सुप्रसिद्ध लेखक प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी की 65वीं पुस्तक ‘अभिशप्त बेटी’ का समारोहपूर्वक हुआ विमोचन, परम्पराओं की निरर्थकता, सामाजिक सम्बन्धों के उलझाव, लोक व्यवहार में विसंगतियों आदि को उजागर करती है यह कृति

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सुप्रसिद्ध लेखक प्रो. आनंदप्रकाश त्रिपाठी की 65वीं पुस्तक ‘अभिशप्त बेटी’ का समारोहपूर्वक हुआ विमोचन,

परम्पराओं की निरर्थकता, सामाजिक सम्बन्धों के उलझाव, लोक व्यवहार में विसंगतियों आदि को उजागर करती है यह कृति

लाडनूं (kalamkala.in)। सुप्रसिद्ध लेखक तथा जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय के दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केन्द्र के निदेशक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी की 65वीं प्रकाशित पुस्तक ‘अभिशप्त बेटी’ का विमोचन यहां समारोह पूर्वक किया गया। पुस्तक विमोचन विश्वविद्यालय के वित्ताधिकारी राकेश जैन की अध्यक्षता में रजिस्ट्रार राजेश मौजा, डिप्टी रजिस्ट्रार अभिनव सक्सेना, परीक्षा नियंत्रक प्रखर तिवारी व जन सम्पर्क अधिकारी जगदीश यायावर ने किया। पुस्तक विमोचन से पूर्व जगदीश यायावर ने लेखक परिचय व पुस्तक की विषयवस्तु की जानकारी प्रस्तुत करते हुए प्रो. त्रिपाठी द्वारा अब तक लिखित वैविध्यपूर्ण पुस्तकों के बारे बताया और कहा कि दर्शन जैसे जटिल व नीरस कहे जाने वाले गूढ़ विषय से लेकर लघुकथाओं के सरस लेखन और बाल साहित्य की संरचना में एक साथ सिद्धहस्त होना विलक्षण है। पुस्तक लेखक प्रो. आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने इस अवसर पर अपनी नव प्रकाशित पुस्तक ‘अभिशप्त बेटी’ की 100 लघुकथाओं की जानकारी दी और बताया कि छोटी-छोटी प्रेरणादाई कथाएं व्यक्ति को केवल प्रेरित ही नहीं करती बल्कि कहीं-कहीं झकझोरती भी है। ये कतिपय परम्पराओं की निरर्थकता, सामाजिक सम्बन्धों के उलझाव, लोक व्यवहार में विसंगतियों आदि को भी इंगित करते हुए सुधार की भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। पुस्तक विमोचन के इस अवसर पर डा. जेपी सिंह, डा. आयुषी शर्मा, प्रगति चौरड़िया, ओमप्रकाश सारण, अंजुला जैन, दिव्या राठौड़ देवातु, केलम देवी डेह, नेमीचंद कानूंता, रीना गोयल जयपुर, सीताराम सैनी मुकुंदगढ, रमाशंकर ओझा पटना, जसवंतसिंह नागौर, बजरंगपुरी डेह, नवीन कुमार नोहर, जर्नादन शर्मा खाटु श्यामजी, महबूब तेली कुचेरा, शंकरलाल सैनी चूरू, सीताराम भादू झड़ीसरा, मुक्तिलाल अग्रवाल नवलगढ, भवरसिंह बीदावत लाडनूं, रवि कुमार नागौर आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पंकज भटनागर ने किया।

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Author: kalamkala

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