अकेला ही चला था जानिबे मंजिल, मगर लोग मिलते गए, कारवां बनता गया
लाडनूं। लम्बे समय से लाडनूं और आसपास के क्षेत्र में रेल सुविधाओं के सम्बंध में प्रयासरत समाजसेवी प्रभात वर्मा ने बताया कि पिछले करीब एक साल से वे लाडनूं के रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट लगाने की योजना को लेकर पत्र-व्यवहार शुरू किया था और आज उनके साथ बड़ी संख्या में लोग और जन-प्रतिनिधिगण जुड़ चुके हैं और उनकी यह मांग आज जनता की आवाज बन चुकी है। संभावना है कि रेलवे शीघ्र ही इसकी तरफ ध्यान देगी और इसकी स्वीकृति के लिए कार्य शुरू करवाएगी। वर्मा ने बताया कि उन्होंने गत वर्ष 25 जुलाई को सांसद हनुमान बेनिवाल को भी रजिस्टर्ड पत्र लिखा और फिर लगातार ईमेल भेजे गए। इसके बाद गत वर्ष नवम्बर और इस साल फरवरी माह में फिर एक अभियान चलाया, जिसमें लाडनूं के पार्षदों का पूरा सहयोग मिला। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने लाडनूं में लिफ्ट की मांग उठाई थी, तब कुछ कलकत्ता व डीडवाना में बैठे लोगों ने उनका मजाक बनाया था। लेकिन जब वे मांग पर अडिग रहे। अब तो सांसद ने इस मांग पर संज्ञान लेते हुए इस मुद्दे को गत 15 दिसम्बर को लोकसभा में भी उठाया। इधर रेलवे ने प्रभात वर्मा की मांग के जबाब मे 8 दिसम्बर को अनुकूल जवाब देकर आशा की किरण जगाई है। वर्मा ने बताया कि अब उनका प्रयास है कि इस मैटर में थोड़ा और प्रयास किया जाए और सांसद, विधायक वगैरह जन प्रतिनिधियों का सहयोग मिले, तो कार्य कोई असंभव नहीं है, क्योंकि लाडनूं एनएसजी-5 श्रेणी का स्टेशन है। वर्मा ने आशान्वित होकर बताया कि लिफ्ट कार्य के लिए कभी वे अकेले थे और आज उनके साथ कारवां जुड़ चुका है। रेलवे के कार्य होने में 4-5 साल का समय लगता ही है, लेकिन सभी काम धरे-धीरे और समय लगने पर हो जाएंगे।
रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट क्यों
गौरतलब है कि भारतीय रेलवे समय-समय पर यात्रियों की सुविधा के लिए बदलाव करती रहती है। इन बदलावों से यात्रियों की यात्रा सुगम होती है। इसी के चलते भारतीय रेलवे एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म में जाने की सुविधा के लिए प्रमुख स्टेशनों पर एक्सलेटर और लिफ्ट लागाने का फैसला करती है। भारतीय रेलवे के इस कदम से बच्चों बुजुर्गां, दिव्यांगों सहित महिलाओं को काफी राहत मिलेगी। स्टेशनों पर लिफ्ट की सुविधा मिलने से स्टेशनों पर आने वाले यात्रियों को काफी सहूलियत होगी।







