भगवान अगुण, अरुप, अलख और अजन्मा होते हैं- संत अमृत राम जी महाराज, ग्वालिया बालाजी मंदिर में चल रही रामकथा में उमड़ रहे हैं भक्तजन श्रद्धालु

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भगवान अगुण, अरुप, अलख और अजन्मा होते हैं- संत अमृत राम जी महाराज,

ग्वालिया बालाजी मंदिर में चल रही रामकथा में उमड़ रहे हैं भक्तजन श्रद्धालु

लाडनूं (kalamkala.in)। लाडनूं क्षेत्र के प्रसिद्ध ग्वालिया बालाजी मंदिर श्यामपुरा में लगातार राम कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस रामकथा में पुष्कर से पधारे रामस्नेही संत श्री अमृतरामजी महाराज द्वारा गुंजायमान ‘अवध में आनंद भयो जय रघुवर लाल की’ के साथ सुंदर आयोजन में कथा वाचन कर रहे हैं। कथा में बुधवार को ‘राम जन्मोत्सव’ बड़े उत्साह पूर्वक मनाया गया। रामकथा में संत अमृत राम जी महाराज ने कहा, भगवान अगुण, अरुप, अलख और अजन्मा होते हैं।सतोगुण, रजोगुण व तमोगुण के निर्माता भगवान होते हैं, पर ये तीनों गुण मिलकर भी भगवान की रचना नहीं कर सकते। जैसे, मूर्तिकार राम का विग्रह तो बना सकता है, पर राम नहीं बना सकता।

सबसे कठिन सेवा धर्म का पालन अवश्य करें 

संत महाराज ने कहा कि जब धर्म को समाज कंटकों व असामाजिक तत्वों द्वारा हानि पहुंचाई जाती है, तब भगवान अवतार लेकर पुनः धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भगवत गीता में आया है, ‘यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत: अभ्युतथानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम’ और ‘परित्राणाय साधुनाम विनाशायच दुस्कृताम, धर्मसंस्थापनार्थक संभवामी युगे युगे।’ इन दोनों मंत्रों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म शब्द भगवान को अतिप्रिय है। धर्म अर्थात् कर्तव्य होता है, हर व्यक्ति को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। इस युग में राम का नाम लेना सरल है, पर माता-पिता, सास-ससुर की सेवा करना कठिन है। दुनिया में सबसे कठिन धर्म है सेवा करना। त्रेता युग में राम रावण को मारने नहीं आते, बल्कि भक्तों के प्रेम के कारण अवतार लेते हैं।

उमड़ रहे हैं हजारों श्रद्धालु 

इस रामकथा में सैंकड़ों श्रद्धालु भक्त प्रतिदिन कथा श्रवण का आनंद लेकर भावविभोर हो रहे हैं। कथा में लाडनूं, जसवंतगढ़, डाबड़ी, लैड़ी, छपारा, बाकलिया, बादेड़, बल्दू, दूजार, बालसमंद, झेकरिया, श्यामपुरा आदि से पधारे श्रोता कथा रसपान श्रवण के लिए उमड़ रहे हैं। इस दौरान हरिराम स्वामी, मेवाराम पूनियां, अमानाराम फौजी, मालाराम, दोलाराम पूनियां, नथाराम पूनियां, गोपाल पूनियां, श्रीराम, लालाराम पूनियां, ओमप्रकाश पंडित, उमाकांत शास्त्री, भंवर सिंह, सीताराम गौतम, लक्ष्मीपत, सुनिल, सुरेंद्र, कप्तान छतर सिंह, हरनाथ पूनियां आदि विभिन्न गणमान्य लोग भी कथा श्रवण के लिए उपस्थित हो रहे हैं।

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Author: kalamkala

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