लाडनूं शहर में जर्जर और जुगाड़ के सहारे खड़े खंभे और लटकते-झूलते बिजली के तार दे रहे हैं हादसों को खुला न्यौता, क्यों बंद पड़ी है विद्युत अभियंताओं और कार्मिकों की आंखें, लगातार कर रहे हैं जनता की समस्याओं व परेशानियों की उपेक्षा

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लाडनूं शहर में जर्जर और जुगाड़ के सहारे खड़े खंभे और लटकते-झूलते बिजली के तार दे रहे हैं हादसों को खुला न्यौता,

क्यों बंद पड़ी है विद्युत अभियंताओं और कार्मिकों की आंखें, लगातार कर रहे हैं जनता की समस्याओं व परेशानियों की उपेक्षा

लाडनूं (kalamkala.in)। अजमेर विद्युत वितरण निगम द्वारा आएदिन रखरखाव, मैंटीनेंस के नाम पर घंटों बिजली काट दी जाती है और जनता को परेशानियां उठानी पड़ती है। निगम जनता की समस्याओं और परेशानियों की ओर से लगभग आंखें ही मूंदे रहता है। शहर में झूलते तारों, जर्जर खंभों और ट्रांसफार्मर के नीचे होना, उनके चारों तरफ पानी के भराव और झाड़ियों के उगने आदि की समस्याएं कोई साधारण समस्याएं नहीं हैं। इनके कारण हादसे और जन-धन की हानि भी संभावित रहती है, परन्तु निगम के अभियंताओं और कर्मचारियों को जनता की परेशानियों से लगता है कि कोई सरोकार ही नहीं है। स्टेशन रोड पर टूटे हुए खंभे को एक दूसरे टूटे हुए खंभे का सहारा दिया गया है‌‌, यह खंभा मात्र सरियों पर टिका है, जो कभी भी गल-सड़ कर गिर सकता है। सर्वाधिक आवागमन और चहल-पहल वाले इस क्षेत्र में कभी भी कोई गंभीर हादसा हो सकता है। इस मार्ग से विद्युत निगम की गाड़ियां भी दिन भर गुजरती रहती हैं, लेकिन कोई भी आंखें खोल कर देखना ही नहीं चाहते। जब विद्युतकर्मी और अधिकारी अपनी ही सम्पति की खुली उपेक्षा करते हैं तो इनसे और तै अपेक्षा ही क्या की जा सकती है। इसी तरह झूलते तारों की समस्या है। यहां गौरव पथ स्थित सुभाष बोस स्कूल के सामने की शंकर कॉलोनी की गली में बिजली का तार इतना नीचे है कि कोई भी उसे हाथ से ही पकड़ सकता है। इस मार्ग से स्कूल के बच्चे गुजरते हैं और वाहनों की आवाजाही भी बनी रहती है। कभी भी किसी वाहन आदि में फंसे कर तार टूट सकता है या कोई भी बच्चा इसे भूलवश पकड़ कर हादसे का शिकार हो सकता है। इस तरह झूलते तार जन-जीवन के लिए खुला खतरा है। लेकिन इनकी तरफ निगम के अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जाना अचरज भरा है। विद्युत वितरण निगम को जनता की समस्याओं और परेशानियों के समाधान की त्वरित व्यवस्था होनी चाहिए। बरसों तक समस्या बनी रहने पर वह गंभीर बनती जाती है। बिजली को मजाक में लेना कभी अधिकारियों के लिए भारी पड़ सकता है।

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Author: kalamkala

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