लाडनूं के प्रो. जिनेन्द्र जैन को मिला ‘आदिसागर अंकलीकर विद्वत् सम्मान’

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लाडनूं के प्रो. जिनेन्द्र जैन को मिला ‘आदिसागर अंकलीकर विद्वत् सम्मान’

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय लाडनूं के प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के प्रो. जिनेन्द्र जैन को जैनविद्या, प्राकृत भाषा के विकास, पांडुलिपि संरक्षण एवं उत्कृष्ट लेखन कार्य व साहित्य संपादन के लिए ’आदिसागर अंकलीकर विद्वत् सम्मान-2025’ से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें श्री आदिसागर अंकलीकर परम्परा के चतुर्थ पट्टाचार्य प्राकृताचार्य श्री सुनील सागर महामुनिराज के सान्निध्य में प्रदान किया गया। बड़ोदरा (गुजरात) में आदिसागर अंकलीकर जागृति मंच मुम्बई उन्हें यह सम्मान तीर्थंकर श्री अजितनाथ के पंचकल्याणक महोत्सव के अवसर पर प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरूप प्रो. जैन को श्रीफल, शाॅल, प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र और 51 हजार रूपयों की नगद राशि प्रदान की गई। गौरतलब है कि आदिसागर अंकलीकर विद्वत् सम्मान, आचार्य आदिसागर अंकलीकर अंतरराष्ट्रीय जागृति मंच द्वारा दिगंबर जैन विद्वानों को प्रदान किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है। यह सम्मान जैन सिद्धांतों, दर्शन और साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। आदिसागर अंकलीकर परंपरा जैन समाज में उच्च प्रतिष्ठा रखती है, और इस पुरस्कार द्वारा विद्वानों के तप, त्याग और ज्ञान का सम्मान किया जाता है। प्रो. जैन को यह महत्वपूर्ण सम्मान दिए जाने पर जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने हर्ष जताया है और उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं प्रदान की हैं। साथ ही विश्वविद्यालय के समस्त स्टाफ सहित सभी परिचितों आदि ने भी इस पर प्रसन्नता व्यक्त की और उन्हें विभिन्न माध्यमों से बधाइयां दी हैं।

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Author: kalamkala

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