लाडनूं के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की बिगड़ी हालत का जिम्मेदार कौन? प्रधानाचार्य समेत 13 शिक्षको का एक साथ नदारद रहना, 4-4 दिनों तक प्रधानाचार्य का कोई पता नहीं रहना, लगा अनियमितताओं का घेरा, कैसे होगी गुणवतापूर्ण अच्छी शिक्षा?

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लाडनूं के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की बिगड़ी हालत का जिम्मेदार कौन?

प्रधानाचार्य समेत 13 शिक्षको का एक साथ नदारद रहना, 4-4 दिनों तक प्रधानाचार्य का कोई पता नहीं रहना, लगा अनियमितताओं का घेरा, कैसे होगी गुणवतापूर्ण अच्छी शिक्षा?

लाडनूं (kalamkala.in)। सरकार जितना भी अधिक जोर सरकारी स्कूलों में गुणवतापूर्ण और अच्छी शिक्षा पर दे रही है, उतने ही शिक्षक समुदाय द्वारा सरकार की योजना को विफल करने की ठानी हुई प्रतीत होती है। लाडनूं में तो लगभग यही होता दिखाई दे रहा है। यहां जब से सीबीईओ कार्यालय सक्रिय रूप से निरीक्षण के कार्य में उतरा है, लगभग इसी प्रकार का नजारा देखने को मिला है। हाल ही में गुरूवार को ग्राम ढीगंसरी में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कल्याण सिंह राठौड़ द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किए जाने पर हालात ने ग्रामीण क्षेत्र की स्कूलों पर अंगुलियां उठा दी हैं। इस आकस्मिक निरीक्षण में प्रधानाचार्य सहित 13 कर्मचारियों का अनुपस्थित मिलना काफी गंभीर बात है। अब इन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। लगता है कि लाडनूं तहसील क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बरती जा रही है।

चार-चार दिन बिना सूचना कहां गायब रहते हैं प्राचार्य

इस औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारी गुरूवार को प्रातः करीब 10 बजे विद्यालय पहुंचे और 11.30 बजे तक विद्यालय की व्यवस्थाओं व शैक्षणिक वातावरण का अवलोकन किया। इस दौरान कुल 20 शिक्षकों में से मात्र 7 शिक्षक ही उपस्थित पाए गए, जबकि प्रधानाचार्य सहित 13 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। खास बात यह रही कि प्रधानाचार्य दयानंद बरबड़ की स्वयं की 12 से 15 तारीख तक की उपस्थिति संबंधी कॉलम भी रिक्त पाए गए। इनमें न तो उनकी किसी प्रकार की अवकाश प्रविष्टि दर्ज थी और न ही उनके स्थान पर किसी प्रभारी की नियुक्ति की गई थी।

यह क्या कर रहा है सरपंच पुत्र शिक्षक

यहां उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत ढिंगसरी के सरपंच धनी देवी बिडियासर के पुत्र शिक्षक ओमप्रकाश बिडियासर का उपस्थिति रजिस्टर में एक तारीख से 15 तारीख तक पूरे कॉलम खाली पड़े थे। बताया गया है कि सरपंच पुत्र कभी भी स्कूल नहीं जाते हैं और कभी कभार जाकर 10-15 दिनों के हस्ताक्षर एक साथ ही करते हैं। ऐसा पिछले करीब 6 साल से चलना बताया गया है। इसके बावजूद आज तक किसी भी प्राचार्य ने उन्हें पाबंद नहीं किया। इसी का परिणाम रहा कि अन्य शिक्षक भी होड़ा-होड़ में इसी प्रकार से छुटिट्यां मारने लगे।

शिक्षा विभाग ने लिया गंभीरता से, कठोर कार्रवाई की चेतावनी

मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्वयं की अनुपस्थिति सहित अन्य 12 शिक्षकों की अनुपस्थिति तथा वर्णित बिंदुओं पर स्पष्टीकरण तीन दिन की अवधि में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आवश्यक कार्रवाई के लिए संपूर्ण रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को प्रेषित की गई है। इस नोटिस में प्रधानाचार्य की घोर लापरवाही बताते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि विद्यालयों में अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

प्रधानाचार्य को दिया गया है यह नोटिस

ढींगसरी विद्यालय के प्रधानाचार्य को जारी इस नोटिस में बताया गया है कि ‘’दिनांक 15.01.2026 को आपका विद्यालय निरीक्षण किया गया। विद्यालय समय पर 17 में से केवल 7 कार्मिक समय पर उपस्थित हुए तथा विद्यालय में कार्यरत 3 पंचायत शिक्षकों में से एक भी कार्मिक उपस्थित नहीं पाया गया। दिनांक 12.01.2026 को आप स्वंय की उपस्थित कॉलम में दर्ज नहीं थी तथा आपकी अनुपस्थिति के दौरान विद्यालय प्रभार का आदेश किसी कार्मिक के नाम से जारी नहीं किया गया है। कक्षा-कक्ष के निरीक्षण के दौरान कक्षा 2 व 9 में टाइम टेबल लगा हुआ नहीं पाया गया तथा क्रियाशील तौलने की मशीन नहीं पाई गई। एसडीएमसी रजिस्टर में सचिव के हस्ताक्षर नहीं पाये गये तथा एसडीएमसी का सचिव आपके विद्यालय में 3 व्याख्याता कार्यरत होने के बावजूद भी वरिष्ठ अध्यापक कार्मिक को एसडीएमसी का सचिव बनाया गया है जो कि नियम विरूद्ध है।’’

नोटिस में मांगा तत्काल जवाब

नोटिस में आगे बताया गया है कि ‘‘विद्यालय में अनियमितता पाया जाना एवं प्रधानाचार्य द्वारा स्वयं की अनुपस्थित में किसी अन्य के नाम विद्यालय संचालन हेतु आदेश जारी नहीं किया जाना घोर लापरवाही को दर्शाता है। आपका उपरोक्त कृत्य राजकार्य के प्रति उदासीनता का द्योतक है तथा राजकीय आदेशों की अवहेलना को दर्शाता है। क्यों नहीं, आपके विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु प्रस्ताव तैयार किये जाकर विभाग को प्रेषित कर दिये जावें? इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण तत्काल प्रस्तुत करें। कारण बताओ नोटिस का जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो आपके विरूद्व राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील ) नियम 1958 के नियम 17 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही करने हेतु प्रस्ताव तैयार किये जाकर विभाग को प्रेषित कर दिये जायेगें। जिसके लिए आप स्वयं व्यक्तिशः जिम्मेदार होगें।’’
kalamkala
Author: kalamkala

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