निर्भय और निडर होकर हमें अहिंसक नीति पर चलना चाहिए- थानाधिकारी राजेंद्र सिंह कमांडो,  अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

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लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान के अहिंसा एवं शांति विभाग द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता थानाधिकारी राजेंद्र सिंह कमांडो ने अहिंसा को हिंसा से अधिक प्रभावशाली शस्त्र और सुनिश्चित सफलता का तरीका बताया और कहा कि हमें निर्भय और निडर होकर अहिंसक नीति पर चलना चाहिए। उन्होंने जैन विश्वभारती संस्थान की इस बात के लिए सराहना की कि शांति तथा अहिंसा के क्षेत्र में शिक्षण तथा प्रशिक्षण प्रदान करके समाज में अहिंसक जीवन मूल्यों का प्रचार प्रसार करने में संस्थान अग्रणी भूमिका निभा रहा है और गांधी दर्शन तथा जैन दर्शन में समावेशित जीवन मूल्यों को केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रचारित-प्रसारित करने में योगदान प्रदान कर रहा है। अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा तिवारी ने इस अवसर पर गांधीजी तथा लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व से जुड़े कुछ प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.बीएल जैन ने कहा कि हम अहिंसा के मार्ग पर चलकर हिंसा के बढ़ते प्रभाव को सहज रूप से कम कर सकते हैं। आज भी अहिंसा का विचार प्रासंगिक है। योग और जीवन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने कहा कि योग के माध्यम से अपने पूर्वागर्हों का त्याग कर व्यक्ति अहिंसक मार्ग पर चल सकता है तथा जीवन शैली में अहिंसक प्रवृतियां कैसे अपनाई जा सकती है। छात्रा हर्षिता पारीक ने ने भी इस विषय में अपने विचार व्यक्त किए। मनीषा तुनगरिया ने कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम के प्रारम्भ में विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़ ने स्वागत वक्तव्य तथा विषय परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 2 अक्टूबर 2007 से गांधी जयंती को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाए जाने का प्रस्ताव पारित किया था और अब संपूर्ण विश्व में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन प्रस्तुत करते कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्या डॉ. लिपि जैन ने करते हुए बताया कि वर्तमान समस्याओं का निराकरण महात्मा गांधी द्वारा बताई गई संयमित जीवनशैली से ही संभव है। अंत में डॉ.बलबीर सिंह ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम में प्रो.दामोदर शास्त्री, डॉ. सत्यनारायण भारद्वाज, डॉ. विनोद कस्वां, प्रगति चोरड़िया, डा. सभयसांची सांरगी आदि के साथ संस्थान के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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