टल’ का औचित्य समाप्त करने पर तुले हैं विभागीय अधिकारी, लोगों में पनप रहा है गहरा असंतोष,
ये न शिकायत पढ़ते हैं और न कोई काम उस पर करते-करवाते हैं, फिर भी लिख देते हैं कि ‘फलां समस्या का निस्तारण कर दिया गया है’
लाडनूं के सुरेश खींची ने की जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभियंता को निलम्बित करने की मांग
लाडनूं (kalamkala.,in)। राज्य सरकार द्वारा जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए बनाए गए राजस्थान सम्पर्क का नारा है- ‘हर नागरिक की आवाज़ का सम्मान, हर परिवाद का समय पर निदान’। लेकिन वास्तविकता इस नारे के बिल्कुल विपरीत है। सम्पर्क पोर्टल पर दर्ज लोगों की शिकायतों को सम्बंधित विभाग और अधिकारी को भिजवाया जाता है। लेकिन ये अधिकारी उस पर कोई कार्रवाई नहीं करते और अपने कर्मचारी को कह देते हैं कि वापस लिख कर भेज दो कि समस्या का निस्तारण कर दिया गया है। हकीकत में उस विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर आकर समस्या से रूबरू तक नहीं होता। विभाग की निस्तारण रिपोर्ट के आधार पर सम्पर्क पोर्टल या तो उस शिकायत को बंद कर देते हैं या सम्बंधित शिकायत कर्ता से सम्पर्क कर उसे असंतोष दर्ज कर विभाग को वापस भिजवाते हैं। परन्तु उस असंतोष का भी कोई मतलब नहीं, क्योंकि हर बार रटी-रटाई भाषा ‘निस्तारण कर दिया गया है।’ वही रिप्लाई आता है और शिकायत बंद। इस प्रकार से सरकारी विभाग, अधिकारी और कर्मचारी मिल कर ऐसा षड्यंत्र चला रहे हैं कि सरकार की आम जनता में इस पोर्टल को लेकर अच्छी-खासी किरकिरी हो रही है। सरकार की छवि गिराने में इस सम्पर्क पोर्टल की सबसे अहम् भूमिका है। इसके बजाय तो पोर्टल को पूरा ही बंद कर देना चाहिए, ताकि जनता को थमाया गया यह झूठा झुनझुना समाप्त हो जाए।
शिकायत को देखा-पढा भी नहीं और जवाब दे दिया निस्तारित करने का
हाल ही में एक शिकायत इस पोर्टल पर दर्ज किए गए परिवाद पंजीकरण संख्या: 072606527903121, जो परिवाद कर्ता सुरेश खींची (प्रभारी, भाजपा आईटी सेल) की शिकायत है। यह शिकायत 21 जुलाई को दर्ज की गई थी, जो जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से सम्बंधित थी। यह शिकायत योजना से पेयजल प्राप्त नहीं होने का समाधान करने से सम्बंधित थी, जिसमें बताया गया कि उनके यहां विभाग से आए लोगों ने पाइपलाइन की मरम्मत के लिए सड़क पर गड्ढे खोदे थे, परंतु इनको वापिस नहीं भरा गया है। इससे आने-जाने वाले लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए इस सड़क को पहले जैसी सड़क ही वापस बनाया जाए तथा जल्द से जल्द कार्यवाही कर समस्या का समाधान करवाया जाए। इस शिकायत पर की गई कार्यवाही में बताया गया है कि ‘शिकायत से सबंधित स्थान पर लीकेज की मरम्मत हेतु संवेदक को जॉब आर्डर के माध्यम से निर्देशित कर दिया गया है उक्त कार्य प्रगति पर है तथा यथाशीघ्र ही लीकेज निकलवा दिया जायेगा।’ विभाग के इस जवाब को आधार मानकर सम्पर्क पोर्टल ने परिवाद के परिणाम और निस्तारण की स्थिति यह बताई है कि, ‘परिवाद के प्रभावी निस्तारण हेतु मेरे द्वारा उपरोक्त कार्यवाही की गई है तथा मेरी जानकारी एवं विश्वास के अनुसार यह सत्य एवं सही है।’ यह अधिशाषी अभियंता गिरीराज चौधरी ने सम्पर्क पोर्टल को भेजा है और बताया है कि 2 अगस्त को निस्तारित कर दिया गया है। जबकि वास्तविकता यह है कि वह लीकेज और गड्ढा जस के तस पड़े हैं, किसी ठेकेदार ने वहां आकर झांका तक नहीं। आखिर यह कैसा और क्यों जवाब है। समस्या को बिना छुए ही निस्तारित बता दिया गया।
जवाब देने वाले अधिकारी को निलम्बित किया जावे
इस स्थिति को लेकर भाजपा आईटी सेल प्रभारी सुरेश खींची ने उपखण्ड अधिकारी को एक पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने राजस्थान सम्पर्क पर पाईप लाईन खोदने के दौरान बनाए गए गड्ढ़े को वापिस सही करवाने व वहां क्षतिग्रस्त स्थान पर फिर से सड़क का निर्माण करवाने के लिए शिकायत दर्ज करवाई थी। इस पर पीएचईडी विभाग द्वारा इस शिकायत को बिना पढ़े ही इसका निस्तारण कर दिया गया, बताया है, शिकायत के जवाब में लिखा गया है यथाशीघ्र ही लिकेज निकाल दिया जायेगा। जबकि लिकेज से सबंधित उसकी कोई शिकायत थी ही नहीं। सुरेश खींची ने ऐसे अधिकारियों को तुरन्त प्रभाव से निलम्बित करवाने की मांग की है। साथ ही बताया है कि मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं और भाजपा सरकार को को ये अधिकारी फैल करने में लगे हुये हैं। इसलिए इन पर तुरन्त कार्यवाही की जानी आवश्यक है।







