डॉ. लिपि जैन को ‘क्षुल्लक जिनेंद्र वर्णी : अहिंसा एवं जन चेतना राष्ट्रीय पुरस्कार’ से नवाजा, प्राच्यविद्या एवं जैन संस्कृति संरक्षण संस्थान जयपुर द्वारा लाडनूं में आयोजित काव्य गोष्ठी में विभिन्न कवियों ने किया काव्यपाठ

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डॉ. लिपि जैन को ‘क्षुल्लक जिनेंद्र वर्णी : अहिंसा एवं जन चेतना राष्ट्रीय पुरस्कार’ से नवाजा,

प्राच्यविद्या एवं जैन संस्कृति संरक्षण संस्थान जयपुर द्वारा लाडनूं में आयोजित काव्य गोष्ठी में विभिन्न कवियों ने किया काव्यपाठ

लाडनूं (kalamkala.in)। प्राच्यविद्या एवं जैन संस्कृति संरक्षण संस्थान जयपुर की आयोजना में सुजलांचल क्षेत्र के कवियों की काव्य-गोष्ठी का आयोजन यहां दाधीच भवन में किया गया। प्राच्य भाषा मनीषी प्रो. जिनेंद्र कुमार जैन की अध्यक्षता एवं वरिष्ठ साहित्यकार राजेश विद्रोही, वरिष्ठ शिक्षाविद् रामकुमार तिवारी व गौरी शंकर ‘भावुक’ के मुख्य आतिथ्य में हुए इस आयोजन में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रेमलता बेगवानी व हर्षलता दुधोड़िया रही।

डॉ. लिपि जैन को किया गया पुरस्कृत

इस अवसर पर जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के अहिंसा एवं शांति विभाग की सहायक आचार्या डॉ. लिपि जैन को उनकी पुस्तक ‘विकास – गांधी एवं आचार्य महाप्रज्ञ की दृष्टि’ को ‘क्षुल्लक जिनेंद्र वर्णी : अहिंसा एवं जन चेतना राष्ट्रीय पुरस्कार 2023’ से पुरस्कृत किया गया। उन्हें यह पुरस्कार संस्था के अध्यक्ष प्रो. जिनेंद्र कुमार जैन व कार्यक्रम के अतिथि राजेश विद्रोही, रामकुमार तिवारी, गौरी शंकर भावुक व प्रेमलता बेगवानी द्वारा प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरूप डॉ. लिपि को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र, शास्त्र व पुरस्कार राशि 11000 रुपए नगद प्रदान किए गए। कार्यक्रम में संयोजिका डॉ. मनीषा जैन ने डॉ. लिपि जैन का परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि 6 से अधिक पुस्तकें, 30 शोध-लेख का प्रकाशन एवं आठ पेटेंट केंद्रीय सरकार द्वारा उनके नाम से पंजीकृत हैं। इनकी लेखन कार्य कुशलता को दृष्टि में रखते हुए इस राष्ट्रीय पुरस्कार से उन्हें पुरस्कृत किया गया है। इस अवसर पर संस्थान द्वारा प्रबुद्ध लोगों और अतिथियों का सम्मान भी संस्था द्वारा किया गया। आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि मदन लाल गुर्जर ‘सरल’, वीजी शर्मा, पंकज सबलानिया ‘सफर’, निशा इणानिया, रामबाबू शर्मा आदि कवियों ने विविध विषयों पर कविताएं प्रस्तुत की। राजेश विद्रोही ने ‘बाबुल की बेसकीमती थाती हैं बेटियां, बेटे अगर चिराग हैं, तो बाती है बेटियां’ कविता प्रस्तुत की।

इन सबकी रही उपस्थिति

काव्य-गोष्ठी का प्रारम्भ रेणु कोचर के मंगलाचरण व स्वागत गीत से किया गया।इस अवसर पर हनुमानमल जांगीड़, सुशील पीपलवा, प्रवीण जोशी, डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़, डॉ. बलवीर सिंह चारण, पंकज भटनागर, सागरमल शर्मा, मदनलाल दाधीच, सुमित जांगिड़, सुमन चौधरी, छवि भटनागर, रामसिंह रैगर, अनुज तिवारी, विनोद पारीक, माया शेखावत आदि सुजलांचल क्षेत्र के प्रमुख लोग उपस्थित रहे।अंत में दीक्षांत हिंदुस्तानी ने आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा जैन ने किया।

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Author: kalamkala

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