जहां काम राज्य है, वहां राम राज्य संभव नही- रामस्नेही संत अमृतरामजी महाराज,
श्यामपुरा के ग्वालिया बालाजी मंदिर में रामकथा का आयोजन, उमड़ रहे हैं श्रद्धालु



लाडनूं (kalamkala.in)। क्षेत्र के सुप्रसिद्ध ग्वालिया बालाजी हनुमान मंदिर श्यामपुरा में चल रही रामकथा आयोजन में शुक्रवार को राम-वनवास का प्रसंग का मार्मिक एवं तात्विक रूप से श्रवण कराया गया। कथावाचक पुष्कर आश्रम से समागत रामस्नेही संत श्री अमृतराम जी महाराज ने कहा कि धर्मशास्त्रों में काम, क्रोध, लोभ दुर्गुणों की की कड़ी निन्दा हुई है। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि ये नरक के दरवाजे हैं। इन अवगुणों से मानव को कष्ट मिलता है। किंतु क्रोधी, कामी, लोभी भगवान को प्रिय नहीं है, ऐसा भी नही है। त्रेता युग में राम ने कहा कि जिस व्यक्ति का मन अंतःकरण पवित्र होता है, वह व्यक्ति मेरे पास आ सकता है। ‘निर्मल मन जन सो मोहि पावा’। जिस मनुष्य में छल-कपट है, वह भगवत् प्राप्ति नहीं कर सकता। उन्होंने अयोध्याकांड के प्रसंग में कहा कि कैकयी मंथरा से प्रेरित होकर कोप भवन में जाती है। मंथरा मानस में लोभ का प्रतीक है। दशरथ जी वहां पर आते हैं, तो मंथरा को पूछा कि कैकयी कहां है, तब मंथरा ने बताया कि महारानी कोप भवन में हैं, तो दशरथ जी वहीं रुक गए। उनकी कैकेयी के प्रति आसक्ति ही वह कारण था कि इतने बलवान होने के बावजूद राजा दशरथ वहीं रुक जाते हैं। दशरथ मोह के प्रतीक है। जहां काम-क्रोध लोभ तीनों एक जगह पर आ जाए, वहां रामराज्य होना सम्भव नहीं होता। क्योंकि, जैसे जहां जब दिवस है वहां तब रात्री होना सम्भव नहीं होता। कथा में बड़ी संख्या में भक्त व श्रद्धालुजन उमड़ रहे हैं। शुक्रवार को कथा में लाडनूं से रामकुमार तिवाड़ी, अनूप तिवाड़ी, सुरेश शर्मा (बल्दू), हरनाथ पूनिया, पंडित उमाकांत शर्मा, पं. गोपाल शर्मा आदि प्रमुख लोग भी उपस्थित रहे।






