हौसले की उड़ान- दिव्यांगता को मात देकर राष्ट्रीय स्तर पर हासिल की जीत और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन की है ख्वाहिश,
लाडनूं के संजय सांखला ने दोनों हाथों और एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद ’25वीं नेशनल पैरा तैराकी’ में जीते दो स्वर्ण सहित तीन पदक
लाडनूं (kalamkala.in)। लाडनूं शहर के दिव्यांग तैराक संजय सांखला (पुत्र मनोज कुमार सांखला) ने हाल ही में आयोजित 25वीं राष्ट्रीय पैरातैराकी प्रतियोगिता- 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीत कर पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।दोनों हाथों और एक पैर की दिव्यांगता के बावजूद संजय के हौसले ने यह साबित कर दिया कि शारीरिक बाधाएं दृढ़ संकल्प के आगे मायने नहीं रखतीं। संजय सांखला ने इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में आयोजित स्पर्धाओं में 100 मी. ब्रेस्टस्ट्रोक में स्वर्ण पदक, 100 मी. बटरफ्लाई स्पर्धा में स्वर्ण पदक और 50 मी. बटरफ्लाई में रजत पदक अर्जित किया है।
करंट में गंवाए दो हाथ व पैर, पर पैरा तैराक प्रशिक्षण से बदली जिंदगी
कुशल दिव्यांग तैराक संजय सांखला का जीवन साधारण तौर पर गुजर रहा था, लेकिन सन् 2018 में तब एकदम से बदल गया, जब बिजली के एक खंभे की तान से करंट लगने के कारण उनके दोनों हाथ काटने पड़े और एक पैर भी क्षतिग्रस्त हो गया। तब से उनका इलाज जयपुर के एस.एम.एस. हॉस्पिटल में चल रहा है, जिसमें अब तक लाखों रुपये खर्च हो चुके हैं। दूसरी तरफ बिजली के करंट से हुई इस क्षति के संबंध में संजय सांखला का विद्युत विभाग के खिलाफ उच्च न्यायालय जोधपुर में मामला भी विचाराधीन चल रहा है। इस स्थिति के कारण एक समय निराशा से घिरे संजय को सोशल मीडिया के माध्यम से दिव्यांगजन स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं की जानकारी मिली। इसके बाद जोधपुर में उनकी मुलाकात कोच शेराराम सैनी से हुई, जो दिव्यांगजनों को तैराकी का प्रशिक्षण देते हैं। कोच सैनी ने संजय का मार्गदर्शन किया और उन्हें पैरा तैराकी के लिए प्रेरित किया। संजय वर्तमान में कोच शेराराम सैनी के पास प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इस वर्ष रहा शानदार प्रदर्शन, कुल 10 स्वर्ण पदक और 2 रजत पदक जीते
कोच शेराराम सैनी ने बताया कि संजय सांखला ने इस साल राज्य स्तर पर 100 मी. ब्रेस्ट स्ट्रोक, 50 मी. बटरफ्लाई और 100 मी. बटरफ्लाई तीनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते थे।अब नेशनल लेवल पर दो गोल्ड और एक सिल्वर पदक जीते हैं। इस प्रदर्शन के बाद संजय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली पैरा तैराकी प्रतियोगिताओं में भाग लेने की योग्यता रखते हैं।संजय सांखला ने इस साल अब तक कुल 12 पदक जीते हैं, जिनमें 10 स्वर्ण पदक और 2 रजत पदक शामिल हैं।
अपने दादा और कोच को देते हैं जीत का श्रेय
इस दिव्यांग प्रतिभावान खिलाड़ी संजय ने अपनी जीत का श्रेय अपने दादा राम अवतार सांखला के साथ अपने माता-पिता, भाई-बहन और विशेष रूप से अपने गुरु कोच शेराराम सैनी को दिया है।







