डायबिटीज सहित सभी क्रोनिक बीमारियों को रिवर्सल कर सकता है मिलेट्स- मिलेट्स वूमन शर्मिला ओसवाल लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में ‘मिलैट्स खाएं एवं स्वस्थ रहें’ पर व्याख्यान आयोजित

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डायबिटीज सहित सभी क्रोनिक बीमारियों को रिवर्सल कर सकता है मिलेट्स- मिलेट्स वूमन शर्मिला ओसवाल

लाडनूं के जैविभा विश्वविद्यालय में ‘मिलैट्स खाएं एवं स्वस्थ रहें’ पर व्याख्यान आयोजित

लाडनूं (kalamkala.in)। ग्रीन एनर्जी फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष ‘मिलेट्स वूमन’ शर्मिला ओसवाल जैन ने कहा है कि पूरी दुनिया आज मिलेट्स की ओर लौट रही है। जितने भी सैलिब्रिटीज हैं, वे कोई गेहूं की रोटी नहीं खाते, सभी मिलेट्स से बना खाना ही खा रहे हैं। मिलैट्स अनाज में शरीर के लिए आवश्यक सभी तत्व, मिनरल्स, विटामिन्स आदि मौजूद हैं। यह केमिकल रहित फूड है। मिलैट्स से डायबिटीज नहीं होती और जिन व्यक्तियों को डायबिटीज की बीमारी होती है, वह रिवर्सल हो जाता है। उन्होंने यहां जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के निर्देशन व मार्गदशन में यूनिवर्सिटी आॅडिटोरियम में आयोजित ‘लेक्चर ऑन ईट मिलैट्स एंड बी हैपी’ में ‘मिलैट्स खाएं एवं स्वस्थ रहें’ पर बोल रही थी। उन्होंने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ आदि को नई पीढी के खानपान के तरीको और मिलैट्स को नए और अनोखे तरीकों से अपनाए जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया की सारी क्रोनिक डिजीज और डायबिटीज तक को मिलैट्स का सेवन ही रिवर्सल कर देती है।

राजस्थान बन सकता है मिलैट्स एक्सपोर्ट का हब

शर्मिला ओसवाल ने कहा कि राजस्थान की भूमि में बाजरा व ज्वार बहुतायत से होते हैं। यह भूमि मिलैट्स की भूमि है, लेकिन यहां के लोगों के लिए इसका महत्व अधिक नहीं है। यहां बाजरा की रैवेन्यू को महत्व दिए जाने के बजाय लोग गेहूं की तरफ बढ रहे हैं। मैगी के इस्तेमाल को उन्होंने गलत बताते हुए कहा कि गेहूं कभी भारती का नहीं था, यह आयातित है, जबकि बाजारा और ज्वार हमारा प्राचीन  अनाज है। उन्होंने कहा, बाजरा का नूडल्स बनाया जा सकता है, उसका पिज्जा, ब्रेड, बिस्क्ट्सि सभी बनाए जा सकते हैं, यहां तक कि मिलैट्स ड्रिंक और मिलैट्स वाइन भी बनाई जाती है। उनको महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे यहां लोगों में जज्बा है और आत्मविश्वास है। अपनी जिन्दगी को जाया करने के बजाय भोजन जैसी छोटी सी चीज में बदलाव लाकर रैवेन्यू को राजस्थान की ओर बढाया जा सकता है। इसके लिए मिलैट्स के उत्पादन को बढाया जाना जरूरी है। राजस्थान में मिलैट्स बहुत है, इसे खोना शुरू करें, यह पूर्ण सत्विक भोजन है। मिलैट्स से मनुष्य में रेजिस्टेंट पावर बढता है और धरती की शक्ति भी बढती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान को मिलैट्स की दृष्टि से ‘एक्स्पोर्ट हब’ बनाया जा सकता है। हम ‘वाॅकल फोर लोकल’ अपनाएं और मिलैटस के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाएं।

पेस्टीसाईड्स इस्तेमाल की जगह आर्गेनिक खेती की जाए

इस अवसर पर शर्मिला ओसवाल ने विद्यार्थियों की विभिन्न जिज्ञासाओं का जवाब भी दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं के सवालों पर कहा कि नूडल्स बनाने के लिए बाजरा के आटे में आवश्यक लोच ग्वारगम से पैदा किया जाता है, जो पूरी तरह से स्वास्थ्यवर्द्धक होता है। गेहूं में ग्लूटेन होता है, जबकि बाजरा पूरी तरह से ग्लूटेन फ्री होता है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार से मिलिट्री से लिए भोजन में 30 प्रतिशत मिलैट्स जरूरी कर दिया है। संसद की कैंटीन में भी सांसदों के लिए मिलैट्स उपलब्ध रहता है। उन्होंने किसानों द्वारा मिलेट्स की पैदावार के लिए राष्टीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों को दी जाने वाली सब्सिटी व सहायता के बारे में जानकारी भी दी। उन्होंने पेस्टीसाईड्स के इस्तेमाल की जगह आर्गेनिक खेती किए जाने पर जोर दिया। कार्यक्रम का प्रारम्भ मंगलाचरण से किया गया। शर्मिला ओसवाल का स्वागत शाॅल, बुके व साहित्य भेंट करके किया गया। स्वागत गीत छात्राओं ने प्रस्तुत किया। प्रो. बीएल जैन ने स्वागत वक्तव्य के साथ मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. युवराज सिंह खांगारोत ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. रविन्द्र सिंह राठौड़ ने किया।

इन सबकी रही उपस्थिति 

इस अवसर पर कुलसचिव देबाशीष गोस्वमी, अभिनव सक्सेना, पंकज भटनागर, दीपाराम खोजा, प्रो. जिनेन्द्र जैन, प्रो. लक्ष्मीकांत व्यास, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डाॅ. रामदेव साहू, डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. बलबीर सिंह चारण, डा. अमिता जैन, डाॅ. लिपि जैन, डाॅ. मनीषा जैन, डाॅ.  सुनीता इंदौरिया, डाॅ. ईर्या जैन, डाॅ. स्नेंहलता जोशी, डाॅ. प्रगति भटनागर, डाॅ. मनीष भटनागर, डाॅ. जेपी सिंह, डाॅ. जगदीश यायावर, डाॅ. वीरेन्द्र भाटी मंगल, पवन सैन, देशना चारण, अमीलाल चाहर, ओमप्रकाश सारण, निरंजन सिंह सांखला आदि उपस्थित रहे।
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Author: kalamkala

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