‘छोटे संकल्प-बड़ी दिशा’ के संदेश के साथ मनाया व्रत चेतना दिवस
कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़ ने शिक्षकों व विद्यार्थियों के साथ लिये संकल्प

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान में कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के संरक्षण तथा मार्गदर्शन में चल रहे पर्युषण महापर्व 2026 के अन्तर्गत अहिंसा एवं शांति विभाग के तत्वावधान में आयोजित विशेष व्याख्यान श्रृंखला के पांचवें दिन ‘व्रत चेतना दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को अणुव्रत, संकल्प, संयम तथा आत्मानुशासन के प्रति जागरूक करना रहा। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बी.आर. दूगड़ ने भी शिक्षकों व विद्यार्थियों के साथ मिलकर संकल्प ग्रहण किए। कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवाड़ी ने अणुव्रत आंदोलन एवं अणुव्रत चेतना के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि अणुव्रत आंदोलन का शुभारंभ आचार्य तुलसी ने किया था, जिसका उद्देश्य व्यक्ति के नैतिक एवं चारित्रिक विकास के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना था। उन्होंने कहा कि अणुव्रत एवं चेतना अच्छा मनुष्य बनने के महत्वपूर्ण आधार हैं। जीवन में लिए गए छोटे-छोटे संकल्प व्यक्ति की जीवन-दिशा एवं दशा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा छोटे-छोटे व्रत एवं जागरूकता मनुष्य में सद्गुणों का निर्माण करते हैं। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य एवं विभाग के सह-आचार्य डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़ ने विद्यार्थी जीवन में व्रत एवं संकल्प के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अणुव्रत एवं संकल्प विद्यार्थी के जीवन में अनुशासन का निर्माण करते हैं। विद्यार्थी नियमित रूप से अध्ययन करने, अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहने तथा जीवन में सकारात्मक आदतों को अपनाने का संकल्प ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि व्रत एवं चेतना के माध्यम से इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हुए संयमित एवं अनुशासित जीवन जिया जा सकता है।
कार्यक्रम का आरंभ रक्षिता एवं समूह द्वारा ‘संयम मय जीवन हो’ अणुव्रत गीत के सामूहिक संगान से हुआ। अंत में अहिंसा एवं शांति विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. वंदना कुंडलिया ने अणुव्रत के विभिन्न नियमों का संकल्प दिलाया तथा संयम, अनुशासन एवं नैतिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता का आह्वान किया।कार्यक्रम का संचालन विभाग की सहायक आचार्य डॉ. लिपि जैन ने किया। इस अवसर पर संस्थान के ओएसडी प्रो.अशोक जैतावत, प्राकृत एवं संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जिनेंद्र कुमार जैन, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन, जैन एवं तुलनात्मक धर्म तथा दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रामदेव साहू आदि के साथ सभी विभागों के संकाय सदस्यों सहित करीब 255 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की आयोजना में विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बलबीर सिंह, डॉ. रवीना टैगोर एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भूमिका रही।


