आर्य समाज लाडनूं के खाते से अनधिकार चेष्टा कर एक लाख रुपए विड्रोल करने के मामले में जांच की मांग, अब पुलिस करेगी दूध का दूध और पानी का पानी, क्यों कुछ लोग बन जाते हैं पदलोलुप और क्यों लगातार चिपके रहना चाहते हैं संस्था-संगठनों में ओहदों से?

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आर्य समाज लाडनूं के खाते से अनधिकार चेष्टा कर एक लाख रुपए विड्रोल करने के मामले में जांच की मांग, अब पुलिस करेगी दूध का दूध और पानी का पानी,

क्यों कुछ लोग बन जाते हैं पदलोलुप और क्यों लगातार चिपके रहना चाहते हैं संस्था-संगठनों में ओहदों से?

लाडनूं (kalamkala.in)। निर्वाचन हर संस्था-संगठन का आधार होता है। इससे नए पदाधिकारियों और उनकी टीम को समाजसेवा का अवसर मिलता है, लेकिन समाज में जो पदलोलुप लोग होते हैं अथवा जिनका व्यक्तिगत स्वार्थ जुड़ा होता है, उनको यह चुनाव की प्रक्रिया रास नहीं आती। ऐसे लोगों की इच्छा रहती है कि वे पद से चिपके रहें और अपनी मनमानियां लगातार करते-चलाते रहें। स्थानीय सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक संस्था आर्यसमाज, जिसका करीब 100 सालों का इतिहास रहा है और लाडनूं शहर ही नहीं आसपास के क्षेत्र में भी उनका सांस्कृतिक स्वाभिमान जागरण, वेद पुनरोद्धार कार्यक्रम, धर्म-प्रचार और लोगों को संस्कारित करने का अभियान सदा से चलता रहा है। पिछले कुछ समय से यहां कुछ लोग अपने आपको सर्वेसर्वा समझने लगे और उनका बर्ताव भी ऐसा ही सामने आने लगा। हाल ही में यहां पुलिस थाना लाडनूं में दर्ज एक शिकायत में कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है।

यह लिखा गया थानाधिकारी को पत्र

आर्य समाज संस्थान लाडनूं की ओर से अध्यक्ष जगदीश यायावर व कोषाध्यक्ष मेघाराम स्वामी के पत्र क्रमांक- आ-स-ला/02/13, दिनांक 09-02-2026 द्वारा कुछ ऐसी ही स्थिति दृष्टिगोचर होती है। लाडनूं थानाधिकारी के नाम से दिए गए इस पत्र में बताया गया है कि श्री नोपाराम दिलोया, निवासी- तंवरा द्वारा आर्य समाज संस्थान, लाडनूं के बैंक खाता में से बद‌नियती एवं षड्‌यंत्र पूर्वक 1.00 लाख रूपये आहरण किए गए हैं। इस पत्र में बताया गया है कि आर्य समाज संस्थान लाडनूं इस क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित संस्था है, जो कि धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का संचालन करता है। यह संस्था राजस्थान सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1958 के तहत पंजीयन संख्या 297/2010-11 के रूप में पंजीकृत हैं तथा संस्था के चुनाव के बाद इसे रजिस्ट्रार सोसायटी रजिस्ट्रेशन अनुमोदित करता है। हाल ही में आर्य समाज संस्थान के चुनाव सम्पन्न हुए तथा उसका अपडेशन रजिस्ट्रार सहकारी समितियां डीडवाना-कुचामन द्वारा कर दिया गया। इसकी सूचना नोपाराम दिलोया को होने के उपरान्त भी बैंक पदाधिकारियों को अंधेरे में रखते हुए उन्होंने बदनियती एवं षड्‌यंत्रपूर्वक आर्य समाज संस्थान लाडनूं के बचत खाता से अनधिकृत रूप से रुपये एक लाख का आहरण कर 9 फरवरी को कर लिया गया। पत्र में इस प्रकरण में ऐसा अनाधिकार कार्य करने वाले लोगों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई कराई जाने तथा इनके द्वारा अनाधिकारी ढंग से उठाई गई राशि वापस खाते में जमा करवाई जाने की मांग की गई है। इस बारे में आर्य समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने संस्था के चुनाव और नए पदाधिकारियों की सार्वजनिक कर दी थी तथा सूचना से सबको विधिवत अवगत करवाया जा चुका था। इसके बाद जब आर्य समाज मंदिर में नियमित हवन चल रहा था, इसी दौरान चुपचाप बैंक में एक लाख की राशि विड्रोल करवा ली। इसकी जानकारी वर्तमान पदाधिकारियों को तब मिली, जब वे बैंक अधिकारियों से मिले।

इसे गबन कहें, बेईमानी, बदनियती या धोखाधड़ी कहा जाए?

हालांकि अब बैंक ने खाते से विड्रो करने पर रोक लगा दी है, लेकिन इन लोगों ने किस उद्देश्य से ऐसा कार्य किया, यह सवाल अभी तक खड़ा है। अगर उनकी कोई देनदारी थी, वो वर्तमान पदाधिकारी चुकाते। इस प्रकार से गुपचुप में रुपए निकाले जाने की हरकत अनेक संदेह खड़ा कर रहे हैं। यह करतूत खुले गबन जैसी प्रतीत हो रही है। खैर, पुलिस जांच होने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाएगा।

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Author: kalamkala

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