अस्पताल परिसर में सिगरेट पीना महंगा पड़ा एक पुलिसकर्मी को, मोर्चरी के बाहर खडे़ होकर हेडकांस्टेबल गोपालराम ने सिगरेट फूंकी थी, चिकित्सा विभाग ने लगाया 200 रुपए का जुर्माना

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अस्पताल परिसर में सिगरेट पीना महंगा पड़ा एक पुलिसकर्मी को,

मोर्चरी के बाहर खडे़ होकर हेडकांस्टेबल गोपालराम ने सिगरेट फूंकी थी, चिकित्सा विभाग ने लगाया 200 रुपए का जुर्माना

अशरफ खान, पत्रकार। लाडनूं ()। कानून की पालना करवाने वाले ही जब कानून का उल्लंघन करने लगे तो फिर कानून का तो कोई मतलब ही नहीं रहेगा। ऐसा ही एक मामला पुलिस विभाग का सामने आया है। इसे पुलिस विभाग ने तो नहीं, लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया और सम्बंधित पुलिसकर्मी के विरूद्ध कानूनन कार्रवाई अमल में लाई गई है। यह मामला स्थानीय राजकीय चिकित्सालय परिसर का है। इस अस्पताल परिसर में खड़े होकर सिगरेट पीना एक पुलिसकर्मी को महंगा पड़ गया। उन्हें इस धूम्रपान के लिए 200 रूपए का जुर्माना देना पड़ा है। जुर्माना चाहे दो हजार का हो या दो सौ का जुर्माना दंडस्वरूप ही होता है और एक कानून की पालना करवाने का जिम्मा लिए व्यक्ति का दंडित होना शर्मनाक कहा जा सकता है।

यह है पूरा मामला

बताया गया है कि स्थानीय राजकीय चिकित्सालय में गत 2 नवंबर को मालासी से आए एक शव का पोस्टमार्टम होना था। इस दौरान लाडनूं पुलिस थाने में तैनात हेडकांस्टेबल गोपालराम (1004) भी अपनी ड्यूटी में अस्पताल में पहुंचे। वहां मोर्चरी के बाहर खड़े-खड़े उन्होंने गुटखा व धूम्रपान किया। इस बारे में लोगों ने अस्पताल के पीएमओं डॉ. चेनाराम चैधरी को शिाकायत की तथा सोशल मीडिया पर भी उनके द्वारा मोर्चरी के समक्ष खड़े होकर धूम्रपान करते हुए के फोटो वायरल हो गए। इसे गंभीरता से लेते हुए डा. चैधरी ने इस अपराध के लिए हेड कांस्टेबल गोपाल राम पर सिगरेट एंव अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा)- 2003 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए 200 रूपयों का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के राज्य तम्बाकूू नियंत्रण प्रकोष्ठ के द्वारा की जाकर गोपाल राम को दंडित किया गया है। गौरतलब है कि गोपालराम का स्थानान्तरण गत फरवरी माह में तत्कालीन एसपी जय यादव ने प्रशासनिक कारणों से लाडनूं पुलिस थाने से हटाया जाकर मकराना पुलिस थाने में कर दिया गया था, लेकिन उसकी कोई पालना नहीं की गई और अभी तक उन्हें लाडनूं पुलिस थाने से रिलीव तक नहीं किया गया है।

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Author: kalamkala

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