विचारों से सहमत नहीं होने पर भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी- प्रो. त्रिपाठी, हिन्दी वाद-विवाद प्रतियोगिता में मीनाक्षी बाफना प्रथम व प्रकृति चौधरी द्वितीय रही

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विचारों से सहमत नहीं होने पर भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी- प्रो. त्रिपाठी,

हिन्दी वाद-विवाद प्रतियोगिता में मीनाक्षी बाफना प्रथम व प्रकृति चौधरी द्वितीय रही

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान के आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के अंतर्गत संचालित विवेकानंद क्लब के तत्वावधान में एक अंतर्संकाय हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के विषय ‘सदन की राय में परीक्षा में प्राप्त अंक ही सफलता का मापदंड है’ पर छात्राओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। प्रतियोगिता प्राचार्य प्रोफेसर आनंदप्रकाश त्रिपाठी की अध्यक्षता में रखी गई और मुख्य अतिथि अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. रेखा तिवाड़ी थी। प्रतियोगिता में कुल 31 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से मीनाक्षी बाफना प्रथम रही, प्रकृति चौधरी द्वितीय एवं कान्ता सोनी तृतीय स्थान पर रही। इन तीनों को पुरस्कृत किए जाने के अलावा इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी छात्राओं को भी स्वामी विवेकानंद क्लब की ओर से प्रोत्साहन पुरस्कार दिए गये। प्रतियोगिता की निर्णायक विवेकानंद क्लब की पूर्व छात्राओं जीनत, खुशी जोधा एवं मेहनाज बानो रहीं।

अपना मस्तिष्क सतत जागरूक रखें

इस अवसर पर अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि समय-समय पर आयोजित होने वाली वाद-विवाद प्रतियोगिताएं संभागियों के साथ ही साथ सुधी श्रोताओं में भी वैचारिक संपन्नता को बढ़ाती हैं। हम भले ही किसी के विचारों से सहमत ना हो सकें, लेकिन सभी के लिए विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं दूसरे के विचारों के प्रति आदरभाव को हमें सदैव सर्वोपरि रखना चाहिए। उन्होंने सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक विचारों की उधेड़बुन के बीच विद्यार्थी को अपना मस्तिष्क सदैव सजग रखना चाहिए। प्रतियोगिता का संचालन समन्वयक एवं विवेकानंद क्लब प्रभारी अभिषेक चारण ने किया।

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Author: kalamkala

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