आजादी के बाद से ही रेल सुविधाओं से उपेक्षित रखा जा रहा है रतनगढ़-डेगाना खंड के लाडनूं-डीडवाना का विस्तृत क्षेत्र,
रेलवे सलाहकार रहे अनिल खटेड़ ने कहा- रेलवे अधिकारी उतरे हुए हैं मनमानी पर, बेतुके तर्क रख कर जनता को कर रहे भ्रमित
लाडनूं (kalamkala.in)। उत्तर पश्चिम रेलवे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य अनिल कुमार खटेड़ ने रेलवे पल आरोप लगाया है कि रेलवे अधिकारियों द्वारा लगातार रतनगढ़-लाडनूं- डेगाना खंड की पिछले दस सालों से अधिक समय से की जा रही है। लोगों की मांगों को लेकर रेलवे का रवैया कत्तई सकारात्मक नहीं रहा है। खटेड़ ने मांग की है कि जीएम एजीएम मुख्य परिचालन अधिकारियों को इस खंड की समस्याओं के निस्तारण के लिए रतनगढ़ या लाडनूं में प्लेटफार्म रिटर्न ट्रेन सुविधा उपलब्ध करवा कर जोधपुर अजमेर व जयपुर में उपलब्ध प्लेटफार्म रिटर्न ट्रेन को उनके लाईओवर के आधार पर वाया डेगाना- छोटी खाटू-डीडवाना- लाडनूं-सुजानगढ़- रतनगढ़ तक बढ़ाया जाए। इसमें 11090/11089 पुंछ-जोधपुर ट्रेन को तत्काल प्रभाव से रतनगढ़ तक बढ़ाया जा सकता है। इसी तरह ट्रेन संख्या 20483/20484 दादर-भगत की कोठी का विस्तार डेगाना-छोटी खाटू- डीडवाना-लाडनूं- सुजानगढ़-रतनगढ़ होकर जैसलमेर, हिसार, श्रीगंगानगर या हनुमानगढ़ तक आसानी से उसके लाईं ओवर के आधार पर किया जा सकता है। उत्तर-पश्चिम रेलवे अधिकारी गण यदि चाहें तो इन दोनों ट्रेनों का विस्तार इस क्षेत्र की मुम्बई- बीकानेर-जैसलमेर- पुणे आदि जगहों की ट्रेन की मांग को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
रेलवे अधिकारी देते हैं गलत तर्क और करते हैं जनता को अनसुना
अनिल खटेड़ ने बताया कि जोधपुर व बीकानेर डिवीजन दोनों की तरफ से लिखा जा रहा है कि रतनगढ़-सुजानगढ़-लाडनूं-डीडवाना- छोटी खाटू-डेगाना सेक्शन पर नई ट्रेन चलाने के लिए कोई स्लाट खाली नहीं है। इसके लिए जब हम रतनगढ़ या लाडनूं में वाशिंग लाइन की मांग करते हैं, तो कहते हैं कि ज़रुरत नहीं है। जबकि, रतनगढ़ में मीटर गेज के समय 10 कोच की वाशिंग लाइन थी, लेकिन उसको ब्रोड गेज के अनुरूप विकसित नहीं करके डिस्मेंटल कर दिया गया और रतनगढ़- डेगाना सेक्शन पर 10 जोड़ी दैनिक गाड़ियों का संचालन होता है और रेलवे रिकार्ड के अनुसार 30 करोड़ रेलवे रेवेन्यू 2025-26 में था, जबकि डेगाना-फुलेरा सेक्शन पर 24 जोड़ी दैनिक गाड़ियों का संचालन होता है, लेकिन रेलवे रेवेन्यू 29 करोड ही है। इसके अलावा जोधपुर डिवीजन का काॅमर्शियल जस्टीफिकेशन है, जिसमें रतनगढ़ डेगाना सेक्शन पर चलने वाली प्रत्येक ट्रेन 150% ओक्युपेन्सी के साथ चल रही है, फिर भी उत्तर पश्चिम रेलवे के जोन जोधपुर व बीकानेर डिवीजन नई ट्रेन, ट्रेनों का विस्तार और वीकली ट्रेन के फेरों में वृद्धि लगातार 10 साल से जनता की मांग व एक हजार से ज्यादा पत्र इन दस सालों में जनता जेडआरयुसीसी व डीआरयूसीसी सदस्यों द्वारा लिखा जा चुका है। लेकिन, उत्तर-पश्चिम रेलवे व रेल अधिकारियों द्वारा लगातार मांगों को अनसुना कर दिया जा रहा है।
राजधानी जयपुर, संभाग मुख्यालय अजमेर, बीकानेर से भी आजादी के बाद नहीं जुड़ सका यह क्षेत्र
आजादी के 78 सालों बाद भी रतनगढ़-डेगाना सेक्शन के सुजानगढ़, लाडनूं, डीडवाना, छोटी खाटू जैसे बड़े शहर राजस्थान की राजधानी जयपुर व सम्भाग मुख्यालय बीकानेर व अजमेर से सीधी ट्रेन सेवा से नहीं जुड़ सके। पहले उत्तर-पश्चिम रेलवे के अधिकारियों कहते थे, डेमू ट्रेन आने दीजिए, इस रुट पर बीकानेर व जयपुर की ट्रेन देंगे और डेमू ट्रेन का युग खत्म हो गया, क्योंकि अब इस सेक्शन व उत्तर पश्चिम रेलवे का अधिकांश हिस्से का विद्युतीकरण हो चुका है। अब कह रहे मेमु रेक आने दीजिए आपको बीकानेर व जयपुर की ट्रेन देंगे। लेकिन, अफसोस की या रेलवे अधिकारियों की लापरवाही की इन्तहा है कि एक साल पहले विद्युतीकरण हो चुका व मेड़ता में मेमु शेड का कार्य भी सम्पन्न हो चुका है और उत्तर पश्चिम रेलवे को अभी तक एक भी मेमु रेक का एलाॅटमेंट नहीं हुआ। इसका कारण इन्होंने मेमु रेक की मांग जनवरी 2026 में भेजी है, यानी मांग ही देरी से की गई है।
लाडनूं और सालासर आने वाले लाखों श्रद्धालु जन हैं रेलवे की अव्यवस्थाओं से पीड़ित
अनिल खटेड़ ने बताया कि इस समय लाडनूं में आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में एक साल के योगक्षेम वर्ष के तहत एक साल का प्रवास जारी है और पूरे भारतवर्ष व विदेश से भी जैन धर्मावलंबियों का जैन विश्व भारती लाडनूं में आवागमन जारी है तथा सालासर बालाजी में श्रद्धालुओं का वर्ष भर आवागमन रहता है। लेकिन, रेलवे द्वारा जैन धर्मावलंबियों व सालासर बालाजी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए किसी अतिरिक्त ट्रेन की सेवाएं प्रदान नहीं की गई हैं। जबकि, मांग इस क्षेत्र की जनता द्वारा लगातार जारी है।







