पाकिस्तान के अंदर घुसकर अचूक लक्ष्य साध कर पाक टैंकों को ध्वस्त करने वाले वीर यौद्धा नाथूसिंह जोधा नहीं रहे, लाडनूं तहसील के इस वीर सैनिक ने 1971 की लड़ाई में चबवाए थे पाक सेना को नाकों चने

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पाकिस्तान के अंदर घुसकर अचूक लक्ष्य साध कर पाक टैंकों को ध्वस्त करने वाले वीर यौद्धा नाथूसिंह जोधा नहीं रहे,

लाडनूं तहसील के इस वीर सैनिक ने 1971 की लड़ाई में चबवाए थे पाक सेना को नाकों चने

अंजनी कुमार सारस्वत। लाडनूं (kalamkala.in)। सन् 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर यौद्धा रहे लाडनूं क्षेत्र के हुसैनपुरा गांव के निवासी मानद कैप्टन (रिसालदार मेजर) नाथू सिंह जोधा का निधन 79 वर्ष की अवस्था में 31 मई को तड़के 3 बजे हो गया। वे पिछले 4 वर्षों से अस्वस्थ चल रहे थे। नाथूसिंह जोधा समूची लाडनूं तहसील के लिए ही नहीं पूरे राष्ट्र के लिए गौरव थे। उनकी वीरता के किस्से रोमांचित करने वाले थे। ‘कलम कला’ की ओर से उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि।

उनका सैन्य जीवन और युद्ध कौशल

नाथूसिंह जोधा का जन्म 5 फरवरी 1946 को लाडनूं तहसील के हुसैनपुरा गांव में अर्जुन सिंह जोधा एवं सुगन कंवर शेखावत के परिवार में हुआ था। 30 अगस्त 1963 को यह भारतीय सेना की आर्मर्ड कॉर्प्स में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 17 हॉर्स (पूना हॉर्स) रेजिमेंट में सवार के पद पर नियुक्त किया गया था। अपनी रेजिमेंट में सेवाएं देते हुए नाथूसिंह जोधा रिसालदार मेजर के पद तक पदोन्नत हुए और 31 मई 1992 को मानद कैप्टन के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। सन् 1971 में बसंतर के ऐतिहासिक युद्ध में नाथूसिंह एक्टिव लांस दफेदार (एएलडी) के पद पर थे और सैकिंड लेफ्टिनेंट अरूण खेत्रपाल के फामागुस्ता नाम के जेएक्स 202 सेंचुरियन टैंक के गनर थे। 16 दिसंबर 1971 को 17 हॉर्स रेजिमेंट ने पाकिस्तान में घुसकर भीषण युद्ध किया और परिस्थिति ऐसी हुई कि 17 हॉर्स के अन्य टैंक किसी न‌ किसी कारण से निष्क्रिय हो गए तो अकेला अरूण खेत्रपाल का फामागुस्ता टैंक पाकिस्तान की 13 लांसर की ए और बी स्क्वाड्रन के समक्ष अडिगता से डटा रहा। गनर नाथूसिंह के अचूक और सटीक लक्ष्यभेदन ने शत्रु के करीब 13 टैंक ध्वस्त कर दिए। टैंकों से टैंकों के इस भयानक संघर्ष में आरसीएल गोला लगने से फामागुस्ता टैंक के कमांडर सेकिंड लेफ्टिनेंट अरूण खेत्रपाल और लोडर नंद सिंह शेखावत वीरगति को प्राप्त हो गए। सेकिंड लेफ्टिनेंट अरूण खेत्रपाल को उनके अनुकरणीय नेतृत्व, अदम्य साहस और वीरता के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस युद्ध में फामागुस्ता टैंक पर आरसीएल दागने वाले पाकिस्तान की 13 लांसर के मेजर नासिर ने भी आगे चलकर कहा कि हमारे आगे बढ़ने में फामागुस्ता टैंक के साथ अरूण एक अडिग चट्टान की भांति डटे रहे। परमवीर चक्र पाने वाले अरुण क्षेत्रपाल के टैंक गनर मानद कैप्टन (रिसालदार मेजर) नाथू सिंह जोधा ‘मैंशन-इन-डिसपैच’ 17 हॉर्स (पूना हॉर्स) रेजिमेंट के थे। इससे उनकी महत्ता को आंका जा सकता है। हालांकि लाडनूं सुजानगढ़ क्षेत्र में उनके इन वीरतापूर्ण कार्य, अदम्य साहस और भारत-पाक युद्ध की भूमिका को लोगों ने याद नहीं रखा और उन्हें एक गुमनाम वीर की तरह रहना पड़ा। पर अब उनके देहावसान पर उनके जीवन और कृतित्व को सबके सामने रखा जाना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनसे प्रेरणा मिलती रहे।

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Author: kalamkala

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