पैक्स कर्मचारियों ने दिया निगौर में सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के समक्ष धरना, किया प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपकर मांगें रखीं, 29 सितंबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने उठा रखा है संघर्ष का बीड़ा

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पैक्स कर्मचारियों ने दिया निगौर में सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के समक्ष धरना, किया प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपकर मांगें रखीं, 29 सितंबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी

ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने उठा रखा है संघर्ष का बीड़ा

नागौर (kalamkala.in)। राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा प्रदेशव्यापी सांकेतिक धरना-प्रदर्शन नागौर में सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समाजियों के कार्यालय के समक्ष किया गया। धरनार्थियों का कहना है कि पूर्व में राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति राजस्थान, जयपुर द्वारा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 22 एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत विधिक नोटिस 18 सितम्बर को दिया गया था, जिस पर सहकारिता विभाग द्वारा अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। इसी कारण यह एक दिवसीय सांकेतिक धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम रखा गया है। अब 29 सितंबर तक भी संज्ञान नहीं लेने पर पैक्स कंप्यूटराइजेशन, फसली ऋण वितरण एवं वसूली सहित, राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना, सहकार सदस्यता अभियान के साथ विभाग की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं का दिनांक 29 सितम्बर सोमवार से संपूर्ण कार्य का अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया जाएगा। शुक्रवार को धरनार्थियों ने नागौर में सोसायटी सब रजिस्ट्रार को विभिन्न ज्ञापन मुख्य सचिव सुधांशु पंत, सहकारिता मंत्री खत्म कुमार दक, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल, राजस्थान राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक एवं जिला कलेक्टर व प्रशासक दी नागौर सैंट्रल कोआपरेटिव बैंक के नाम के सौंपे।

व्यवस्थापकों के आरक्षित 20 प्रतिशत कोटे के नियमों में वांछित संशोधन हों

ज्ञापन में दी गई प्रमुख मांगों में प्रदेश की ग्राम सेवा सहकारी समितियां के कार्यरत कार्मिकों का जिला कैडर बनाते हुए नियोक्ता निर्धारण करने, सहकारी बैंकों में ऋण पर्यवेक्षकों के पद कई वर्षों से रिक्त हैं, इन पदों पर समिति व्यवस्थापकों से ही शत्-प्रतिशत नियुक्ति करने, एक बार पुनः नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाकर समस्त कार्मिकों को नियमित करने, ग्राम सेवा सहकारी समितियों के कार्मिकों के सेवा नियम 2022 में संशोधित करते हुए सेवा नियम कार्मिक विभाग द्वारा बनाया जाने तथा केंद्रीय सहकारी बैंकों में बैकिंग सहायक के रिक्त पदों में से व्यवस्थापकों के लिए आरक्षित 20 प्रतिशत कोटे के नियमों में वांछित संशोधन करने एवं इस प्रक्रिया में आयु सीमा, अनुभव सहित स्क्रीनिंग की अनिवार्यता में बाध्यता हटाने की मांगें की गई हैं।

ग्राम सेवा सहकारी समितियों में स्थाई कर्मचारी नहीं, जो हैं, उनका नियोक्ता निर्धारित नहीं

इनके अलावा ज्ञापन में सहकार सदस्यता अभियान 2 से 15 अक्टूबर तक चलाने के लिए जारी आदेश दिनांक 08.09.2025 में नवीन पैक्स के गठन के संदर्भ में परिवेदना व्यक्त की गई है कि राजस्थान राज्य सहकारी बैंक द्वारा जिला केंद्रीय सहकारी बैंक एवं अपेक्स बैंक कर्मचारियों के लिए लागू 16वें वेतन समझौते को लेकर जारी रिपोर्ट में राजस्थान की 1804 ग्राम सेवा सहकारी समितियों को असंतुलन में बताया गया है, जबकि राज्य में पहले से संचालित इन ग्राम सेवा सहकारी समितियों में संस्थापन व्यय तक के पैसे नहीं हैं, इसके बावजूद इन्हीं पैक्स में से नई पैक्स के गठन का निर्णय पैक्स के लिए आत्मघाती निर्णय है।राजस्थान राज्य सहकारी बैंक द्वारा इस असंतुलन को लेकर एक कमेटी दिनांक 09.08.2023 को बनाई गई थी, जबकि केंद्रीय सहकारी बैंक द्वारा अनर्गल थोपे जा रहे ब्याज के कारण असंतुलन की जानकारी सामने आने पर कमेटी ने राजस्थान राज्य सहकारी बैंक एवं केंद्रीय सहकारी बैंक के हितार्थ उस कमेटी की रिपोर्ट को उजागर नहीं कर, पैक्स को उन्हीं की बदहाल स्थिति पर छोड़ दिया था। तथ्य यह हैं कि वर्तमान में राजस्थान में 8504 ग्राम सेवा सहकारी समितियों राज्य भर में कार्यरत हैं। विभिन्न जिलों से यूनियन को प्राप्त जानकारी के अनुसार, इनमें से अधिकतर ग्राम सेवा सहकारी समितियों में स्थाई कर्मचारी नहीं हैं, जो कर्मचारी कार्यरत हैं, उनका नियोक्ता निर्धारित भी नहीं हैं और नहीं उनकी सेवा सुरक्षा की कोई गारंटी हैं, चूंकि सहकारिता विभाग द्वारा इन कर्मचारियों के लिए कॉमन कैडर की व्यवस्था का अभाव है और पिछले तीन सालों से कर्मचारियों का स्थाईकरण नहीं हो पाया हैं, और वर्ष 2017 के पश्चात ग्राम सेवा सहकारी समिति अपने स्तर से कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं कर पाई हैं। इसलिए, ग्राम सेवा सहकारी समितियों में कार्यरत कर्मचारियों का नियोक्ता निर्धारण किया जाना समय की मांग हैं।

ऋण वितरण में भयंकर कटौती आखिर क्यों, स्थिति डांवाडोल बनी

ज्ञापन के मुताबिक वर्तमान में राजस्थान में 8504 ग्राम सेवा सहकारी समितियां राज्य भर में कार्यरत हैं, जिनमें सरकार की ओर से ब्याज मुक्त योजना के तहत राज्य के 39 लाख किसानों को ग्राम सेवा सहकारी समितियां एवं केंद्रीय सहकारी बैंक स्तर से अधिकतम 60 हजार करोड़ रुपए की साख सीमा एमसीएल स्वीकृत के अनुपात में केवल 40 फीसदी यानि सालाना 25 हजार करोड़ का ही ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे ऋण वितरण में भंयकर कटौती के चलते ब्याज अनुदान के घटते मार्जिन से पैक्स-लैम्प्स की आर्थिक स्थिति पिछले छह सालों से डावांडोल बनी हुई हैं। जबकि राज्य सरकार द्वारा इस ऋण वितरण पर महज 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान ग्राम सेवा सहकारी समितियों को दिया जाता है, जहां प्रत्येक साल महंगाई की दर 5 से 6 फीसदी और भारत की अर्थव्यवस्था में 4 से 5 फीसदी बढ़ोतरी हो रही हैं, तो सरकार की ओर से मिलने वाले ब्याज अनुदान में पिछले दो दशक से 1 फीसदी भी बढ़ोतरी नहीं होना ग्राम सेवा सहकारी समितियों के लिए चिंता का विषय हैं।

29 सितम्बर से होगा अनिश्चितकालीन बहिष्कार

ज्ञापन में बताया गया है कि फसली ऋण वितरण का कार्य पूर्णतः नोडल एजेंसी के तौर पर पैक्स लैम्पस को कार्यालय आदेशों में बताई जा रही है। वहीं केंद्रीय सहकारी बैंकों को भारत सरकार 1.5 प्रतिशत एवं राज्य सरकार सरकार द्वारा 0.80 प्रतिशत क्षतिपूर्ति के नाम पर करोड़ों रुपए सालाना इस फसली ऋण की ऐवज दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया में संशोधन कर मौजूदा नोडल ऐजेंसी को भी क्षतिपूर्ति राशि में अनुपातिक भाग आवंटन करना वर्तमान परिदृश्य की मांग हैं। राज्य की पैक्स लैम्पस में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के भुगतान की प्रक्रिया एफआईजी पोर्टल के माध्यम से निष्पादित की जाती हैं, जिसमें पैक्स को केंद्रीय सहकारी बैंक का बैकिंग काउंटर स्थापित कर संचालित किया जा रहा है। लेकिन, बैंकिग काउंटर कार्य के अनुपात में ग्राम सेवा सहकारी समितियों को संबंधित सीसीबी द्वारा बीसी पेटे कोई कमीशन की राशि नहीं दी जा रही हैं। इसमें पैक्स स्तर पर बैकिंग काउंटर के जरिए होने वाले भुगतान में कमीशन का प्रावधान किया जाना चाहिए। इन प्रमुख मांगों के अलावा यूनियन के सुझावों पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर पैक्स कर्मचारियों के हितार्थ सभी मांगों का निराकरण करवाया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि अन्यथा, 29 सितंबर से अनिश्चितकालीन बहिष्कार प्रारम्भ किया जाएगा। इस कारण राज्य सरकार की समस्त योजनाओं, सहकार सदस्यता अभियान के विफल होने की जिम्मेदारी सरकार एवं सहकारिता विभाग की होगी। इस अनिश्चितकालीन बहिष्कार के बावजूद भी सहकारिता विभाग एवं सरकार द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जाता हैं, तो ऐसी स्थिति में पैक्स हितार्थ अल्पकालीन फसली ऋण प्रक्रिया में ब्याज छूट प्रावधानों के तहत लेटलतीफी से जारी होती ब्याज अनुदान राशि के लिए समिति स्वयं नीति तैयार कर संचालक बोर्ड से अनुमोदित करवाकर आने वाली रबी चक्र में फसली ऋण वितरण में खरीफ/रबी के ऋण की वसूली ब्याज (मूलधन+ब्याज) पर ऑफलाइन प्रक्रिया के तहत ऋणी सदस्यों को समिति स्तर से रसीद देकर ऋणों की राशि वसूल की जाएगी। यह प्रक्रिया विधि सम्मत रूप से प्रारम्भ की जाएगी।

इन सबने जताया रोष

धरने पर बैठे राजस्थान सहकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजकों ने बताया कि पैक्स कर्मचारी लंबे अरसे से अपनी मांगों के निराकरण के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, लेकिन सरकार, विभाग की हठधर्मिता पर ध्यान नहीं दे रही हैं। जिससे कर्मचारियों पर वेतन तक के संकट हैं। अब कॉमन कैडर गठन किया जाना ही सभी समस्याओं का एकमात्र हल है। नागौर में धरने पर बैठने वालों में एवं ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष भंवराराम चौधरी, कोषाध्यक्ष व प्रदेश संघर्ष समिति सदस्य बलदेवाराम गेट, सचिव राजूराम गावड़िया, उपाध्यक्ष हीराराम नया, सुरेश चाहर तथा ब्रांच अध्यक्ष सहदेव खोजा नागौर, सोहनाराम गैणा लाडनूं, पवन डीडवाना, जगदीश परबतसर, ताराचंद जायल, राजेन्द्र छाबा रोल, राजीव सांजू, राजेन्द्र बिश्नोई बुटाटी, अजयपाल खींवसर, ओमप्रकाश गोटन, मंगाराम मेड़ता सिटी, सोहनाराम व मंशाराम रियांबड़ी, बुद्धाराम बेनीवाल डेगाना, रामेश्वर जांगिड़ मूंडवा, विकास चौधरी कुचामन, रामनिवास कुमावत नावां, शिम्भुलाल जावला, दुर्गाराम मकराना, छोटुराम गच्छीपुरा आदि उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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