लाडनूं के एक होटल पर रात को खाना खाने आई युवतियों से छेड़छाड़ और पति व भाई के साथ मारपीट,
स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठ कर पी रहे थे शराब, फिर खुलेआम की बदमाशी
लाडनूं (kalamkala.in)। यहां गुंडागर्दी सिर चढ़ कर बोलने लगी है। शहर के बीच से निकलने वाली हाईवे पर स्थित खाने की होटल में भोजन कर रहे एक परिवार के साथ हुई वारदात इसका साक्षात उदाहरण है। गत रात्रि इस हाईवे पर होटल में भोजन करके निकल रहे एक परिवार में दो युवतियां, एक बच्चा, उनका भाई, पति आदि के साथ होने के बावजूद कुछ बदमाशों ने उनके साथ छेड़खानी की और आपत्ति करने पर उन सबके साथ मारपीट करने पर उतारू हो गए। वहां पुलिस के पहुंचने पर वे बदमाश अपनी गाड़ी लेकर वहां से फरार हो गए। उनकी रिपोर्ट लाडनूं पुलिस थाने को दी गई है, जिसे दर्ज किया जाकर पुलिस बदमाशों का पता लगाने में जुटी है। यह रिपोर्ट दामोदर सैनी पुत्र रामनिवास सैनी ने पुलिस को दी। उसने पुलिस को बताया कि उसके बहन व बहनोई जयपुर से आए थे, उनको खाना खिलाने के लिए मिलन होटल पर लेकर गए, जहां खाना खाने के बाद 1 सितम्बर रात को 11.30 बजे वे बाहर निकल रहे थे, तो एक सफेद कलर की स्कॉर्पियो गाड़ी में अभय, प्रदीप, सहदेव, बलराज, मंगल एवं कुछ अन्य लड़के दारू पी रहे थे। उन्होंने उसके बहन व बहनोई के साथ गाली-गलौच करने लगे व उसके साथ भी मारपीट करने लगे। वे उसकी बहन के साथ छेड़खानी भी करने लगे। फिर तभी पुलिस ही गाड़ी आ गई। पुलिस को देख कर वे उनके रोकने पर भी नहीं रुके और अपनी गाड़ी लेकर भाग गए। वे सभी 10-12 लड़के थे। उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाए। दामोदर ने बताया कि उसकी 2 बहनें, उनके साथ एक साल की बच्ची, बहनोई आदि सब जयपुर से आये थे, और खाना खाने के लिए हाईवे पर ही एक होटल पर रुके थे। वहां एक सफ़ेद कलर की स्कार्पियो में अभय, सहदेव, प्रदीप व 2-3 अन्य सभी शराब पी रहे थे। फिर गाड़ी से उतर कर उसकी बहनों को छेड़ा। उनका विरोध करने पर उन्होंने उसके साथ मारपीट की। तत्पश्चात पुलिस वाहन के आने पर वे सभी लड़के वहां से फरार हो गए। पुलिस ने यह मामला धारा 115 (2), 126 (2), 74, 189 (2) भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज किया है। मामले की जांच हेड कांस्टेबल अनिल कुमार कर रहे हैं।
इस बिंदु पर गौर जरूरी
यहां यह महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय ध्यानाकर्षण रहेगा कि लाडनूं के सभी हाईवे पर होटलें देर रात तक खुली रहती है। इस कारण बदमाश लोगों को उनका सहारा मिल जाता है। अगर सभी होटलें रात 10 या 11 बजे बाद अनिवार्य रूप से बंद कर दी जाए तो बहुत सारे अपराधों पर स्वत: ही अंकुश कायम है सकेगा। देर रात को शराब के ठेके बंद हो जाते हैं, तो लोगों को आखिर शराब मिल कहां से जाती है। यह माना जा सकता है कि अनेक होटल वाले चोरी-छिपे शराब को अपने पास रखते हैं और रात को खुलेआम उसकी कालाबाजारी करते हैं। सभी होटलों की समय-समय पर पुलिस को जांच पड़ताल करते रहना चाहिए। देर रात को होटलों को खुला रखने पर भी पाबंदी जरूरी है।







One Response
बिलकुल सही टिप्पणी की. रात 11बजे तक सारे होटल बंद होने से कुछ हद तक लाडनूं की शांति बनी रहेगी.