‘अब मैं थक गया हूं और ज्यादा शक्ति नहीं बची है। बस मेरा आखिरी प्रयास है।’ एक किसान की व्यथा- ‘मेरे खेत को रास्ता दो या खेत में आने-जाने के लिए कोई हेलिकॉप्टर भेजो, ताकि खेती कर सकूं।’

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‘अब मैं थक गया हूं और ज्यादा शक्ति नहीं बची है। बस मेरा आखिरी प्रयास है।’

एक किसान की व्यथा- ‘मेरे खेत को रास्ता दो या खेत में आने-जाने के लिए कोई हेलिकॉप्टर भेजो, ताकि खेती कर सकूं।’

लाडनूं (kalamkala.in)। मान्यता है कि किसी के भी पेट पर लात नहीं मारना चाहिए, लेकिन सबका पेट पालने वाले किसान के ही पेट पर लात मारकर उसे अपना काम-धंधा करने से रोक देने पर उसकी मनोदशा कैसी होगी, इसका उदाहरण यहां एक किसान की व्यथा में नजर आता है। यह लाडनूं तहसील के ग्राम सुनारी के किसान का दु:ख-दर्द है। उस किसान ने अपनी पीड़ा को इस पत्र में अभिव्यक्त किया है, जो उसने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखा है। इस किसान हनुमान राम बीरड़ा ने बताया है कि उनके पति-पत्नी के नाम के खेत होने के बावजूद वे अपनी जमीन पर कृषि पैदावार लेने में असमर्थ हैं। क्योंकि उनके खेत में आने-जाने का कोई रास्ता नहीं है, इससे वे अपना खेत जोतने से लेकर उपज प्राप्त करने तक खेत में आना-जाना तक नहीं कर सकते। बीरड़ा ने सीएम से मांग की है कि उन्हें अपने खेत में आने-जाने के लिए कोई रास्ता खुलवा कर सुविधा प्रदान करें, अन्यथा खेत जाकर कृषि कार्य करने के लिए उन्हें कोई हेलिकॉप्टर दिया जावे, ताकि वे अपने खेत में काम करके फसल व पैदावार ले सकें। उन्होंने किसान का एकमात्र सहारा कृषि कार्य करके अपनी आजीविका चलाना बताया है और अपनी रोजी-रोटी की समस्या हल करने की मांग की है। यह पत्र मुख्यमंत्री के साथ ही उन्होंने कृषि मंत्री, जिला कलेक्टर, एसडीएम व तहसीलदार को भी दिया है और विशेष आग्रह किया है कि 15 सालों से वे खेती नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए उन्हें या तो रास्ता दें अथवा हेलीकॉप्टर उपलब्ध करवाएं। साथ ही चेतावनी भरा इशारा किया है कि अन्यथा, किसान खेती पर निर्भर होता है, अगर खेती नहीं कर पाए तो परिवार की रोजी-रोटी की समस्या खड़ी होती है और तब किसान के पास सभी रास्ते बंद हो जाने पर सिर्फ एक ही रास्ता बचता है, जो समझदार कै लिए इशारा ही काफी है। अपनी मानसिक हालत समझ और दु:ख को समझने का आग्रह करते हुए उन्होंने लिखा है कि ‘अब मैं थक गया हूं और ज्यादा शक्ति नहीं बची है। बस मेरा आखिरी प्रयास है।’

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Author: kalamkala

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