हजरत अली का जीवन, दर्शन और विचार आज भी समय की जरुरत है- मौलाना नईमी

हजरत इमाम हुसैन की याद में प्रोग्राम

मूण्डवा (रिपोर्टर लाडमोहम्मद खोखर)। शहरी गली, पार्क के पास मूण्डवा में ईशा की नमाज के बाद पैगम्बर हजरत मुहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शहीद-ए-कर्बला कॉन्फ्रेस का आयोजन किया गया। महफिल की शुरुआत मदीना मस्जिद के मौलाना रईस अहमद ने कुरान शरीफ की तिलावत से हुई। मौलाना मुफ्ती हम्माद रजा नईमी मुरादाबाद यूपी ने सय्यदा जैनब की जिंदगी और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने सय्यदा जैनब की जिंदगी औरतों और बच्चियों के लिए मिसाली जिंदगी बताया। घर मे बहिन और बेटी का मुकाम सबसे बढकर है। इस्लाम की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार में हज़रत अली का अहम योगदान रहा। यही वजह है कि हजरत अली का जीवन, उनके दर्शन और विचार आज के समय की जरुरत है।
इमाम हुसैन की जिंदगी पर रोशनी डाली
महफ़िल-ए-मिलाद में उपस्थित स्थानीय शायरों ने हज़रत अली की शान में अपना कलाम पेश किया, जिसमें इमाम हुसैन की जिंदगी पर रोशनी डाली गई। मौलाना ने तकरीर के दौरान कहा कि हमें इस्लाम हजरते हुसैन की शहादत से मिला हैं। उन्हें कभी भुलाया नही जा सकता हैं। उन्होंने अपने बेहतर जा निशारो की कुर्बानी देकर इस्लाम की रक्षा की थी। खुसूसी नात खां जनाब सलमान रजा अशरफी भिवंडी मुंबई ने कहा कि इस्लाम सादगी और प्रेम-भाईचारे से रहना का पैगाम देता हैं। हर मुस्लिम को इसका अनुसरण करना चाहिए। “वो मोहम्मद का प्यारा नवसा, जिसने सजदे में सर कटा ली” नात-ए-पाक सुनाकर लोगों को सुभानाल्लाह कहने को मजबूर कर दिया।
इन सब मौलानाओं की रही शिरकत
प्रोग्राम मे खुसूसी नात खां जनाब सलमान रजा अशरफी भिवंडी मुंबई, खुसूसी मुकरीर हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ्ती हम्माद रजा साहब नईमी मुरादाबाद यू.पी., मेहमाने खुसूसी सय्यद हातिम शाह चिश्ती बीकानेर, मेहमान तसरीफ लाये। मिलाद ए पाक में शायर हजरत ईमाम हुसैन, कर्बला से संबंधित नातिया कलाम पेश किया। इसके अलावा उलेमा हजरत ईमाम हुसैन की जीवनी पर प्रकाश डाला। रौनक-ए-स्टेज मौलाना क़ारी रईस अहमद साहब, खतीबो इमाम मदीना मस्जिद मूंडवा, मौलाना हाफिज अब्दुल सत्तार साहब खतीबो इमाम फैजाने रज़ा मस्जिद मूंडवा, मौलाना असरारूल हक साहब खतीबो इमाम जामा मस्जिद मूंडवा, मौलाना सोराब आलम साहब खतीबो इमाम नूरी मस्जिद मूंडवा, मौलाना नईम अख्तर साहब, खतीबो इमाम गरीब नवाज मदरसा, मौलाना हबीबुल्लाह खतीबो ईमाम मदरसा गोसियाह व तमाम जुमला ओलमाऐ किराम व समाज के लोग मौजूद रहे।







