- लाडनूं में 432 तपस्वियों ने किया वर्षीतप का पारणा, आचार्य श्री महाश्रमण ने ईक्षु-रस से सम्पन्न करवाया उपवास, हुई जैन दीक्षा की घोषणा








लाडनूं (kalamkala.in)। तेरापंथ धर्मसंघ के अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में लाडनूं में सोमवार को ‘अक्षय तृतीया वर्षीतप पारणा महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अक्षय तृतीया कार्यक्रम में 54 साधु-साध्वियों, 7 समणियों एवं 371 गृहस्थ तपस्वियों ने वर्षीतप का पारणा ईक्षु-रस ग्रहण करके किया। इनमें सर्वाधिक 47 वर्षीतप करके तेरापंथ धर्मसंघ इतिहास में सर्वाधिक वर्षीतप का रिकॉर्ड बनाने वाले उग्रविहारी तपोमूर्ति मुनिश्री कमलकुमार भी शामिल हैं। इसी प्रकार मुनिश्री राजकुमार ने 38 वर्षीतप पूर्ण किए हैं। इस प्रकार यह अक्षय तृतीया इस योगक्षेम वर्ष की सबसे बड़ी उपलब्धि बन गई, जिसमें 432 तपस्वियों ने एक साथ वर्षीय तप का पारणा आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में ईक्षु-रस बहराकर किया। योगक्षेम वर्ष में लाडनूं में आचार्यश्री महाश्रमण के सान्निध्य में पहली बार एक साथ 54 साधु-साध्वियों ने वर्षीतप का सामूहिक पारणा किया है।
लगातार चल रही है तीर्थंकर ऋषभदेव की परम्परा
प्रथम तीर्थंकर भगवान श्री ऋषभ के तेरह मासिक अखंड उपवास (तेरह महीने तक लगातार उपवास) वर्षीतप का अनुसरण करते हुए आज भी जैन समाज में अनेक साधु-साध्वियां, श्रावक-श्राविकाएं (एक दिन उपवास और एक दिन भोजन ग्रहण करते हैं) भी वर्षीतप साधना को निरन्तर करते आ रहे हैं। लाडनूं में भी यह ‘योगक्षेम’ वर्ष के दौरान और आचार्य श्री महाश्रमण के सान्निध्य में यह एक ऐतिहासिक घटना घटित होना माना जा रहा है, जिसमें पहली बार 54 मुनियों और साध्वियों ने सामूहिक रूप से अपने ‘वर्षीतप’ (वर्ष भर चलने वाली तपस्या) का पारणा (तपस्या की समाप्ति का अनुष्ठान) किया। इनके साथ ही 7 समणियों और 371 श्रावकों ने भी गन्ने का रस (इक्षुरस) ग्रहण कर अपना उपवास तोड़ा।
जैन दीक्षा की घोषणा
इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण ने दीक्षा की घोषणा भी की। इस अक्षय तृतीया महोत्सव के अवसर आचार्य श्री महाश्रमण ने मुमुक्षु कोमल को आगामी भाद्रव शुक्ला 9 (20 सितम्बर) को आयोज्य ‘विकास महोत्सव’ के अवसर पर साध्वी दीक्षा प्रदान करने की घोषणा की है।
बारह महीना और चालीस दिन का वर्षीतप था भगवान ऋषभदेव का
आचार्यश्री महाश्रमण ने इस अवसर पर कहा कि ज्ञान से जीव भावों को जानता है। दर्शन के माध्यम से श्रद्धा करता है, चारित्र से निग्रह और तप से विशुद्धि करता है। मोक्ष मार्ग इन चारों का समवाय है। आज अक्षय तृतीया समारोह एक तप की परिसम्पन्नता के साथ जुड़ा हुआ है। आज के ही दिन जैन शासन के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के तप की सम्पन्नता हुई थी। वे इस अवसर्पिणी काल के प्रथम तीर्थंकर हुए। धर्म की दृष्टि से तीर्थंकर का पद सर्वोच्च होता है। भौतिक दुनिया में चक्रवर्ती भी सबसे बड़े होते हैं। भगवान ऋषभ दोनों ही बने। भगवान ऋषभ को राजनीति और धर्मनीति के व्यवस्था में अग्रणी मान सकते हैं। उनका दोनों क्षेत्र में अवदान है। वे एक महान धर्मनेता भी कहे जा सकते हैं। आज का दिन उनकी तपस्या की सम्पन्नता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने दीक्षा से पूर्व कितना शिक्षण, प्रशिक्षण लोगों को प्रदान किया। भगवान ऋषभ ने मानों अपने कर्त्तव्य का निर्वाह किया। बारह महीना और चालीस दिन का उनका वर्षीतप हुआ। वर्तमान में तो लोग सलक्ष्य वर्षीतप करते हैं, लेकिन भगवान ऋषभ का वर्षीतप तो स्वतः ही बिना लक्ष्य के हो गया। उनको मानों दान मिला ही नहीं तो उनके तो सहज ही तप हो गया। एक दिन उपवास और एक दिन भोजन की व्यवस्था भी बहुत अच्छी है। हमारे साधु-साध्वियां विहार आदि करने के बाद भी वर्षीतप करते हैं।
वर्षीतप धारियों को करवाया संकल्प
आचार्यश्री ने नए वर्षीतप करने वाले श्रावक-श्राविकाओं को उससे संदर्भित संकल्प कराया। आचार्यश्री ने भगवान ऋषभ के नाम मंत्रों का जप भी कराया।साथ ही आचार्यश्री महाश्रमण ने मंत्री मुनिश्री सुमेरमल स्वामी (लाडनूं) के प्रयाण दिवस पर उनकी आत्मा के ऊर्ध्वारोहण के प्रति मंगलकामना की।
श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा सुधर्मा सभा पांडाल
सोमवार को सुधर्मा सभा वर्षीतप करने वाले श्रद्धालुओं से भरा हुआ था। अक्षय तृतीया आयोजन समिति के संयोजक संजय खटेड़ ने बताया कि मुख्य प्रवचन कार्यक्रम से पूर्व अक्षय तृतीया समारोह का कार्यक्रम प्रारम्भ हो गया। देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से सेवा करने व वर्षीतप पारणा के संदर्भ में उपस्थित श्रद्धालुओं की अपार संख्या जैन विश्व भारती के विशाल परिसर को मेले जैसा रूप प्रदान कर रही थी। आचार्यश्री के आगमन से पूर्व उपस्थित जनता को साध्वीप्रमुखा व साध्वीवर्या ने उद्बोधित किया। साध्वीवृंद ने प्रज्ञागीत का संगान किया। आचार्यश्री के आगमन के बाद उनके द्वारा किए गए मंगल महामंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का आरम्भ किया गया। इस अवसर पर तेरापंथ महिला मण्डल-लाडनूं सहित लाडनूं तेरापंथ समाज ने अक्षय तृतीया सम्बंधी गीत का संगान किया। योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष प्रमोद बैद ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।मुख्यमुनिश्री महावीरकुमार ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को उद्बोधित किया। आचार्यश्री ने उपस्थित श्रद्धालु जनता को नित्य की भांति कुछ समय तक ध्यान का प्रयोग कराया।





