कलम कला ध्यानाकर्षण-  लाडनूं में मक्खी-मच्छरों की भरमार से बीमारियां-महामारी फैलने का बना खतरा, प्रशासन जागे, शहर में डीडीटी, फिनायल, एंटी लार्वा का हो छिड़काव, नाले-नालियों की सफाई व्यवस्था दुरुस्त हों, सभी ऑटो टीपर्स का हो पूरा उपयोग

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कलम कला ध्यानाकर्षण-

लाडनूं में मक्खी-मच्छरों की भरमार से बीमारियां-महामारी फैलने का बना खतरा, प्रशासन जागे,

शहर में डीडीटी, फिनायल, एंटी लार्वा का हो छिड़काव, नाले-नालियों की सफाई व्यवस्था दुरुस्त हों, सभी ऑटो टीपर्स का हो पूरा उपयोग

लाडनूं (kalamkala.in)। पूरे शहर में मच्छरों की भरमार है, लोग परेशान हैं, लेकिन प्रशासन पूरा बेखबर है। दिन हो या रात, मच्छरों के काटने से हर व्यक्ति बेचैन है। घरों में लोग ऑल आउट, गुड नाइट, कछुआ छाप अगरबत्ती, काला हिट आदि सभी की आजमाइश करने के बावजूद मच्छरों से कोई छुटकारा नहीं पा रहे हैं। लगता है मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू आदि बीमारियों से आम नागरिकों के ग्रस्त होने के बाद ही प्रशासन की आंखें खुलेंगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और नगर पालिका इन सबके लिए जिम्मेदार हैं और उनका दायित्व है कि शहर भर में एंटीलार्वा का छिड़काव सभी जलभराव क्षेत्रों में किया जाए, सभी नाले-नालियों की नियमित और परिपूर्ण सफाई हो, सारा कीचड़ व गंदगी को अविलम्ब हटाया जाए तथा सभी नाले-नालियों में डीडीटी, फिनायल वगैरह का पर्याप्त और अनेक बार छिड़काव करवा जाए।

शहर में ऑटो टीपर्स की कचरा संग्रहण की व्यवस्था चरमाराई

शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार नाममात्र का ही हो पाया है। शहर में ऑटो टीपर द्वारा घर-घर पहुंच कर कचरा संग्रहण का काम पूरी तरह से चरमरा गया है। सप्ताह-दस दिन और इससे भी अधिक समय तक गलियों में ऑटो टीपर गायब रहते हैं और लोगों के घरों में गीला और सूखा कचरा इकट्ठा पड़ा रहता है, जिससे न केवल बदबू ही फैलती है, बल्कि भारी संख्या में मक्खी-मच्छर पनपते हैं और पूरे घर में भिनभिनाते रहते हैं। इनसे स्पष्ट रूप से बीमारियों के फैलने और महामारी तक की नौबत आ सकती है। नगर पालिका को इस ओर सबसे पहले ध्यान देना होगा। नगर पालिका के पास सभी वार्डों में भेजने के लिए पर्याप्त ऑटो टीपर हैं, लेकिन उनमें खराबियां बताई जाकर उन्हें केवल स्टेडियम ही नहीं शहर के अन्य विभिन्न स्थानों पर खड़ा करके छोड़ दिया गया है। आखिर यह कैसा गोरखधंधा है। अगर ऐसा वाहन किसी प्राइवेट व्यक्ति के पास होता तो बरसों बरस उसका कुछ भी नहीं बिगड़ता और उसके रखरखाव में कभी कोई कमी नहीं रहती, लेकिन लगता है कि यहां कोई धणी-धोरी नहीं है, सब अंधेर नगरी चौपट राजा की तर्ज पर चल रहा है।

बहुत बदतर हालात हैं नाले-नालियों की नियमित सफाई के

इसी तरह से नगर पालिका की तरफ से पूरे शहर के विभिन्न नाले-नालियों के रखरखाव और साफ-सफाई की हालत बिगड़ी हुई है। कई-कई महिनों तक उनकी सफाई नहीं की जाती और फिर कभी एक साथ सफाई की जाती है, तो पूरा कचरा-कीचड़ निकल नहीं पाता और जो टनों-टन कीचड़-कचरा निकाला जाता है, वह गीला रहता है, तब तक कोई हटाता नहीं और जब तक कोई हटाने के लिए पहुंचता से, तब तक वह कचरा कुछ तो वापस नाली में चला जाता है और बाकी का वाहनों के टायरों से चिपक-चिपक कर पूरे रास्तों में फ़ैल कर चिपक जाता है। इस प्रकार के हालात भी शहर में मक्खी-मच्छरों और विभिन्न किटाणुओं को पनपाने में अत्यंत सहायक होते हैं। नगर पालिका प्रशासन को इन स्थितियों की तरफ गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और शहर को मच्छरों और अन्य किटाणुओं-विषाणुओं के फैलने से बचाना चाहिए।

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Author: kalamkala

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