राजस्थान की साहित्य अकादमियों को बहाल करके साहित्यकारों को सम्बल दिया जाए, मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन
पवन पहाड़िया पत्रकार, डेह। मूंडवा (kalamkala.in)। अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के संस्थापक, राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मण दान कविया ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से प्रदेश की साहित्य अकादमियां शीघ्र बहाल करने की मांग दोहराई है। इस सम्बन्ध में दिए गए ज्ञापन में कविया ने लिखा है कि प्रदेश में भाजपा को सत्ता में आए हुए ढ़ाई वर्ष हो चुके। प्रदेश में विकास की गंगा की अविरल धारा चहुंओर प्रवाहित हो रही है। अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक की स्थिति पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में मजदूर, किसान, नारी, कर्मचारियों के हितों की रक्षार्थ भाजपा सरकार कटिबद्ध है। प्रदेश में जन सुनवाई की कार्यवाही भी सराहनीय है। सब कुछ अच्छा होने के बावजूद भी सरकार द्वारा साहित्य अकादमियों की सुध नहीं लेना स्वर्ण-भाल में तांबे की मेख जैसी स्थिति बनी हुई है। पिछली सरकार ने भी अधिकतर समय अकादमियों की सुध नहीं लेने में गंवाया था, ठीक उसी प्रकार आपकी सरकार भी इस क्षेत्र में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठा पाई है, जिससे प्रदेश के साहित्यकार क्षुब्ध एवं दुःखी हैं। साहित्यकार जनता का पथ-प्रदर्शक होता है। यदि पथ प्रदर्शक ही उपेक्षा का शिकार हो जाएगा तो जनता की तस्वीर धुंधली नजर आएगी। कविया ने आग्रहपूर्वक अनुरोध किया कि आप यथाशीघ्र प्रदेश की अकादमियां बहाल करने का श्रेय एवं प्रेय कार्य कराएं, ताकि प्रदेश का साहित्यिक वर्ग घोर निराशा के अंधकार से निकल कर प्रकाश की ओर अग्रसर हो सके।




