जन सुनवाई में पीडितों ने बताई अपनी पीडा, अपनी जुबानी
जयपुर। दलित अधिकार केन्द्र राजस्थान द्वारा दलित व महिला अत्याचारों को लेकर राज्य स्तरीय जन सुनवाई का किया गया। जन सुनवाई में दलित अत्याचार उत्पीडन, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, पोक्सों प्रकरण, हत्या, भूमि विवाद आदि गम्भीर प्रकरणों को अजमेर, भरतपुर, अलवर, दौसा, करौली, टोंक, जिलों से आये पीडितों ने जूरी सदस्यों के सामने अपनी पीडा व्यक्त की।
ये थे जूरी सदस्य
जूरी सदस्यों के रूप में आर.के.आंकोदिया, पूर्व जिला सत्र न्यायाधीश, (रिटायर्ड) व सदस्य, राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग, उदयचन्द बारूपाल, पूर्व जिला सत्र न्यायाधीश (रिटायर्ड), अनिल गोठवाल, अति. पुलिस अधीक्षक, (रिटायर्ड) सचिव, डॉ.बी.आर. अम्बेडकर मेमोरियल वैलफेयर सोसायटी, झालाना डूंगरी, जयपुर, सवाई सिंह, अध्यक्ष, राजस्थान समग्र सेवा संघ, जयपुर, श्रीमती सुशीला नागर, पूर्व न्यायाधीश, जयपुर, श्रीमती दमयंन्ती बांकोलिया, पूर्व सदस्य, राजसथान राज्य महिला आयोग, जयपुर, पी. एल.मीमरौठ, एडवोकेट, मुख्यकार्यकारी, दलित अधिकार केन्द्र जयपुर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
दलित अधिकार केन्द्र के निदेशक सतीश कुमार एडवोकेट ने सभी जूरी सदस्यों का परिचय दिया व कहा कि जूरी सदस्यों के दिये गये सुझावों को सम्बन्धित अधिकारियों को प्रेषित कर न्याय दिलाने का प्रयास किया जायेगा।
दलित अधिकार केन्द्र के निदेशक सतीश कुमार एडवोकेट ने सभी जूरी सदस्यों का परिचय दिया व कहा कि जूरी सदस्यों के दिये गये सुझावों को सम्बन्धित अधिकारियों को प्रेषित कर न्याय दिलाने का प्रयास किया जायेगा।
जन सुनवाई के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला
दलित अधिकार केन्द्र के मुख्य कार्यकारी पी.एल.मीमरौठ ने प्रारंभ में जन सुनवाई के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि जन सुनवाई के माध्यम से पुलिस प्रशासन, पर मानसिक रूप से दबाव पडता है। पीडितों में आत्म विश्वास पैदा होता है पीडितों की समस्या मीडिया के माध्यम से उजागर होती है तो सरकार व पुलिस प्रशासन संवेदनशील होता है।
दलित अधिकार केन्द्र के मुख्य कार्यकारी पी.एल.मीमरौठ ने प्रारंभ में जन सुनवाई के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि जन सुनवाई के माध्यम से पुलिस प्रशासन, पर मानसिक रूप से दबाव पडता है। पीडितों में आत्म विश्वास पैदा होता है पीडितों की समस्या मीडिया के माध्यम से उजागर होती है तो सरकार व पुलिस प्रशासन संवेदनशील होता है।
राहुल कैन, एडवोकेट, राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान नई दिल्ली ने कहा कि एससी./एसटी एक्ट बहुत प्रभावशाली है, लेकिन इसकी पालना ईमानदारी से नही होने के कारण से हमको काफी परेशानी होती है , इस एक्ट में प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र बनाया हुआ है, लेकिन पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता के कारण दलित पीडितों को न्याय तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड रहा है।
हेमन्त मीमरौठ, एडवोकेट, राज्य समन्वयक, दलित अधिकार केन्द्र जयपुर, श्रीमती सुनीता बैरवा, एडवोकेट, जिला समन्वयक दौसा, श्रीमती इन्दिरा सोलंकी, जिला समन्वयक, अजमेर, श्री लालाराम भडाना, जिला समन्वयक, भरतपुर, श्रीमती द्रोपदी जोनवाल, जिला समन्वयक, दलित महिला मंच, राजस्थान, सुश्री खुशबू सोलंकी, समन्वयक, दलित महिला मंच, राज., मुकेश मेहरा, आदि ने प्रकरणों के प्रस्तुतीकरण में सहयोग प्रदान किया।
एडवोकेट चन्दा लाल बैरवा, सहायक निदेशक, दलित अधिकार केन्द्र जयपुर ने मंच का संचालन किया व प्रकरणों को जूरी सदस्यों के सामने प्रस्तुत किया। जन सुनवाई के अन्त में श्रीमती कश्मीरा सिंह ने सभी जूरी सदस्यों व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, एडवोकेट, संघषशील व्यक्तियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
पुत्र की हत्या करने वालों को पकड़ो
दौसा जिले के कोलवा थाना अन्तर्गत गांव से आये पीडित रामसहाय बैरवा ने अपनी पीडा व्यक्त करते हुये कहा कि मेरे इकलोते पुत्र की हत्या कर दी, लेकिन हत्यारा जमानत पर खुले आम घूम रहा है।
भतरपुर से आये 17 अभय राजोरा ने अपनी पीडा बताते हुये कहा कि मेरे 17 वर्षीय पुत्र की हत्या कर शव को पहाड पर लेजाकर फेक दिया, लेकिन आज तक आरोपी का पता नही चला।
दौसा जिले के कोलवा थाना अन्तर्गत गांव से आये पीडित रामसहाय बैरवा ने अपनी पीडा व्यक्त करते हुये कहा कि मेरे इकलोते पुत्र की हत्या कर दी, लेकिन हत्यारा जमानत पर खुले आम घूम रहा है।
भतरपुर से आये 17 अभय राजोरा ने अपनी पीडा बताते हुये कहा कि मेरे 17 वर्षीय पुत्र की हत्या कर शव को पहाड पर लेजाकर फेक दिया, लेकिन आज तक आरोपी का पता नही चला।
करौली जिले से आये लक्की बैरवा ने बताया कि आरोपी ने मेरी जमीन पर कब्जा कर लिया, जिससे पीडित को भारी समस्या का सामना करना पड रहा है।
भरतपुर से आये प्रेमचन्द वाल्मीकी ने प्राणघातक हमला कर गम्भीर रूप से घायल करने की पीडा बताई।
नाबालिग के साथ वर्षा से यौन शोषण, लेकिन न्याय नहीं
अजमेर के खवास गांव से आये दलित हीरा लाल रैगर जो मनरेगा में मेट होने के कारण जे.सी.बी. मशीन से काम करने का विरोध करने पर दलित मैट के साथ की गम्भीर मारपीट के बारे में बताया। संजय बलाई पुलिस थाना बडौदा मेव जिला अलवर जो की भोजनालय चलाता है, खाने के पैसे मांगने पर की गम्भीर मारपीट करने से अवगत करवाया।
अजमेर से आये पीडितों ने नाबालिग के साथ कई वर्षा से यौन शोषण करने व जबरन यौन शोषण करने व पुलिस प्रशासन व जांच अधिकारी द्वारा कार्यवाही नही करने के बारे में बताया। भरतपुर से आई नाबालिगब पीडिता की मां ने बताया दुष्कर्म कर हत्या करने का प्रकरण पर आज तक न्याय नही मिलने के बारे में बताया।
अजमेर के खवास गांव से आये दलित हीरा लाल रैगर जो मनरेगा में मेट होने के कारण जे.सी.बी. मशीन से काम करने का विरोध करने पर दलित मैट के साथ की गम्भीर मारपीट के बारे में बताया। संजय बलाई पुलिस थाना बडौदा मेव जिला अलवर जो की भोजनालय चलाता है, खाने के पैसे मांगने पर की गम्भीर मारपीट करने से अवगत करवाया।
अजमेर से आये पीडितों ने नाबालिग के साथ कई वर्षा से यौन शोषण करने व जबरन यौन शोषण करने व पुलिस प्रशासन व जांच अधिकारी द्वारा कार्यवाही नही करने के बारे में बताया। भरतपुर से आई नाबालिगब पीडिता की मां ने बताया दुष्कर्म कर हत्या करने का प्रकरण पर आज तक न्याय नही मिलने के बारे में बताया।
लक्की बैरवा, ग्राम सैमरदा, तहसील सपोटरा, जिला करौली, मारपीट कर भूमि पर कब्जा करने के बारे में अवगत करवाया। छोटा राजपुर, थाना राजगढ, जिला अलवर से आये छोटे लाल बैरवा ने कहा कि गांव की सार्वजनिक पानी की टंकी पर हाथ धोने पर प्राण घातक हमला करने के बारे में बताया।
जन सुनवाई में 20 प्रकरणों पर जूरी के सुझाव
इस प्रकार से जन सुनवाई में 20 प्रकरणों को जूरी के सामने रखा गया, जूरी सदस्यों ने सभी प्रकरणों को ध्यानपूर्वक सुनकर निम्न सुझाव दिये :-
1. अपराधिक गतिविधियों की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने पर पुलिस अधीक्षक व जिला कलेक्टर को अवगत करवाये व इश्तागासा के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज करवाये।
2. दलित अत्याचार के प्रकरणों में स्वतः ही विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की जावे।
3. पीडितों को मिलने वाला मुआवजा राशि समय देना सुनिश्चित किया जावे।
4. पोक्सों के प्रकरणों में शीघ्र जांच कर एक साल में निर्णय दिया जाना सुनिश्चित किया जावे।
5. जिला स्तरीय मॉनिटरिंग व सतर्कता समिति की नियमित बैठके आयोजित करना सुनिश्चित की जावे।
1. अपराधिक गतिविधियों की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने पर पुलिस अधीक्षक व जिला कलेक्टर को अवगत करवाये व इश्तागासा के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज करवाये।
2. दलित अत्याचार के प्रकरणों में स्वतः ही विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की जावे।
3. पीडितों को मिलने वाला मुआवजा राशि समय देना सुनिश्चित किया जावे।
4. पोक्सों के प्रकरणों में शीघ्र जांच कर एक साल में निर्णय दिया जाना सुनिश्चित किया जावे।
5. जिला स्तरीय मॉनिटरिंग व सतर्कता समिति की नियमित बैठके आयोजित करना सुनिश्चित की जावे।






