नैतिकता के जागरण का अनूठा प्रयोगः लाडनूं में जैविभा विश्वविद्यालय में सामुहिक रूप से किया गया अणुव्रत महासंगान, कुलपति ने बताया अणुव्रतों को समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना का माध्यम

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नैतिकता के जागरण का अनूठा प्रयोगः

लाडनूं में जैविभा विश्वविद्यालय में सामुहिक रूप से किया गया अणुव्रत महासंगान,

कुलपति ने बताया अणुव्रतों को समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना का माध्यम

लाडनूं (kalam Kala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान मान्य विश्वविद्यालय के आचार्य महाप्रज्ञ ऑडिटोरियम में नैतिकता के जागरण का अनूठा प्रयोग आजमाते हुए अणुव्रत महासंगान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समूचे स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने मिलकर सामुहिक रूप से अणुव्रत गीत का गायन किया। अणुव्रत अमृत महोत्सव के गौरवशाली अवसर पर यह गायन अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के देशव्यापी अणुव्रत संगान कार्यक्रमों के एक साथ आयोजन के आह्वान पर किया गया। अणुव्रत गीत आचार्यश्री तुलसी के अणवु्रत आंदोलन से सम्बंधित है और यह जीवन को नैतिक बनाने की प्रेरणा प्रदान करता है। गीत के बोल ‘संयममय जीवन को, नैतिकता की सुर-सरिता में जन-जन मन पावन हो’ में समस्त जन के लिए मानसिक रूप से संयम, नैतिकता और पवि़त्रता का संदेश देते हैं। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने बताया कि अणुव्रत के कारण सामाजिक बदलाव संभव होता है। आचार्य तुलसी ने कहा था कि सुधार अपने आप से करना चाहिए, इससे पूरे समाज व युग का सुधार संभव है। उन्होंने समूची मानवता के संदेश दिया था, वे किसी भी तरह की धार्मिकता या साम्प्रदायिकता से पूरी तरह से मुक्त थे। उन्होंने बताया कि आचार्य तुलसी के स्वप्नों पर बना जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय उनके विचारों का अनुगामी है और देशभर में नैतिक मूल्यों को सिखाने वाला प्रमुख विश्वविद्यालय बना हुआ है। इस 300 लोगों के सामूहिक अणुव्रत संगान कार्यक्रम में ओएसडी प्रो. नलिन के. शास्त्री, कुलसचिव प्रो. बीएल जैन, दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्द प्रकाश त्रिपाठी, असिस्टेंट रजिस्ट्रार दीपाराम खोजा, प्रो. जिनेन्द्र कुमार जैन, मोहन सियोल, राकेश कुमार जैन, प्रो. रेखा तिवाड़ी, डा. लिपि जैन, डा. युवराज सिंह खंगारोत, डा. गिरीराज भोजक, डा. अमिता जैन, डा. आभा सिंह, डा. विनोद कस्वां, डा. सत्यनारायण भारद्वाज, विजयकुमार शर्मा, डा. सरोज राय, डा. प्रगति भटनागर, डा. रविन्द्र सिंह राठौड़, डा. अशोक भास्कर, डा. जेपी सिंह, प्रगति चैरड़िया, श्वेता खटेड़, देशना चारण, डा. आयुषी शर्मा, निरंजन सिंह सांखला, डा. वीरेन्द्र भाटी, अभिषेक चारण, भुवनेश शर्मा, रमेशदान चारण, दीपक माथुर, प्रकाश गिड़िया, अमीलाल चाहर, पवन सैन आदि उपस्थित रहे।
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Author: kalamkala

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