क्या लाडनूं की 60 साल पुरानी खादी संस्था अब दम तोड़ देगी? कुछ लोग जुटे हैं कब्जा करने, जमीनें बेचने और पूरी संस्था को खुर्द-बुर्द करने की उधेड़बुन में,
लाडनूं की ग्राम स्वराज्य समिति की व्यथा-कथा, अध्यक्ष को उतरना पड़ा लड़ाई के मैदान में, दिया अनशन व धरना, गांधीवादी तरीके से विरोध का मोर्चा संभाला

लाडनूं (kalamkala.in)। लम्बे समय से अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रही लाडनूं की खादी संस्था ‘ग्राम स्वराज्य समिति, लाडनूं’ को बचाने की गुहार को लेकर आखिर ग्राम स्वराज्य समिति लाडनूं के अध्यक्ष गौतम के. गट्स को खुद को उपखंड कार्यालय के सामने उपवास और धरने पर बैठना पड़ा है। खादी आयोग से रजिस्टर्ड एवं सोसायटी एक्ट के तहत गठित यह संस्था लम्बे समय से ग्रामीण लोगों को स्वरोजगार देने में श्रेष्ठतम कार्य करती रही है। इस संस्था की जमीन, मकान और अन्य सम्पत्तियां यहां पुलिस थाना लाडनूं से आगे जसवंतगढ रोड पर स्थित है। इसमें से कुछ जमीन कुछ पदाधिकारी बने लोगों ने मनमानी करते हुए किसी लोभ-लालच के चलते बेच दी थी। इसके बाद भी जमीन को खुर्द-बुर्द करने और संस्था के अस्तित्व को मिटाने के लिए कुछ लोग निरन्तर सक्रिय रहे। इस खादी संस्था को एक प्राइवेट स्कूल का रूप देने की भी भरसक कोशिश की गई थी, जिसे लाडनूं के समाजसेवी नरपतसिंह गौड़ ने आगे आकर प्रयास कर विफल बनाया। लेकिन, अब भी येन केन प्रकारेण कुछ लोग इसे हड़प करने के प्रयासों में लगातार लगे हुए हैं। ऐसे ही लोगों ने अवैध तरीके से साजिशन एक ही परिवार के लोगों को इस संस्था के सदस्य बना कर इसे हड़पने पर उतारू हैं। ये लोग इस संस्था को अपनी जेबी संस्था बना कर और अपने मनमाने पदाधिकारी बना कर ऐसी ही डीडवाना में चल रही अपनी संस्था में विलीन कर इसकी कहानी को सदा के लिए समाप्त करने पर उतारू हैं। यही कारण है कि इस संस्था के अध्यक्ष बने व्यक्ति को सारी कहानी समझ में आ गई और वे खुद अब संस्था बचाने की मुहिम में शामिल होते हुए लड़ाई के मैदान में शुद्ध गांधीवादी तरीके से उतर पड़े हैं।
एक ही परिवार के लोग काबिज होकर करना चाहते हैं संस्था को खुर्द-बुर्द
मंगलवार को उपखंड कार्यालय के सामने उपवास पर बैठे ग्राम स्वराज्य समिति लाडनूं के अध्यक्ष गौतम के. गट्स ने इस सम्बन्ध में उपखंड अधिकारी ममता लहुआ को एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें लाडनूं संस्था के अवैध विलय को रोकने और एक परिवार के सदस्यों के अवैध पदाधिकारी बनने को रजिस्ट्रार कार्यालय से प्रमाणित करने से रोके जाने बाबत मांग की गई है। ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम स्वराज्य समिति लाडनूं संस्था को बचाने के लिए संस्था के अध्यक्ष गौतम के. गट्स ने एक दिन का उपवास मंगलवार को रखा है और साथ में संस्था की मीटिंग भी रखी। मीटिंग में यह स्पष्ट निर्णय लिए गए कि संस्था भविष्य में किस तरह से संचालित की जाती रहेगी। इस बैठक में और उपवास के साथ अध्यक्ष गौतम के. गट्स के साथ कमल किशोर, विमल कुमार, सुलेमान खान, अब्दुल हमीद, मुस्ताक खान, किशनसिंह आसोटा, छगनलाल सेठी, शौकत मंत्री, इलियास, गफ्फार खान, राधा देवी, छोटी देवी, विमला देवी, पेमल देवी आदि भी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि इस खादी संस्था के लिए लाडनूं तहसील भर के सैंकड़ों लोगों ने अपना खून-पसीना बहाया था और संस्था को, खादी उत्पादनों को, ग्रामीण रोजगार को और गांधीवादी चेतना को शिखर पर पहुंचाया था। ऐसी गौरवशाली इतिहास वाली संस्था का अब मटियामेट करने पर कुछ लोग गिरोह बना कर उतारू हो गए हैं। इसी से व्यथित होकर संस्था के अध्यक्ष ने अब मोर्चा संभाला है।
संदेह है कि रजिस्ट्रार के यहां करेगी विरोधी टीम गड़बड़ घोटाला
मंगलवार को की गई ग्राम स्वराज्य समिति लाडनूं की बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में अध्यक्ष गौतम के. गट्स ने कहा कि जब तक संस्था के सचिव और उपाध्यक्ष के चुनाव नहीं हो जाते, तब तक लाडनूं के हुसैन खान संस्था के कार्यकारी मुख्य प्रबंधक नियुक्त रहेंगे और राजेंद्र कुमार व्यवस्थापक के रूप में निरन्तर संस्था का काम करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस संस्था की स्थापना 21-11-1966 में सर्वोदय के लोगों ने गांव में रोजगार और सामाजिक सरोकार के काम के लिए की थी। संस्था बनने के बाद काफी समय तक अपने काम से इस संस्था ने आस पास के क्षेत्र अपना नाम कमाया था। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में डीडवाना की संस्था के सदस्यों ने अपनी मनमानी करते हुए लाडनूं की ग्राम स्वराज्य समिति की पहले भी जमीन बेच दी थी और अब इस संस्था को डीडवाना संस्था में विलय करने की साज़िश रची जा रही है। उनकी नजर इस संस्था की बेशकीमती जमीन पर भी टिकी हुई है। वे लोग षड्यंत्र पूर्वक इस संस्था में एक ही परिवार के सदस्यों को शामिल करके, उनकी वजह से अब अपनी मनमानी करने पर उतारू हैं। अब अगर उन लोगों ने अवैध तरीके से सोसायटी रजिस्ट्रार के कार्यालय में किसी भी तरह से प्रयास करके अपने मनमाने नए पदाधिकारी बनाए तो उन्हें प्रमाणित करने से रोकने के लिए उन्होंने अपने ज्ञापन में उपखंड अधिकारी से मांग की है और लिखा है कि इस संस्था को बचाने में लाडनूं की जनता के साथ उनकी मदद की भी आवश्यकता है।



