उलेमाओं ने उठाई लाडनूं में अलग मुस्लिम महिला कॉलेज और महिला अस्पताल की मांग, लाडनूं के जावा बास में अमन कॉन्फ्रेंस व इस्तकबाल-ए-रमजान में हुई महिलाओं के उत्थान व समाज सुधार की तकरीरें

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उलेमाओं ने उठाई लाडनूं में अलग मुस्लिम महिला कॉलेज और महिला अस्पताल की मांग,

लाडनूं के जावा बास में अमन कॉन्फ्रेंस व इस्तकबाल-ए-रमजान में हुई महिलाओं के उत्थान व समाज सुधार की तकरीरें

अशरफ खां, पत्रकार। लाडनूं (kalamkala.in)। यहां जावा बास स्थित भट्टा कालोनी में जमीअत अहले हदीस राजस्थान की जेरे-निगरानी में अमन कॉन्फ्रेंस एवं इस्तकबाल-ए-रमजान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे उलेमाओं ने समाज में फैल रही बुराइयों, इस्लामी तालीम और सामाजिक सुधार पर विस्तार से अपने विचार रखे।

महिलाओं का सुधार पूरे समाज का सुधार है, बेपर्दगी और चुगलखोरी से बचें

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमालुद्दीन सल्फी ने मुस्लिम समाज की महिलाओं में फैल रही सामाजिक बुराइयों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सुधार पूरे समाज का सुधार है, क्योंकि परिवार और समाज पर उनका गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने महिलाओं को चुगलखोरी, बेपर्दगी और गैर-इस्लामी रवैयों से बचने की नसीहत दी तथा शौहर की फरमाबरदारी और इस्लामी उसूलों पर अमल करने की अपील की।

लाडनूं में मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग कॉलेज बनाएं, नैतिक गिरावट अनुचित

फजीलतुशेख शमीम फौजी मदनी मुंबई ने नौजवानों में बढ़ती बुराइयों और उनके समाधान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने शराब और नशे को हराम ठहराकर इंसान को तबाही से बचाने का रास्ता दिखाया है। उन्होंने आधुनिक शिक्षा के नाम पर समाज में फैल रही नैतिक गिरावट पर कटाक्ष करते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे बुरी संगत से दूर रहकर इस्लामी मूल्यों को अपनाएं। उन्होंने मुस्लिम समाज की इस्लामी शिक्षा से दूरी को सबसे बड़ा नुकसान बताते हुए लाडनूं क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा के लिए महिला कॉलेज की स्थापना की आवश्यकता पर जोर दिया।

लाडनूं में अलग महिला अस्पताल की स्थापना की जाए

फजीलत शेख डॉ. सैयद मेराज रब्बानी मदनी बैंगलोर ने अपने बयानों में तौहीद, शिर्क, सुन्नत और बिदअत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कुरआन व हदीस की रोशनी में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मुस्लिम समाज के हालात सुधारने के लिए लाडनूं में महिला अस्पताल की स्थापना की अपील की। साथ ही बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर डॉक्टर, वकील और जिम्मेदार नागरिक बनाने की सलाह दी। उन्होंने शादियों में दहेज प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के लिए युवाओं को प्रेरित किया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने भाग लिया।

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Author: kalamkala

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