बच्छ-बारस पर की गाय व बछड़े की पूजा की व गौमाता की कथा सुनी

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मूण्डवा (रिपोर्टर लाडमोहम्मद खोखर)। कस्बे में महिलाओं ने गाय व बछड़े का पूजन कर बच्छ-बारस का पर्व मनाया। महिलाओं ने इस अवसर पर उपवास रख कर गोमाता की कथा का श्रवण किया तथा गोमाता को गुड-बाजरी खिलाकर व श्रीफल चढ़ाकर पूजा की और गोमाता की परिक्रमा कर परिवार के लिए मंगल कामना की। साथ ही सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना की। इसके साथ ही महिलाओं ने भगवान इंद्रदेव से बारिश होने की कामना भी की तथा गोमाता से आशीर्वाद लिया। यहां स्टेशन रोड स्थित हनुमानजी के चबूतरे के समीप महिलाओं ने सवेरे विधि-विधान व मंत्रोच्चार के साथ मंगल गीत गाते हुए गोमाता व बछड़े की पूजा की तथा गाय को चुनरी ओढ़ाई। इस हनुमान-चबूतरे के समीप हुए कार्यक्रम के दौरान वार्ड नंबर 8 की पार्षद आशा शर्मा ने भी अपने पुत्र के तिलक लगाकर लड्डू खिलाया एवं बच्छ-बारस की कथा का श्रवण किया। मान्यता है कि बच्छ बारस पर गाय व बछड़े का पूजन करने वाली महिलाएं चाकू से कटा हुआ कोई भी व्यंजन जैसे सब्जी, फल इत्यादि का सेवन नहीं करती है। इस दिन घरों में गेहूं की रोटी, गाय का दूध, दही, घी इत्यादि का भी सेवन नहीं किया जाता। महिलाएं घर में मोठ की सब्जी, कड़ी, बाजरे की रोटी इत्यादि बनाती है। इस अवसर पर महिलाओं ने व्यास परिवार की महिलाओं से बच्छ-बारस की कहानी सुनी व अपने पुत्रों के सिर पर तिलक लगाकर लड्डू खिलाया।


चाकू का काटा भोजन नहीं बनाया
मधुबाला पाराशर ने बताया कि इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र की कामना करती हैं। बछड़े वाली गाय की पूजा कर घरों में कहानियां सुनी गईं, फिर बच्चों की माताओं ने नेग (रूपये) तथा श्रीफल का गोला (खोपरा) दिया। माताओं ने बच्चों को स्कूल व कार्यालय जाने से पूर्व तिलक लगाकर खोपरा झेलाया। पुत्रों ने भी माताओं के चरण-स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। घरों में चाक़ू का काटा भोजन नहीं बनाया गया। इस दिन मक्का की रोटी, चने, मूंग, कढ़ी आदि बनाये गए। माताओं ने व्रत भी रखे। इस मौके संतोष पाराशर, मधुबाला पाराशर, मोहिनी पाराशर, रीचा पाराशर, मोना पाराशर समेत महिलाएं मौजूद रही।

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Author: kalamkala

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