कलम कला स्पेशल रिपोर्ट-  सरसरी नजर- राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023: (2) – भाजपा राजस्थान की सभी जातियों को साधने में जुटी, ‘कास्ट किंग’ लीडर्स को चुनाव की रणनीति संभलवाने की कवायद जारी, सोशल इंजीनियरिंग से सधेंगे सारे समीकरण

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कलम कला स्पेशल रिपोर्ट- 

सरसरी नजर- राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023: (2) –

भाजपा राजस्थान की सभी जातियों को साधने में जुटी,

‘कास्ट किंग’ लीडर्स को चुनाव की रणनीति संभलवाने की कवायद जारी, सोशल इंजीनियरिंग से सधेंगे सारे समीकरण

जयपुर (संतोष कुमार पांडेय, जयपुर)। राजस्थान में विधानसभा चुनाव- 2023 होने नजदीक आते जा रहे हैं। ऐसे में फिर से राज्य में प्रमुख जातियों को साधने का काम शुरू हो गया है। इसमें कांग्रेस व भाजपा दोनों ही दल अपने-अपने तरीकों से काम कर रहे हैं। बीजेपी भले ही जातियों को लेकर सीधी बात न करे, अन्य तरीकों से बातें करती है, लेकिन वह भी राजस्थान में जातिगत समीकरण बैठाने में अब जुट चुकी है। जिस तरीके से पिछले दिनों राजस्थान में जातिगत सम्मेलन हुए हैं, और लगातार विभिन्न जातियों के प्रादेशिक सम्मेलन होते जा रहे हैं। इससे अब उसके असर पर भी सभी के द्वारा चिंतन किया जा रहा है। चुनाव से पहले बीजेपी संगठन में भी कर सकती है सोशल इंजीनीयरिंग का फार्मूला अपनाने जा रही है और लगभग सभी जातियों को साधने के लिए कुछ पुराने और कुछ नए लोगों को पार्टी संगठन में फिट करने का मानस दिखाई दे रहा है।
भाजपा साधेगी ‘कास्ट किंग’ लीडर्स को
बीजेपी ने भी चुनाव से पहले जातिगत समीकरणों को साधने पर अपना पूरा ध्यान लगा दिया है। इस बार के राज्य विधानसभा चुनाव में ‘‘कास्ट किंग’’ लीडर्स की चर्चा तेज हो गई है। ऐसी कई जातियां हैं, जिनके लीडर्स की पकड़ मानी जाती है। आइये जानते हैं कि बीजेपी में कौन हैं बड़े कास्ट किंग लीडर्स, जिन्हें पार्टी जातियों में जीत का योद्धा मानती है।
क्षत्रियों को साधने के लिए राजेन्द्र राठौड़
तीस साल से अधिक समय से विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाले राजेंद्र सिंह राठौड़ को इस बार चुनाव से ठीक आठ महीने पहले बीजेपी ने प्रमोशन दिया है और उन्हें उपनेता प्रतिपक्ष से सीधे ‘नेता प्रतिपक्ष’ बना दिया गया। शेखावाटी के तीन जिलों चूरू, सीकर और झुंझुनू के अलावा जयपुर और अन्य जिलों के क्षत्रिय वोटर्स को साधने के लिए बीजेपी ने यह निर्णय लिया। राजेंद्र राठौड़ वैसे तो राजस्थान में मंत्री और कई पदों पर रहे, लेकिन उनके प्रभाव को बड़ा करने के लिए बीजेपी ने उन्हें प्रमोशन दिया है। जयपुर में हुए क्षत्रिय महासम्मेलन में राजेंद्र राठौड़ को महत्वपूर्ण तरजीह दी गई थी। क्षत्रिय बाहुल्य सीटों को बीजेपी अपना मानती आई है।
सीपी जोशी को मिला ब्राह्मणों को साधने का मौका?
इसके अलावा चुनाव से ठीक आठ महीने पहले बीजेपी ने जातिगत समीकरण साधने के लिए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी को पार्टी की कमान सौंप दी। इसे ब्राह्मण महापंचायत का बड़ा असर माना जा था। इस महापंचायत में जोशी को बड़ा महत्व दिया गया था। इसे मेवाड़ क्षेत्र में पकड़ बनाने की एक कोशिश भी मानी जा रही है। मगर जानकारों का कहना है यह बदलाव ब्राह्मण वोटर्स पर पकड़ बनाने के लिए किया गया है। उदयपुर के बाहर भी सीपी जोशी के प्रभाव को बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि, सीपी जोशी भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। मगर चुनाव के दौरान इस बदलाव से सीपी जोशी को अपने को साबित करने का मौका मिलेगा। घनश्याम तिवारी व अरुण चतुर्वेदी की भूमिका भी इसमें महत्वपूर्ण होगी.
सतीश पूनिया के माध्यम से जाटों पर नजर
उपनेता प्रतिपक्ष बनाए गए सतीश पूनिया पर भी पार्टी की नजर बनी हुई है। सतीश पूनिया भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, तो उन्हें प्रदेश में खुलकर काम करने का मौका मिला था। यहीं से पूनिया ने आमेर विधानसभा क्षेत्र से बाहर प्रदेश के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर अपनी गहरी पहचान बनाई। जाट बाहुल्य सीटों परउन्होंने खूब दौरे किए। जाट महाकुंभ में सतीश पूनियां को बड़ी प्रमुखता मिली थी। सतीश पूनिया शेखावटी के सादुलपुर (चूरू) से आते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी कर्मभूमि जयपुर को ही बना लिया। पूनिया को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने पर जाटों के कई नेताओं ने विरोध किया था। यहां तक कि कांग्रेस के विधायक भी खुलकर सामने आ गए थे। पूनिया पहली बार के विधायक हैं, फिर भी उन्हें पार्टी ने उप नेता प्रतिपक्ष बनाया है। यह स्पष्ट रूप से जाटों को साधने का प्रयास ही कहा जाएगा।
गुर्जर और एमबीसी समाज के लिए विजय बैंसला
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला के सहारे बीजेपी गुर्जर और एमबीसी समाज को साधने में जुटी है। विजय बैंसला कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे हैं। पूर्वी राजस्थान में बीजेपी गुर्जर और एमबीसी समाज को विजय के नाम पर अपनी ओर करने का प्रयास कर रही है। पूर्वी राजस्थान के आगे कई और अन्य सीटों पर भी बीजेपी विजय को आगे करके चल रही है। प्रदेश की कुल 75 विधानसभा सीटों पर एमबीसी और गुर्जर समाज का प्रभाव है। इन पर बीजेपी विजय बैंसला को आगे बढ़ा रही है। ये वो सीटें हैं जहां पर कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला का प्रभाव था। इन पर विजय के सहारे विजय की उम्मीद बीजेपी लगाए बैठी हुई है। भीलवाड़ा में पीएम के कार्यक्रम में विजय ने बड़ी भूमिका निभाई थी।

सैनी वोटर्स पर फोकस करेंगे भूपेंद्र सैनी

बीजेपी नेता 43 साल के भूपेंद्र सैनी की पकड़ सैनी समाज में मानी जाती है। सैनी पार्टी में कई जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इन्हे पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 42 सीटों पर प्रचार के लिए मैदान में उतारा गया था। वसुंधरा सरकार में इन्हे यूथ बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था। सैनी भाजयुमो में महामंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने करौली लोकसभा सीट के लिए इन्हे प्रभारी भी बनाया था। वहां पार्टी को जीत भी मिली थी। दौसा के रहने वाले वाले सैनी को पार्टी अन्य क्षेत्रों में भी मैदान में उतार रही है। इसी तरह से भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रह चुके और वर्तमान में भाजपा के प्रदेश मंत्री अशोक सैनी और राज्य सभा सांसद व भाजपा के प्रदेश अशोक गहलोत को भी सैनी-माली समाज के वोट साधने के लिए काम में ले रहे हैं। आगामी 4 जून को जयपुर में होने जा रहे ‘माली महासंगम’ में भी सैनी समाज को साधने के लिए प्रयास किए जाएंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला इस महासंगम में भी अन्य जातियों के महासम्मेलनों की तरह पहुंचेंगे और लोगों को प्रभावित करेंगे।
मुस्लिम सीटों पर बीजेपी की नजर
मुस्लिम सीटों पर बीजेपी कई नेताओं को आगे करती आई है। पूर्व मंत्री यूनुस खान और अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष सादिक खान को इन सबमें मजबूत लीडर माना जा रहा है। कई धरने और आंदोलन में इनकी प्रमुख भूमिका रही है। इनके साथ ही कई और नेता भी लिस्ट में शामिल हैं। उनके लिए पार्टी को ठीक समय का इंतजार है।
मीणाओं के लिए ‘बाबा’ का सहारा
मीणा वोटर्स पर फोकस करने के लिए बीजेपी केवल और केवल डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के सहारे है। पूर्वी राजस्थान की सीटों के अलावा पूरे राजस्थान में किरोड़ी लाल मीणा को पार्टी मजबूत नेता मानती है। उन्हें पीएम के मंच से लेकर सभी प्रमुख जगहों पर पार्टी ले जाती है। राज्य के सभी प्रमुख नेताओं में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का प्रमुख स्थान है। उनकी नाराजगी और बातों पर पार्टी पूरा फोकस करती है। यहां लोग कह देते है ‘बाबा’ ही सहारा हैं।
यादव सीटों पर पूरा फोकस ‘नाथ’ के सहारे
राजस्थान में यादव बाहुल्य सीटों और जिलों में बीजेपी ने अलवर के सांसद बाबा बालक नाथ को मजबूत पकड़ बनाने के लिए कई बार संकेत दिए हैं। बाबा बालक नाथ अलवर का बहरोड़ सीट पर पूरा फोकस है। इसके साथ ही सीकर, अलवर, कोटपूतली और विराटनगर के साथ ही साथ जयपुर की सीटों पर बाबा बालक नाथ के दौरे शुरू हो गए हैं।
वैश्य वोटर पर बिड़ला सब पर भारी
राजस्थान में वैश्य वोटर्स पर बीजेपी अपनी पकड़ बनाने के लिए कोटा के दो बार के सांसद ओम बिड़ला पर पूरा फोकस है। बीजेपी में बिड़ला का वैश्य समाज पर बड़ा असर है। हाड़ौती की कई सीटों के आलावा पूरे प्रदेश में बिड़ला कई बार दौरे भी अलग-अलग समय पर कर चुके हैं।
मेघवालों पर ‘अर्जुन’ की नजर
राजस्थान में अनुसूचित जाति और विशेषकर अजा में सबसे बड़े मेघवाल वोटर्स पर बीजेपी ने पकड़ बनाने के लिए बीकानेर के सांसद अर्जुन राम मेघवाल को दोनों बार मंत्री बनाया है। हाल ही में उन्हें कानून मंत्री का दर्जा देकर यह सिद्ध किया है कि अनुसूचित जाति से बाबा साहेबा डा. अम्बेडकर के बाद अगर कोई देश का कानून मंत्री बना है तो वह अजु्रनराम मेघवाल हैं। आईएएस रहे और राजनीति में पारंगत अर्जुन राम को कई प्रमुख जिम्मेदारियां दी गई है। बीजेपी ‘अर्जुन’ के सहारे मेघवाल वोटर्स पर अपनी बड़ी नजर बनाए हुए है।
जातियों के बाद उपजातियों पर जोर
राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारैठ का कहना है कि अभी तक तो यह जातियों का मामला था, अब उप जातियां भी सामने आ गई हैं। उनका कहना है कि यहां पर राजनीतिक दलों पर जातियों के संगठन और उनके प्रमुखों का असर पड़ रहा हैं। आने वाले समय में यह और बढ़ेगा।
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Author: kalamkala

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