देश भर के सम्पूर्ण समाज में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए मारवाड़ी समाज ने कसी कमर,
अखिल भारतवर्षीय मारवाडी सम्मेलन द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला ‘मंथन’ की सामाजिक जागरण हेतु राष्ट्रीय चिन्तन’ बैठक का आयोजन, 11 प्रस्ताव किए पारित




लाडनूं (kalamkala.in)। अखिल भारतवर्षीय मारवाड़ी सम्मेलन की यहां जैन विश्व भारती में सर्व समाज की बैठक के रूप में दो दिवसीय कार्यशाला ‘मंथन’ के रूप में सामाजिक जागरण हेतु राष्ट्रीय चिन्तन का आयोजन आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में किया गया। चिंतन बैठक की अध्यक्षता करते हुए मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका ने कहा कि मारवाड़ी समाज के सभी वर्गों को मिलकर समाज सेवा, समाज सुधार और समाज कल्याण के कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल क्षेत्र के साथ आज मारवाड़ी सम्मेलन ने पूरे देश में अपने पांव पसारे हैं और सेवा के हर क्षेत्र में काम किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मारवाड़ी सम्मेलन में 50 हजार परिवार सदस्य के रूप में जुड़े हुए हैं। व्यवसायी, उद्योगपति, प्रोफेशनल्स आदि सभी सम्मेलन के साथ हैं और सम्मेलन के विभिन्न प्रकल्पों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
बच्चों के चरित्र निर्माण, महिलाओं व युवाओं की सहभागिता बढाने पर जोर
राष्ट्रीय अध्यक्ष गोयनका ने बताया कि इस चिंतन बैठक में सामाजिक जागरण को लेकर कुल 11 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें बच्चों में संस्कार का बीजारोपण के सम्बन्ध में लिए गए प्रस्ताव में बताया गया है कि बच्चों के चरित्र निर्माण के लिए बचपन से ही उनमें नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक मर्यादाओं का बीजारोपण किया जाना अनिवार्य है, ताकि एक संस्कारवान एवं सशक्त समाज की नींव रखी जा सके। इसी तरह महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने पर जोर देने के प्रस्ताव में लिया गया कि समाज की सर्वांगीण उन्नति के लिए महिलाओं को स्वावलंबन के लिए समान अवसर प्रदान करना एवं उनकी सांगठनिक व सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित करना भी मारवाड़ी सम्मेलन का संकल्प रहेगा। इसके साथ ही युवा शक्ति की सहभागिता बढ़ाने पर जोर देते हुए पारित प्रस्ताव में राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण के लिए युवाओं की ऊर्जा को संगठनात्मक गतिविधियों से जोड़ना और उन्हें नेतृत्व के आधुनिक अवसर प्रदान कर सशक्त बनाने का संकल्प भी अभिव्यक्त किया गया है।
मायड़ भाषा, संस्कृति और त्यौहारों की परम्परा के संवर्धन पर दिया गया जोर
मारवाड़ी सम्मेलन की चिंतन बैठक में भारतीय त्यौहारों को मनाने पर जोर दिया गया। बैठक में प्रस्ताव लिया गया कि पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच अपनी समृद्ध विरासत को सहेजने के लिए भारतीय त्यौहारों को उनके पारंपरिक स्वरूप और सामाजिक उल्लास के साथ मनाना सबको अपना मुख्य ध्येय बना कर रखना है। साथ ही मायड़ भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रस्ताव लिया गया कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने के लिए मायड़ भाषा मारवाड़ी के संरक्षण, गौरव और दैनिक व्यवहार में इसके अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने को मारवाड़ियों के परम कर्तव्य के रूप में माना गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय एकता एवं विकसित भारत का संकल्प भी पारित किया गया। इस प्रस्ताव में देश की अखंडता हेतु राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने और अपनी उद्यमिता व समर्पण के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने को भी सम्मेलन का परम संकल्प बताया गया है।संस्कार-संस्कृति-चेतना एवं समाज सुधार के लिए पारित प्रस्ताव में बताया गया है कि नैतिक संस्कारों के माध्यम से अपनी विलुप्त होती संस्कृति को पुनर्जीवित करना और समाज में वैचारिक चेतना जागृत कर एक आदर्श जीवन शैली को अपनाना हमारा मुख्य ध्येय है’ एवं ‘समाज में व्याप्त कुरीतियों को त्यागकर सादगी अपनाना और प्रगतिशील विचारों के साथ एक स्वस्थ व संस्कारित परिवेश का निर्माण करना हमारा संकल्प है।’
कॅरियर बनाने में युवाओं की मदद, मार्गदर्शन और वैवाहिक-सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन का संकल्प
अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन की चिंतन बैठक में आठवां प्रस्ताव समाज के युवाओं को अपना स्वयं का व्यापार-व्यवसाय करने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्णय से सम्बन्धित है, जिसमें तय किया गया कि मारवाड़ी समाज की पारंपरिक व्यापारिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं में उद्यमिता के प्रति रुचि जगाने और उन्हें स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन व प्रोत्साहन देने का संकल्प व्यक्त किया गया है। इसके अलावा समाज में युवा वर्ग में बढती कुरीतियों को हटाने को लेकर भी पारित किया गया। इसमें प्री-वेडिंग शूट पर अंकुश, शादी विवाह के मौके पर शराब के प्रचलन पर अंकुश/ रोक, शादी के मौके पर महिलाओं द्वारा सड़कों पर नृत्य का विरोध, महिलाओं द्वारा शादी व अन्य समारोहो में पुरुषों के बजाय महिलाओं से ही मेकअप एवं मेंहदी आदि कराने पर जोर, सही उम्र में शादी करने एवं रात के बजाय दिन में शादी करने पर जोर देना तय किया गया। साथ ही विवाह प्रकोष्ठ का गठन किया तथा टूटते रिश्तों पर विचार किया गया। प्रस्ताव लिया गया कि परिवारों में बढ़ते बिखराव को रोकने के लिए ‘विवाह प्रकोष्ठ (मैरीज सैल) का गठन करने और आपसी संवाद व परामर्श के माध्यम से टूटते रिश्तों को बचाकर सामाजिक एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लिया गया। अंतिम ग्यारहवें प्रस्ताव में सभी घटकों को मिलाकर काम करने पर जोर दिया गया। इसमें तय किया गया कि समाज के सभी वर्गों, संस्थाओं और उप-जातियों के मध्य पूर्ण समन्वय स्थापित कर सामूहिक शक्ति के साथ सामाजिक उत्थान हेतु मिलकर कार्य करना भी मारवाड़ी सम्मेलन का संकल्प रहेगा।
कमेटी बना कर की जाएगी सभी प्रस्तावों की क्रियान्विति
बैठक में पारित किए गए इन सभी 11 प्रस्तावों को लागू करने के लिए एक कमेटी का गठन करना सुनिश्चित किया गया। इस बैठक में देश भर के विभिन्न राज्यों से आए मारवाड़ी समाज की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक में अखिल भारतवर्षीय अग्रवाल सम्मेलन, जैन तेरापंथी महासभा, अखिल भारतवर्षी माहेश्वरी महासभा, विप्र फाउण्डेशन, अखिल भारतवर्षीय खण्डेवाल वैश्य महासभा, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद्, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल, वर्ल्ड ब्राह्मण, अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच, दिगम्बर जैन पंचायत, जाट समाज महासभा, स्वर्णकार समाज की सहभागिता रही। मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय पदाधिकारी और अन्य लोगों की चिंतन बैठक में पवन कुमार गोयनका, राजकुमार मिश्रा, केदारनाथ गुप्ता, बसंत सुराणा, शुभकरण बोथरा, बाबूलाल बंका, मन्नालाल बैद, पवन बंसल, अमरचंद लुंकड, विजयसिंह डागा, रमेश खटेड़, रमेशचन्द्र गुप्ता, श्रीमती कनक बरमेचा, सुरेन्द्र भट्टड़, सत्यनाराण श्रीमाली, नितेश बाजारी, सज्जन शर्मा, शरद सरावगी, राजेश सोनी, कैलाश काबरा, घासीराम भामू, अभिनन्दन नाहटा, अमरचंद लुंकड़, शुभकरण बोथरा आदि उपस्थित रहे।






