गांधी दर्शन सार्वभौमिक है और सबसे प्रासंगिक है उनका अहिंसा दर्शन- प्रो. शर्मा, गांधीजी और वैश्विक समसामयिक प्रासंगिकता पर दो दिवसीय सेमिनार आयोजित

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गांधी दर्शन सार्वभौमिक है और सबसे प्रासंगिक है उनका अहिंसा दर्शन- प्रो. शर्मा,

गांधीजी और वैश्विक समसामयिक प्रासंगिकता पर दो दिवसीय सेमिनार आयोजित

लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान में शिक्षा विभाग एवं एनएसएस के संयुक्त तत्वावधान में दो दिनो से चल रहे ‘गांधीजी और वैश्विक समसामयिक प्रासंगिकता’ विषयक सेमिनार में श्यामलाल स्नातकोत्तर महाविघालय शिकारपुर बुलन्दशहर यूपी के प्राचार्य प्रो. अशोक कुमार शर्मा ने कहा किी सांप्रदायिक कट्टरता और आतंकवाद के इस दौर में गांधीवाद तब और प्रासंगिक हो जाता है, जब सांप्रदायिक सद्भावना बनाये रखने के लिए गांधीजी के सभी धर्मो के प्रति समान आदर भाव रखने के भाव सामने आते हैं। भारत में सांप्रदायिक तनाव के शमन के प्रभावी उपाय के रूप में सर्वधर्म प्रार्थना सभा एवं प्रभात फेरी जैसे गांधीवादी तकनीक का प्रयोग सामान्य है। गांधीवाद अहिंसा और सत्याग्रह पर टिका है, जो चार उपसिद्धांतों सत्य, प्रेम, अनुशासन एवं न्याय पर आधारित है, जिनकी उपादेयता एवं प्रासंगिकता, वैश्वीकरण के वर्तमान हिंसक दौर में और बढ जाती है। वर्तमान हालात में गांधीवादी मूल्य एक प्रभावी विकल्प के रूप में दिखाई देते हैं। यह परिवर्तन, न्याय और सभी की भलाई के लिए एक शक्ति है। गांधी दर्शन की प्रासंगिकता सार्वभौमिक है, परन्तु वर्तमान में सबसे ज्यादा प्रासंगिकता अहिंसा दर्शन की है। वैश्विक जगत में बढती हिंसा, आर्थिक विषमता, बेरोजगारी, और कटुता चिंताजनक है। ऐसे में सत्य, अहिंसा, समानता, शांति व मानवीय मूल्यों को महत्व देने वाला महात्मा गांधी का दर्शन ज्यादा प्रासंगिक है। गांधी दर्शन दुनिया को शांति-सौहार्द की राह पर ले जाने में मददगार बन सकेगा। शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने कहा की गांधीजी ने दुनिया को अहिंसा के नए रूप से परिचित करवाया और इसे जीने का एक मार्ग भी बताया। वे दुनिया के सामने यह सिद्ध करने में सफल रहे कि एक सभ्य समाज के लिए संघर्ष के संकल्प की सबसे व्यावहारिक और शक्तिशाली तकनीक अहिंसा में निहित है। सेमिनार में संकाय सदस्य डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. भावाग्राही प्रधान, डॉ. अमिता जैन, डॉ. सरोज राय, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरिधारी लाल शर्मा एवं प्रमोद ओला आदि उपस्थित रहे। अंत में आभार ज्ञापन डॉ. विष्णु कुमार ने किया। दो दिनो के इस ई-सेमीनार में 270 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इससे पूर्व प्रथम दिवस जे.आर.आर. संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के निवर्तमान डीन और विभागाध्यक्ष प्रो. गोपीनाथ शर्मा और अपेक्स विश्वविद्यालय जयपुर के शिक्षा विभाग के डीन प्रो. अशोक कुमार सिडाना ने गांधीजी और वैश्विक समसामयिक प्रासंगिकता पर अपने विचार प्रस्तुत किये थे।

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Author: kalamkala

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